Kayu Rituals की प्रीति चौधरी ने बताया आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन को लेकर अपना नजरिया

ब्रांड ने नौ हर्बल तत्वों वाला Lung Ayu पेश किया। संस्थापक का कहना है कि आयुर्वेद को अधूरी जानकारी के बजाय गंभीरता और समझ के साथ अपनाना चाहिए

नई दिल्ली: आयुर्वेदिक वेलनेस ब्रांड Kayu Rituals की सीईओ और संस्थापक प्रीति चौधरी ने पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि आयुर्वेद की मूल समझ को कई बार अधूरी जानकारी और सतही तरीकों से पेश किया जाता है।

ब्रांड ने इसी सोच के तहत ‘Lung Ayu’ नाम का हर्बल फॉर्मूलेशन पेश किया है। कंपनी के मुताबिक, यह उत्पाद बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सांसों की सेहत से जुड़ी देखभाल को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

फॉर्मूलेशन में शामिल हैं नौ हर्बल तत्व

Kayu Rituals के अनुसार, Lung Ayu के प्रत्येक कैप्सूल में नौ तत्व शामिल हैं। इनमें वासा एक्सट्रैक्ट, आंवला एक्सट्रैक्ट, हल्दी, तुलसी, पुष्करमूल, यष्टिमधु, पाइन बार्क, पिप्पली एक्सट्रैक्ट और मुल्लेन एक्सट्रैक्ट शामिल हैं।

कंपनी का कहना है कि इनमें से कुछ जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों में लंबे समय से होता रहा है।

अध्ययन और सही चयन पर ब्रांड का जोर

प्रीति चौधरी ने कहा कि आयुर्वेद एक विस्तृत और व्यवस्थित परंपरा है। इसमें हर तत्व को सोच-समझकर शामिल किया जाता है। उन्होंने बताया कि Kayu Rituals के वेलनेस उत्पादों को तैयार करने में अध्ययन, अनुभव और फॉर्मूलेशन को बेहतर बनाने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाता है।

उनके अनुसार, ब्रांड का मकसद पारंपरिक जड़ी-बूटियों को केवल कुछ समय के लिए लोकप्रिय होने वाला ट्रेंड बनाना नहीं है। वह उन्हें रोजमर्रा की देखभाल से जोड़ना चाहता है।

आधुनिक शहरी जीवन और आयुर्वेद का मेल

शहरों में रहने वाले लोगों को रोजाना प्रदूषित हवा के संपर्क में आने का खतरा रहता है। ऑफिस जाने, बाहर समय बिताने और खुले में व्यायाम करने के दौरान वायु प्रदूषण चिंता का विषय बन सकता है।

Kayu Rituals का Lung Ayu इसी संदर्भ में पेश किया गया है। कंपनी इसे पारंपरिक हर्बल तत्वों और आधुनिक जीवनशैली के बीच एक कड़ी के रूप में देखती है।

हालांकि, ब्रांड के दावों और उत्पाद की प्रभावशीलता को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी हर्बल फॉर्मूलेशन को डॉक्टर की सलाह या प्रदूषण से बचाव के प्रमाणित उपायों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

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