सुप्रीम कोर्ट के स्टेम सेल थेरेपी फैसले पर माता-पिता की मौखिक सुनवाई की मांग

सुप्रीम कोर्ट के स्टेम सेल थेरेपी फैसले पर माता-पिता की मौखिक सुनवाई की मांग

ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के परिवारों ने 82 शोध पत्र और क्लिनिकल रिकॉर्ड पेश करने की बात कही

नई दिल्ली: ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के माता-पिता ने स्टेम सेल थेरेपी पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के संबंध में मौखिक सुनवाई की मांग की है।

पैरेंट्स फोरम फॉर स्टेम सेल्स इन ऑटिज्म एंड सेरेब्रल पाल्सी ने कहा कि अदालत को पहले से उपचार ले रहे बच्चों की स्थिति और परिवारों द्वारा जमा किए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर विचार करना चाहिए।

फोरम ने शनिवार को आंध्र भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। संगठन के अनुसार, वह करीब 5,000 परिवारों का प्रतिनिधित्व करता है।

फोरम ने कहा- हमें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला

फोरम के अनुसार, वह यश चैरिटेबल ट्रस्ट एंड अन्य बनाम भारत संघ एंड अन्य मामले में प्रतिवादी है।

संगठन ने बताया कि जनवरी 2025 में पहली सुनवाई के दौरान उसके वकील ने मौखिक दलील रखने की अनुमति मांगी थी। फोरम के अनुसार, अदालत ने उसे लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।

संगठन अब मौखिक सुनवाई की मांग कर रहा है।

क्लिनिकल ट्रायल को लेकर परिवारों की चिंता

फोरम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल थेरेपी को नियमित उपचार के रूप में जारी न रखने की बात कही गई है।

फोरम के अनुसार, पहले से उपचार ले रहे बच्चों को क्लिनिकल ट्रायल करने वाले संस्थानों की ओर भेजने की बात भी फैसले में कही गई है।

संगठन ने दावा किया कि फिलहाल इन बच्चों के लिए उपयुक्त क्लिनिकल ट्रायल उपलब्ध नहीं है। परिवारों ने उपचार रोकने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था और ट्रायल की पात्रता स्पष्ट करने की मांग की है।

अलग-अलग राज्यों से आए माता-पिता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों से आए माता-पिता और परिवार के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए।

डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने अपने बच्चे में स्टेम सेल थेरेपी के बाद देखे गए बदलावों के बारे में बताया। उन्होंने गतिशीलता, संवाद, समझ और दैनिक गतिविधियों में बदलाव का जिक्र किया।

डॉ. संध्या गोकोवरापु ने पहले से चल रहे उपचार की निरंतरता पर जोर दिया।

पुणे की 73 वर्षीय दीपाजी ने भी अपने पोते के उपचार से जुड़ी चिंताओं को साझा किया।

82 पीयर-रिव्यू शोध पत्र पेश करने का दावा

फोरम ने कहा कि उसने 82 पीयर-रिव्यू शोध पत्र, क्लिनिकल रिकॉर्ड और परिवारों से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने रखे हैं।

संगठन ने कहा कि वह चाहता है कि अदालत इन सभी सामग्रियों की स्वतंत्र समीक्षा करे।

कानून और नियमन पर भी उठाए सवाल

फोरम ने ऑटोलोगस स्टेम सेल उपचार के नियमन पर सवाल उठाए। इस प्रक्रिया में मरीज की अपनी कोशिकाओं को लेकर उन्हें उसी मरीज में वापस पहुंचाया जाता है।

संगठन ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल्स रूल्स, 2019 और सीडीएससीओ के नियामकीय ढांचे के संदर्भ में मामले पर विचार करने की मांग की।

फोरम के उपाध्यक्ष अरुण कुमार तिवारी ने कहा कि परिवार चाहते हैं कि अदालत उनके साक्ष्यों को देखे और फैसले का पहले से उपचार ले रहे बच्चों पर प्रभाव समझे।

फोरम ने मौखिक सुनवाई और बच्चों के स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर विचार करने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *