हैंडबुक के जरिए बैंक, कर्जदार, एमएसएमई और वित्तीय पेशेवर ईसीएल व्यवस्था तथा बैंक ऋण पुनर्गठन से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे
नई दिल्ली: भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएमएआई) ने मंगलवार को अपेक्षित ऋण हानि और बैंक ऋण पुनर्गठन को लेकर दो नई हैंडबुक पेश कीं। संस्थान के अनुसार, इनका उद्देश्य बैंकों, कर्जदारों, एमएसएमई और वित्तीय पेशेवरों को आरबीआई की आगामी ईसीएल व्यवस्था को समझने और उसके लिए तैयारी करने में सहायता देना है। नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी।
इस मौके पर आईसीएमएआई के अध्यक्ष सीएमए चित्तरंजन चट्टोपाध्याय, उपाध्यक्ष सीएमए मनोज कुमार आनंद, एनआईपीएससीओएम के निदेशक सीएमए पुनीत जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा बोर्ड के अध्यक्ष सीएमए हर्षद देशपांडे ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़े। बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. रामजस यादव और दोनों हैंडबुक के लेखक डॉ. पी. शिव राम प्रसाद भी मौजूद रहे।
‘ईसीएल फ्रेमवर्क: ए प्रैक्टिकल हैंडबुक फॉर इंडियन बैंक्स’ में ऋण हानि के पूर्वानुमान और जोखिम मूल्यांकन की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई है। इसमें तीनों ऋण स्टेज, पीडी, एलजीडी, ईएडी, आर्थिक परिस्थितियों, डेटा और मॉडल से लेकर तकनीक, लेखांकन, ऑडिट व रिपोर्टिंग तक के विषय शामिल हैं।
वहीं, ऋण पुनर्गठन वाली हैंडबुक में वित्तीय संकट से प्रभावित कंपनियों और कारोबारों के लिए व्यावहारिक जानकारी दी गई है। इसमें शुरुआती चेतावनी संकेत, पुनर्गठन प्रस्ताव, नियामकीय नियम, कारोबार का आकलन, टीईवी अध्ययन, वित्तीय अनुमान, लागत विश्लेषण और जरूरी दस्तावेजों पर मार्गदर्शन दिया गया है।
ईसीएल को लेकर बैंकों से तैयारी की अपील
आईसीएमएआई अध्यक्ष सीएमए चित्तरंजन चट्टोपाध्याय ने कहा कि ईसीएल व्यवस्था लागू होने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में ऋण जोखिम के आकलन का तरीका अधिक व्यवस्थित होगा। उन्होंने बैंकों और अन्य हितधारकों से नई व्यवस्था को लेकर आवश्यक तैयारी पहले से करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि आईसीएमएआई ईसीएल के व्यावहारिक पहलुओं पर पेशेवरों की समझ विकसित करने और संभावित ऋण हानि के बेहतर आकलन में सहयोग देना चाहता है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि ईसीएल बैंकों को संभावित नुकसान की पहचान पहले करने में मदद करेगा। कर्जदारों को भी पुनर्गठन और अन्य उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी देना जरूरी है।

कारोबारों के लिए पुनर्गठन की जानकारी
डॉ. पी. शिव राम प्रसाद ने कहा कि ऋण पुनर्गठन वाली हैंडबुक बैंकिंग क्षेत्र में उनके अनुभव के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य वित्तीय दबाव में चल रहे एसएमई, एमएसएमई और अन्य कारोबारों को बैंक ऋण पुनर्गठन की प्रक्रिया समझाना है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 और भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण कई कारोबारों को वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे कारोबारों के लिए समय पर ऋण पुनर्गठन उन्हें एनपीए की स्थिति से बचाते हुए कारोबार जारी रखने का अवसर दे सकता है।
आईसीएमएआई ने दोहराया कि हैंडबुक मौजूदा बैंकिंग प्रक्रियाओं का विकल्प नहीं है। यह कर्जदारों को वित्तीय संकट के दौरान उपलब्ध विकल्पों की समझ देने वाला मार्गदर्शक है।
सीएमए की भूमिका सिर्फ लेखांकन तक सीमित नहीं
आईसीएमएआई उपाध्यक्ष सीएमए मनोज कुमार आनंद ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में सीएमए की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। बैंकों द्वारा लागत और दक्षता पर बढ़ते फोकस के बीच सीएमए लागत नियंत्रण, ऋण विश्लेषण और जोखिम प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने बजट, प्रदर्शन समीक्षा और कारोबारी निर्णयों में भी सीएमए पेशेवरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। संस्थान ने लागत एवं खर्चों की बेहतर निगरानी के लिए बैंकों में मुख्य लागत अनुपालन अधिकारी जैसे पदों की संभावना तलाशने का सुझाव दिया।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार
एनआईपीएससीओएम निदेशक सीएमए पुनीत जैन ने बताया कि ईसीएल पर चार प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए आईसीएमएआई ऐसे कार्यक्रम जारी रखेगा।
संस्थान बैंकिंग के ऋण प्रबंधन, ट्रेजरी, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, समवर्ती ऑडिट और तीन प्रमुख जोखिमों—क्रेडिट, ऑपरेशनल और मार्केट रिस्क—से जुड़े प्रशिक्षण भी देता है। फिनटेक पर उन्नत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी पेश किया जा रहा है।
प्लेसमेंट में बढ़ी सीएमए की मांग
आईसीएमएआई के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए लगभग 1,000 नियुक्तियां हुईं। आईसीआईसीआई बैंक, कॉसमॉस बैंक, सारस्वत बैंक, करूर वैश्य बैंक, पीएफसी, आईआरईडीए, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचएसबीसी और सीएसबी बैंक समेत कई संस्थानों ने भर्ती की।
आईसीआईसीआई बैंक ने 250 से अधिक और कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक ने 80 से अधिक सीएमए नियुक्त किए। अधिकतम पैकेज 36 लाख रुपये सालाना और औसत सीटीसी 12-14 लाख रुपये रहा।
आईसीएमएआई ने कहा कि ये नियुक्तियां बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सीएमए की बढ़ती मांग का प्रमाण हैं। बेहतर ऋण आकलन, प्रभावी लागत नियंत्रण और समय पर ऋण पुनर्गठन से बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया जा सकता है।
