बंगाल के सोनारपुर आरोही दल ने पूर्वी लद्दाख में बिना शेरपा सहायता और पोर्टरों के चार चोटियों पर चढ़ाई की और तीन नए शिखरों पर प्रथम आरोहण किया
कोलकाता: दुर्गम पहाड़, जमा देने वाली ठंड और पानी की कमी जैसी चुनौतियों के बीच पश्चिम बंगाल के पर्वतारोहण क्लब सोनारपुर आरोही ने पूर्वी लद्दाख के चांग चेनमो क्षेत्र में चार चोटियों पर सफल चढ़ाई की। रुद्र प्रसाद हलदर के नेतृत्व और सत्यरूप सिद्धांत के उपनेतृत्व में टीम ने 6,536 मीटर ऊंचे चांग चेनमो कांगड़ी तक एक नए मार्ग से पहुंचने के साथ तीन अनारोही चोटियों पर पहली बार आरोहण किया।

इस अभियान की खासियत इसका आत्मनिर्भर तरीका रहा। पर्वतारोहियों ने ऊंचाई पर पहले से रस्सियां लगाने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं किया। सामान ढोने के लिए पोर्टरों और चढ़ाई में सहायता के लिए शेरपाओं की मदद भी नहीं ली गई। टीम ने पूरी चढ़ाई अल्पाइन शैली में की, जिसमें योजना, तकनीकी कौशल और पर्वतारोहियों की व्यक्तिगत क्षमता महत्वपूर्ण होती है।
25 अगस्त को शुरू हुए अभियान में चांग चेनमो कांगड़ी पर 11 सितंबर को नए मार्ग से चढ़ाई पूरी की गई। इसके बाद 9, 16 और 20 सितंबर को लगभग 6,400 मीटर, 6,420 मीटर और 6,274 मीटर ऊंची चोटियों पर प्रथम आरोहण दर्ज किया गया।
अभियान के दौरान एक अन्य चोटी पर चढ़ाई का प्रयास करते समय टीम को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ा। करीब 5,900 मीटर की ऊंचाई पर माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में आठ पर्वतारोही कई घंटों तक ग्लेशियर पर कठिन परिस्थितियों में रहे। हालात का आकलन करने के बाद दल ने आगे बढ़ने का प्रयास छोड़कर कैंप-1 लौटने का निर्णय लिया।

दल के मार्गदर्शक अनिंद्य मुखर्जी ने धैर्य, टीमवर्क और बदलती परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने को पर्वतारोहण का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, अभियान ने आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास के महत्व को फिर साबित किया।
इस अभियान में दो महिला पर्वतारोहियों समेत 14 सदस्य शामिल थे। सोनारपुर आरोही ने तीन नई चोटियों के नाम माउंट एडमंड हिलेरी, माउंट टेनजिंग नॉर्गे और नेताजी सुभाष पर्वत रखने का प्रस्ताव भी दिया है। इन प्रस्तावों को आधिकारिक मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
