नई दिल्ली: महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्स इंफेक्शन (UTI) एक बेहद आम लेकिन काफी परेशान करने वाली स्वास्थ्य समस्या है। कई महिलाएं साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखने के बावजूद बार-बार इस संक्रमण का सामना करती हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर UTI बार-बार क्यों होता है और इससे बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, UTI केवल साफ-सफाई की कमी के कारण नहीं होता। इसके पीछे शरीर की संरचना, हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली और कुछ चिकित्सीय स्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
आखिर क्या होता है UTI?
UTI यानी यूरिनरी ट्रैक्स इंफेक्शन मूत्र प्रणाली में होने वाला एक बैक्टीरियल संक्रमण है। यह संक्रमण मूत्रनली (Urethra), मूत्राशय (Bladder), मूत्रवाहिनी (Ureter) या किडनी तक फैल सकता है।
ज्यादातर मामलों में संक्रमण मूत्रनली (Urethra), और मूत्राशय (Bladder) तक सीमित रहता है।
लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह किडनी तक पहुंच सकता है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में UTI की संभावना पुरुषों की तुलना में कई अधिक होती है क्योंकि महिलाओं की मूत्रनली अपेक्षाकृत छोटी होती है। इससे बैक्टीरिया आसानी से मूत्राशय तक पहुंच जाते हां।

UTI के प्रमुख लक्षण
- बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना।
- पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना।
- पेशाब का रंग धुंधला दिखाई देना।
- तेज बदबू वाला पेशाब।
- पेट के निचले हिस्से में दर्द या दबाव महसूस होना।
- पेशाब में खून दिखाई देना।
- कमजोरी और थकान।
- बुखार या ठंड लगना।
यदि संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए तो मरीज को तेज बुखार, पीठ दर्द, उल्टी और गंभीर कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
साधारण दिन कैसे बन जाता है परेशानी भरी?
दिल्ली की 32 वर्षीय कामकाजी महिला रश्मि (परिवर्तित नाम) बताती हैं कि उन्हें पिछले दो वर्षों में चार बार UTI हो चुका है।
“शुरुआत में मुझे लगा कि शायद पानी कम पीने की वजह से ऐसा हुआ होगा। लेकिन जब बार-बार यही समस्या होने लगी तो डॉक्टर से सलाह ली। तब पता चला कि केवल सफाई ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।”
रश्मि जैसी लाखों महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं। कई बार शुरुआत में हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति गंभीर हो सकती है।

साफ-सफाई के बावजूद भी क्यों होता है UTI?
यही वह सवाल है जो सबसे ज्यादा महिलाओं को परेशान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल व्यक्तिगत स्वच्छता ही UTI का कारण या समाधान नहीं है। इसके पीछे कई जैविक और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं।
- शरीर की संरचना- महिलाओं की मूत्रनली छोटी होती है। यही वजह है कि बैक्टीरिया बहुत कम दूरी तय करके मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं।
- पर्याप्त पानी न पीना- जब शरीर में पानी की कमी होती है तो पेशाब कम बनता है। इससे बैक्टीरिया लंबे समय तक मूत्रमार्ग में बने रह सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- हार्मोनल बदलाव- गर्भावस्था, मेनोपॉज और कुछ हार्मोनल बदलाव महिलाओं में UTI की संभावना बढ़ा सकते हैं।
- डायबिटीज- मधुमेह के मरीजों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। उच्च ब्लड शुगर बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती है।
- यौन सक्रियता- डॉक्टर बताते हैं कि यौन संबंधों के दौरान भी बैक्टीरिया मूत्रनली में प्रवेश कर सकते हैं। इसी कारण कुछ महिलाओं में संबंध बनाने के बाद UTI की संभावना बढ़ जाती है।
- पेशाब रोककर रखना- कई महिलाएं काम या यात्रा के दौरान लंबे समय तक पेशाब रोककर रखती हैं। यह आदत भी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकती है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है?
- यौन रूप से सक्रिय महिलाएं।
- गर्भवती महिलाएं।
- मेनोपॉज के बाद की महिलाएं।
- डायबिटीज के मरीज।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग।
- किडनी स्टोन वाले मरीज।
- लंबे समय तक कैथेटर इस्तेमाल करने वाले लोग।

Recurrent UTI क्या होता है?
यदि किसी व्यक्ति को एक साल में दो या उससे अधिक बार UTI होता है तो इसे Recurrent UTI माना जाता है।
इस स्थिति में डॉक्टर आमतौर पर संक्रमण के मूल कारण की जांच करते हैं। कई बार बैक्टीरिया पूरी तरह समाप्त नहीं होते या किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या की वजह से संक्रमण बार-बार लौट आता है।
बचाव के आसान लेकिन असरदार उपाय
- दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- पेशाब को ज्यादा देर तक न रोकें।
- यौन संबंध के बाद पेशाब जरूर करें।
- सूती (Cotton) अंडरवियर का इस्तेमाल करें।
- बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से बचें।
- निजी अंगों की सफाई के लिए कठोर केमिकल उत्पादों का उपयोग न करें।
- संतुलित आहार और प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
- डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर नियंत्रित रखें।
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तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना
यदि UTI के साथ बुखार, पीठ दर्द, उल्टी या पेशाब में खून दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
इसके अलावा यदि संक्रमण बार-बार हो रहा है या दवा लेने के बावजूद लक्षण खत्म नहीं हो रहे हैं तो विस्तृत जांच कराना जरूरी हो जाता है।
छोटी समस्या समझने की भूल न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि UTI को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। शुरुआती स्तर पर इसका इलाज आसान होता है, लेकिन लापरवाही की स्थिति में संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है।
सही जीवनशैली, पर्याप्त पानी, समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह का पालन करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
महिलाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि बार-बार होने वाला UTI केवल साफ-सफाई की कमी का संकेत नहीं होता, बल्कि यह शरीर के भीतर चल रही किसी अन्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए बार-बार संक्रमण होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
