दिव्या मित्तल कौन हैं? 2013 बैच की पूर्व IAS अधिकारी ने 13 साल की सेवा के बाद राजनीति में आने का ऐलान किया है। जानिए उनकी पढ़ाई, IAS करियर, मिर्जापुर कनेक्शन और राजनीतिक योजना
नई दिल्ली: 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अब राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को IAS से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा 15 सितंबर से प्रभावी हुआ।
29 सितंबर को अपने वीडियो संदेश में उन्होंने साफ किया कि वह किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। इसके बजाय वह उत्तर प्रदेश में रहकर लोगों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने की दिशा में काम करना चाहती हैं।
कौन हैं दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल का जन्म 23 नवंबर 1983 को हुआ। उनका परिवार हरियाणा के रेवाड़ी से जुड़ा है और उनकी परवरिश दिल्ली में हुई। उन्होंने IIT दिल्ली से Engineering Physics में B.Tech किया और इसके बाद IIM Bangalore से MBA/PGDM की पढ़ाई पूरी की। बाद में उन्होंने MITx से Data, Economics and Development Policy में MicroMasters भी किया।
उनके करियर की शुरुआत सरकारी सेवा से नहीं हुई थी। MBA के बाद उन्होंने लंदन में वित्तीय क्षेत्र में काम किया और JP Morgan से जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर UPSC Civil Services Examination की तैयारी शुरू की।
UPSC से IAS तक पहुंचने की कहानी
दिव्या मित्तल ने पहले प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और IPS के लिए चयनित हुईं। इसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और All India Rank 68 हासिल की। इसके बाद उन्हें IAS के लिए चुना गया और उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर जॉइन किया।
उनका सफर केवल जिला प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने NITI Aayog में Assistant Secretary के तौर पर काम किया। इसके अलावा वह UP State Industrial Development Authority में Joint Managing Director और Bareilly Development Authority में Vice-Chairperson जैसे पदों पर भी रहीं।
किन जिलों की DM रहीं दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश में कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। वह संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रहीं। बाद में मई 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश के Revenue Department में Special Secretary की जिम्मेदारी मिली।
मिर्जापुर में उनका कार्यकाल सितंबर 2022 से सितंबर 2023 तक रहा। इसके बाद उन्होंने अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं और जुलाई 2024 से मई 2026 तक देवरिया की जिलाधिकारी रहीं।
मिर्जापुर के लहुरिया दह गांव से क्यों जुड़ा है उनका नाम?
दिव्या मित्तल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली घटनाओं में मिर्जापुर के पहाड़ी गांव लहुरिया दह में पेयजल पहुंचाने की पहल प्रमुख रही।
गांव में लंबे समय से लोग पानी की समस्या का सामना कर रहे थे और टैंकरों पर निर्भरता बनी हुई थी। उनके कार्यकाल में गांव तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की परियोजना आगे बढ़ी। इस पहल का जिक्र उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद लिखे संदेश में भी किया था।
29 सितंबर को राजनीति में आने की घोषणा करते हुए भी उन्होंने लहुरिया दह का उदाहरण दिया। उन्होंने एक महिला से हुई बातचीत को याद किया, जिसने गांव के स्कूल में पांचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई की व्यवस्था करने की जरूरत बताई थी। यह उदाहरण उनके राजनीतिक संदेश में जमीनी प्रशासन और लोगों की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को समझाने के लिए सामने आया।
13 साल बाद IAS से इस्तीफा क्यों दिया?
30 अगस्त 2026 को दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया के जरिए IAS से इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने अपनी 13 साल की सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बताया और आगे बढ़ने की बात कही।
इस्तीफे के समय उन्होंने व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का भी उल्लेख किया था। बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह फैसला अचानक या किसी एक घटना की वजह से नहीं लिया गया था।
15 सितंबर 2026 से उनका इस्तीफा प्रभावी हो गया और इसके साथ उनका IAS करियर औपचारिक रूप से समाप्त हुआ।
29 सितंबर को राजनीति में आने का ऐलान
इस्तीफा देने के करीब एक महीने बाद दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में आएंगी, लेकिन किसी मौजूदा राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं बनेंगी।
उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत के लिए चुना है। उनके अनुसार, राज्य उनके लिए केवल प्रशासनिक सेवा का कार्यक्षेत्र नहीं रहा, बल्कि लोगों के साथ उनके लंबे जुड़ाव का हिस्सा भी रहा है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह “यूपी में ही रहूंगी, डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी।” उन्होंने लोगों से सीधे जुड़ने और अपनी पहल से जुड़ने की अपील भी की।
किन मुद्दों पर बात कर रही हैं दिव्या मित्तल?
अपने राजनीतिक संदेश में दिव्या मित्तल ने उन मुद्दों का जिक्र किया, जिनका सामना उन्होंने प्रशासनिक सेवा के दौरान किया। इनमें शिक्षा, सड़क और पुल, सड़क सुरक्षा, जमीन से जुड़े विवाद और परीक्षा पेपर लीक जैसे विषय शामिल हैं।
उन्होंने ऐसे मामलों का उदाहरण दिया, जहां सरकारी मंजूरी या संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद काम जमीन पर पूरा नहीं हो पाया। उनका राजनीतिक संदेश इसी प्रशासनिक अनुभव से जुड़ा दिखाई देता है।
उन्होंने नागरिकों की सीधी भागीदारी पर भी जोर दिया है और लोगों से अपनी समस्याओं और सुझावों के साथ उनके प्रस्तावित मंच से जुड़ने को कहा है।
क्या दिव्या मित्तल 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगी?
फिलहाल दिव्या मित्तल ने किसी विधानसभा सीट की घोषणा नहीं की है। उन्होंने यह भी नहीं कहा है कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी विशेष सीट से चुनाव लड़ेंगी।
इस्तीफे के बाद कुछ रिपोर्टों में मिर्जापुर या देवरिया को उनकी संभावित राजनीतिक शुरुआत से जोड़ा गया था, लेकिन ये चर्चाएं थीं। 29 सितंबर की घोषणा में उन्होंने केवल उत्तर प्रदेश को अपने राजनीतिक सफर का शुरुआती राज्य बताया है। इसलिए उनकी सीट, संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आगे की राह क्या होगी?
दिव्या मित्तल के लिए IAS से राजनीति तक का बदलाव उनके करियर का एक नया चरण है। IIT दिल्ली और IIM Bangalore की पढ़ाई, लंदन में वित्तीय क्षेत्र का अनुभव और 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अब उन्होंने उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र राजनीतिक पहल की बात कही है।
फिलहाल उनकी घोषणा से तीन बातें स्पष्ट हैं—वह उत्तर प्रदेश में रहकर काम करना चाहती हैं, किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल होने की योजना नहीं बताई है और नागरिकों के साथ मिलकर अपना राजनीतिक मंच विकसित करना चाहती हैं। इस पहल का संगठनात्मक ढांचा, संभावित चुनावी भूमिका और आगे की राजनीतिक गतिविधियां अभी सामने आनी बाकी हैं।
