डॉ. केए पॉल ने इजरायल में नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत न मिलने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रंप से ईरान युद्ध खत्म करने की मांग भी दोहराई
वॉशिंगटन डीसी: ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के अध्यक्ष डॉ. केए पॉल ने इजरायल के चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर अपनी पुरानी मांग दोहराई है। उन्होंने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की अपील की और उनकी सरकार को क्षेत्रीय संघर्षों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
डॉ. पॉल ने साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान युद्ध खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दुनिया के नेताओं को युद्ध के बजाय शांति और बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इजरायल में कितनी सीटें मिलीं?
प्रेस रिलीज में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल की 120 सदस्यीय नेसेट में नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को 27 सीटें मिलीं। वहीं, उनके पूरे राजनीतिक गठबंधन को कुल 53 सीटें हासिल हुईं।
इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गया। नई सरकार के गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है।
ईरान युद्ध पर ट्रंप को फिर दी सलाह
डॉ. पॉल ने अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 23 सितंबर को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ग्लोबल पीस समिट में उन्होंने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि ईरान युद्ध जारी रहने पर रिपब्लिकन पार्टी को चुनावी नुकसान हो सकता है।
उनके मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद उनकी यह भविष्यवाणी सही साबित हुई है। उन्होंने ट्रंप से युद्ध खत्म करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
माइक जॉनसन के राजनीतिक भविष्य पर चिंता
डॉ. पॉल ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने के बाद जॉनसन को स्पीकर का पद छोड़ना पड़ सकता है।
हालांकि, डॉ. पॉल ने जॉनसन को अपना करीबी मित्र बताया और उनके नेतृत्व की सराहना की।
शांति और कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील
डॉ. पॉल ने कहा कि युद्ध का असर केवल सीधे तौर पर शामिल देशों तक सीमित नहीं रहता। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी प्रभावित होती है।
उन्होंने ट्रंप, नेतन्याहू और अन्य वैश्विक नेताओं से संघर्ष समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। उनके अनुसार, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
