ईरान-इज़रायल टकराव: लंबा युद्ध इज़रायल की वायु रक्षा प्रणाली पर डालेगा भारी दबाव

ईरान-इज़रायल टकराव: लंबा युद्ध इज़रायल की वायु रक्षा प्रणाली पर डालेगा भारी दबाव

ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से इज़रायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली पर बढ़ा दबाव, विशेषज्ञ बोले – लम्बा युद्ध रिसोर्स खत्म कर सकता है

20 जून 2025, तेल अवीव/तेहरान

पश्चिम एशिया में इज़रायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। जहां इज़रायल की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली ने अब तक ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को सफलतापूर्वक रोका है, वहीं सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी चलती है, तो इज़रायल के डिफेंस सिस्टम की क्षमता और संसाधनों की बड़ी परीक्षा होगी।

इज़रायल की बहुस्तरीय लेकिन सीमित वायु रक्षा प्रणाली

अक्सर केवल ‘आयरन डोम’ के नाम से पहचानी जाने वाली इज़रायल की वायु रक्षा प्रणाली वास्तव में दुनिया की सबसे उन्नत और बहुस्तरीय प्रणालियों में से एक है, जिसमें विभिन्न स्तर के खतरों से निपटने की क्षमताएं शामिल हैं:

  • Iron Dome: कम दूरी के रॉकेट और तोप के गोले रोकने के लिए।
  • David’s Sling: मध्यम दूरी की मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के लिए।
  • Arrow-2 और Arrow-3: लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को वायुमंडल के बाहर ही नष्ट करने के लिए।

हालांकि यह प्रणाली अत्यंत प्रभावशाली है, लेकिन यह महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों पर निर्भर करती है। एक हमले को रोकने के लिए कई मिसाइलें दागी जाती हैं, जिससे संसाधन जल्दी खत्म होने का खतरा रहता है।

ईरान की रणनीति: बड़ी मात्रा में हमले से थकाना

ईरान ने ‘थकावट की लड़ाई’ (war of attrition) की रणनीति अपनाई है, जिसमें वह बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और लंबी दूरी के ड्रोन के साथ एक के बाद एक हमले कर रहा है। इन हथियारों से निपटना अलग-अलग प्रकार की चुनौतियां पैदा करता है:

  • बैलिस्टिक मिसाइलें तेज रफ्तार में सीधा मार्ग तय करती हैं, जिससे उन्हें रोकना बेहद कठिन होता है।
  • क्रूज मिसाइलें दिशा बदल सकती हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
  • ड्रोन लंबे समय तक हवा में रह सकते हैं और रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब तक अपने लगभग 3,000 मिसाइलों में से 1,000 से अधिक का उपयोग कर चुका है, लेकिन उसके पास अब भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वह लगातार नए मिसाइल बना रहा है।

इज़रायल के सामने बढ़ती चुनौतियां
  • इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी: हर हमले के लिए कई इंटरसेप्टर मिसाइलों की जरूरत होती है, जिससे स्टॉक तेजी से खत्म हो सकता है।
  • डिफेंस सिस्टम की थकावट: लगातार हो रहे हमले वायु रक्षा प्रणाली को थका सकते हैं, जिससे त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है।
  • स्वार्म रणनीति: ईरान की रणनीति है कि इतने अधिक मिसाइल और ड्रोन भेजे जाएं कि इज़रायल की रक्षा प्रणाली उन्हें रोकने में असमर्थ हो जाए।

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ईरान की वायु रक्षा: सीमित लेकिन मौजूद

हालांकि ईरान की वायु रक्षा इज़रायल जितनी उन्नत नहीं है, लेकिन उसके पास रूस निर्मित S-300 जैसे सिस्टम मौजूद हैं, जो इज़रायल के जवाबी हमलों को आंशिक रूप से रोक सकते हैं।

जैसे-जैसे हालात और गंभीर होते जा रहे हैं, सैन्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह लंबा युद्ध दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं को झकझोर सकता है और पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर खतरा बन सकता है। वैश्विक समुदाय इस संकट पर नजर बनाए हुए है और समय रहते कूटनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।

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