डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने कथित साइबर हमले को लेकर पीएमओ से हस्तक्षेप की मांग की

टेलीग्राम के जरिए कथित फ़िशिंग गिरोह पर कार्रवाई की मांग, प्रधानमंत्री कार्यालय से निष्पक्ष जांच का अनुरोध

नई दिल्ली: अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ (युवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपने साथ हुए कथित संगठित साइबर अपराध को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने एक विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपते हुए कहा कि टेलीग्राम के माध्यम से उन पर लक्षित फ़िशिंग हमला किया गया और मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध तथा व्यापक जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

डॉ. मल्लप्पा ने अपने प्रतिनिधित्व में बताया है कि इस संबंध में उन्होंने पहले ही नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, जिसे स्वीकृति संख्या 22904260036238 के तहत दर्ज कर साइबर पुलिस स्टेशन, नई दिल्ली जिला द्वारा स्वीकार किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि 11 अप्रैल 2026 को उन्हें टेलीग्राम पर “RAGINBHARGAVBHARGAV” नाम से एक संदिग्ध लिंक प्राप्त हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि वही लिंक एक ही समय पर उनकी पत्नी और उनके साले (ब्रदर-इन-लॉ) के मोबाइल फोन पर भी भेजा गया। डॉ. मल्लप्पा का कहना है कि यह घटना किसी सामान्य ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और लक्षित साइबर फ़िशिंग हमला प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य उनकी निजी जानकारी, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय जानकारी तक अवैध पहुंच बनाना था।

प्रतिनिधित्व में डॉ. मल्लप्पा ने आरोप लगाया है कि इस मामले में सुरेश BP नामक व्यक्ति की पहचान सामने आई है, जिसका पैन नंबर BNOPS1204A उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध से जुड़े दस्तावेज, टेलीग्राम चैट के स्क्रीनशॉट और फ़िशिंग लिंक सहित सभी डिजिटल साक्ष्य नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पहले ही अपलोड किए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए अपने पत्र में डॉ. मल्लप्पा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बढ़ रहे संगठित साइबर अपराध देश के नागरिकों की निजता, आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल व्यवस्था पर विश्वास के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे मामलों में विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है कि मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष, समयबद्ध और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता और अन्य लागू कानूनों के तहत दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार के फ़िशिंग हमलों को रोकने के लिए साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने, जन-जागरूकता बढ़ाने तथा जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करने की भी मांग की गई है।

डॉ. मल्लप्पा ने कहा कि उन्हें भारत सरकार की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर पूर्ण विश्वास है तथा उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस मामले में आवश्यक हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करेगा।

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