2800 करोड़ की ‘बाइक बोट’ ठगी का पर्दाफाश: निवेश के नाम पर देशभर में बिछाया गया था धोखाधड़ी का जाल

2800 करोड़ की 'बाइक बोट' ठगी का पर्दाफाश: निवेश के नाम पर देशभर में बिछाया गया था धोखाधड़ी का जाल

राजस्थान जेल से रायपुर लाए गए तीन आरोपी, 1 लाख रुपये मासिक कमीशन का लालच देकर हजारों लोगों से ऐंठे करोड़ों; ED ने की करोड़ों की संपत्ति ज़ब्त

29 जून 2025, नई दिल्ली

देशभर में सुर्खियों में रहे बहुचर्चित ‘बाइक बोट स्कीम’ घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान की जेल में बंद तीन आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट के ज़रिए रायपुर लाकर पूछताछ शुरू कर दी है। इस घोटाले में अब तक लगभग 2800 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का खुलासा हो चुका है।

यह मामला वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में सामने आया था। बिरगांव निवासी पीड़ित अखिल कुमार बिसोई (36) की शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसमें यूपी स्थित गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के डायरेक्टर्स संजय भाटी, सचिन भाटी और अन्य पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

आरोपियों ने ‘बाइक बोट’ नाम की एक स्कीम चलाई थी, जिसमें लोगों को झांसा दिया गया कि वे एक बाइक में निवेश करें और उसके बदले हर महीने 1 लाख रुपये तक का कमीशन कमाएं। इस सुनियोजित योजना के माध्यम से देशभर में हज़ारों लोगों से अरबों रुपये का निवेश कराया गया।

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जांच एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घोटाले से जुड़े आरोपियों की कई करोड़ की संपत्तियों को अटैच भी कर लिया है। इस पूरे मामले में आर्थिक अपराध शाखा, स्थानीय पुलिस और ईडी संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं।

अब तीन प्रमुख आरोपियों को रायपुर लाकर पूछताछ की जा रही है ताकि छत्तीसगढ़ में हुई ठगी की कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस को शक है कि रायपुर और आसपास के जिलों में भी कई लोगों से इस घोटाले के तहत पैसे वसूले गए हैं।

यह मामला एक बार फिर देश में चल रही चिटफंड और इन्वेस्टमेंट स्कीमों की वास्तविकता को उजागर करता है, जहां लालच का जाल बिछाकर भोले-भाले लोगों की मेहनत की कमाई को ठग लिया जाता है। पुलिस अब आगे और निवेशकों के बयान दर्ज करने की तैयारी में है।

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