पहल्गाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाक तनाव चरम पर, अमेरिका ने भारत के आत्मरक्षा अधिकार का समर्थन किया
2 मई 2025, नई दिल्ली
पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा (LoC) पर संघर्षविराम का उल्लंघन जारी है। 1-2 मई की रात, पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा, बारामूला, पुंछ, नौशेरा और अखनूर सेक्टरों में बिना किसी उकसावे के छोटे हथियारों से गोलीबारी की। भारतीय सेना ने संयमित लेकिन सटीक जवाबी कार्रवाई की। यह लगातार आठवां दिन है जब नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी हुई है।
यह घटनाक्रम 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद सामने आया है, जिसमें 28 पर्यटकों की जान गई थी। हमले की जिम्मेदारी पहले ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली थी, जो पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन है, हालांकि बाद में उन्होंने अपना दावा वापस ले लिया। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवादियों को समर्थन देने का आरोप लगाया है, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से फोन पर बातचीत की, जिसमें अमेरिका ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। सिंह ने पाकिस्तान पर आतंकवादियों को समर्थन, प्रशिक्षण और फंडिंग देने का आरोप लगाया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत और पाकिस्तान के नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर तनाव कम करने और सहयोग की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमले की निंदा की और नागरिकों पर हमलों को किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य बताया। रूस, सऊदी अरब, कतर, दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना और अन्य देशों ने भी हमले की निंदा की और भारत के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
भारत की आंतरिक सुरक्षा और जवाबी कदम
पाहलगाम हमले के बाद, जम्मू-कश्मीर सरकार ने 48 पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया है, क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने और हमलों की चेतावनी दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI गैर-स्थानीय लोगों, कश्मीरी पंडितों और CID कर्मियों को निशाना बनाने की योजना बना रही है। रेलवे सुरक्षा को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
भारत ने पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंधों को घटाया है, जिसमें पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा निलंबित करना, अटारी सीमा चौकी को बंद करना और सिंधु जल संधि से हटने की घोषणा शामिल है।
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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मध्यस्थता और दोनों देशों की संयमित प्रतिक्रिया ही इस संकट का समाधान हो सकती है।
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