ऑक्सफोर्डशायर के रॉयल एयरफोर्स बेस में ‘फिलिस्तीन एक्शन’ ग्रुप के कार्यकर्ताओं ने घुसकर वायेजर विमानों पर फेंका पेंट, इंजनों को गंभीर नुकसान; रक्षा मंत्रालय ने बताया “राष्ट्र की सुरक्षा पर हमला”
23 जून 2025,
ब्रिटेन में फिलिस्तीन के समर्थन में चल रहे आंदोलनों ने अब उग्र और खतरनाक रूप ले लिया है। शुक्रवार को ‘फिलिस्तीन एक्शन’ नामक एक्टिविस्ट ग्रुप के दो सदस्यों ने ऑक्सफोर्डशायर स्थित ब्रिज नॉर्टन रॉयल एयर फोर्स (RAF) बेस में जबरन घुसपैठ की और दो सैन्य वायेजर विमानों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया।
कार्यकर्ताओं ने विमानों पर लाल रंग का पेंट फेंका, जिससे उनके इंजन प्रभावित हुए। ग्रुप ने इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया और इस ‘सीधे कार्रवाई’ की जिम्मेदारी ली।
ब्रिटिश सेना पर गंभीर आरोप
फिलिस्तीन एक्शन ग्रुप का आरोप है कि ब्रिटेन की सरकार इजरायल को अब भी सैन्य सहयोग दे रही है, जबकि गाजा में संघर्ष लगातार जारी है। उन्होंने कहा, “ब्रिटेन के वायुसेना जासूसी अभियानों में अब भी सक्रिय हैं और अमेरिकी व इजरायली विमानों को ईंधन आपूर्ति कर रहे हैं।”
रक्षा मंत्रालय ने बताया ‘राष्ट्र विरोधी कृत्य’
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे देश की रक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर हमला बताया। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “हमारी सशस्त्र सेनाएं हर समय देश की सेवा में समर्पित रहती हैं। इस तरह के कृत्य उन सैनिकों के समर्पण और बलिदान का अपमान हैं। हम किसी भी सूरत में ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
मंत्रालय के अनुसार, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शनकारी एयरबेस में कैसे दाखिल हुए और उनका मुख्य उद्देश्य क्या था।
लगातार हो रहे सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले
फिलिस्तीन एक्शन ग्रुप बीते कई महीनों से इजरायल से जुड़े रक्षा कॉन्ट्रैक्टर्स और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। ग्रुप का दावा है कि यह कार्रवाई गाजा में जारी हिंसा के खिलाफ विरोध स्वरूप की जा रही है। इस बार उन्होंने न केवल रनवे पर पेंट फेंका बल्कि एयरबेस परिसर में फिलिस्तीन का झंडा भी लगाया।
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सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस घटना ने ब्रिटेन में सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। सरकार और रक्षा विभाग के लिए यह संकेत है कि प्रदर्शनकारियों की रणनीति अब सिर्फ सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे अब सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन आंदोलनों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। ऐसे में सरकार को न केवल सुरक्षा उपायों को मजबूत करना होगा, बल्कि इस तरह के उग्र विरोध को रोकने के लिए स्पष्ट नीति भी बनानी होगी।

