भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु रामालय की पहल, चिराग पासवान से प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

रामालय की सांस्कृतिक मुहिम पर चिराग पासवान से चर्चा

विकसित भारत 2047, युवा सहभागिता और भारत की सांस्कृतिक शक्ति पर हुई सार्थक चर्चा

नई दिल्ली: रामालय की सांस्कृतिक पहल को आगे बढ़ाते हुए उसके संस्थापक श्री प्रशांत कुमार ने माननीय चिराग पासवान जी से मुलाकात की। चर्चा का केंद्र युवा भारत, सांस्कृतिक जागरूकता और विकसित भारत 2047 में संस्कृति की भूमिका रहा। इस अवसर पर JPSR श्रीकृष्ण लीला कलेक्शन भी भेंट किया गया।

बैठक के दौरान इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि भारत की युवा पीढ़ी को आधुनिक विकास, तकनीकी प्रगति और वैश्विक अवसरों के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, मूल्यों, परंपराओं और सभ्यतागत विरासत से कैसे जोड़ा जाए।

श्री प्रशांत कुमार ने रामालय की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल एक ब्रांड या व्यावसायिक पहल नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य भारत की कला, संस्कृति, आध्यात्मिकता, इतिहास, ज्ञान, दर्शन और जीवन मूल्यों को आधुनिक एवं अनुभवात्मक स्वरूप में समाज तक पहुँचाना है।

उन्होंने कहा कि भारत आज आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है, परंतु किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत आत्मविश्वास में निहित होती है।

बैठक का प्रमुख आकर्षण JPSR श्रीकृष्ण लीला कलेक्शन रहा, जिसे आधुनिक पीढ़ी तक भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, संदेशों और लीलाओं को नेतृत्व, मित्रता, कर्तव्य, साहस, रणनीतिक सोच और करुणा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों के माध्यम से पहुँचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

रामालय का दीर्घकालिक लक्ष्य देशभर में एक ऐसा सांस्कृतिक अनुभव तंत्र विकसित करना है जो युवाओं, विद्यार्थियों, परिवारों, कलाकारों, कारीगरों, शोधकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ सके।

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