प्रिंट से डिजिटल तक बदलते रुझानों पर केंद्रित इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट का तीसरा संस्करण एफआईपी–नील्सनआईक्यू बुकडेटा द्वारा जारी किया जाएगा

प्रिंट से डिजिटल तक बदलते रुझानों पर केंद्रित इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट का तीसरा संस्करण एफआईपी–नील्सनआईक्यू बुकडेटा द्वारा जारी किया जाएगा

पहली बार डिजिटल पब्लिशिंग के आर्थिक प्रभाव पर विशेष फोकस, अगस्त–सितंबर 2026 तक रिपोर्ट जारी होने की संभावना

नई दिल्ली: फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (एफआईपी) ने नील्सनआईक्यू बुकडेटा के साथ मिलकर इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट – एडिशन 3 के लॉन्च की घोषणा की है, जो भारतीय प्रकाशन उद्योग में प्रिंट, डिजिटल और ऑडियोबुक पब्लिशिंग के बदलते रुझानों और उनके आर्थिक योगदान का डेटा-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करेगी।

इसकी घोषणा नई दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2026 के दौरान आयोजित एक मीडिया बातचीत में की गई। रिपोर्ट के अगस्त–सितंबर 2026 तक जारी होने की उम्मीद है।

इस दौरान एफआईपी के उपाध्यक्ष प्रणव गुप्ता ने कहा कि रिपोर्ट का तीसरा संस्करण पहले के अध्ययनों से अलग है, जिनका मुख्य फोकस प्रिंट पब्लिशिंग पर रहा था।

उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट भारतीय प्रिंट बुक मार्केट के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग के सभी स्वरूपों, जिनमें ऑडियोबुक भी शामिल हैं, को कवर करेगी और भारतीय अर्थव्यवस्था में उनके आर्थिक योगदान का भी आकलन करेगी।”

प्रणव गुप्ता ने इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2022 का उल्लेख करते हुए बताया कि उस अध्ययन के अनुसार भारत में 24,000 से अधिक प्रकाशक हैं और हर वर्ष 2.5 लाख से ज्यादा आईएसबीएन प्रकाशित होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंट बुक मार्केट में स्कूल शिक्षा की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत, उच्च शिक्षा की 25 प्रतिशत और ट्रेड पब्लिशिंग की 4 प्रतिशत रही थी।

उन्होंने कहा कि नया संस्करण प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों का एक साथ विश्लेषण करेगा, ताकि यह स्पष्ट रूप से दिखाया जा सके कि प्रकाशन उद्योग किस दिशा में विकसित हो रहा है। पहली बार इस रिपोर्ट में डिजिटल पब्लिशिंग के आर्थिक प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा।

नील्सनआईक्यू बुकडेटा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विक्रांत माथुर ने कहा कि रिपोर्ट के पहले संस्करणों में कोविड-19 का प्रकाशन उद्योग पर प्रभाव, शिक्षा अवसंरचना का विस्तार, विभिन्न स्कूल बोर्डों में नामांकन रुझान, आयात-निर्यात, कॉपीराइट नीतियां और पाइरेसी से जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन किया गया था।

उन्होंने कहा, “अब उद्देश्य यह है कि पांच साल बाद बाजार को दोबारा देखा जाए और यह समझा जाए कि डिजिटल पब्लिशिंग किस तरह बढ़ रही है—उसका आकार क्या है, दिशा क्या है और स्कूल, उच्च शिक्षा तथा जनरल ट्रेड जैसे अलग-अलग सेगमेंट में उसका प्रभाव कैसा है।”

माथुर ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में पब्लिशिंग इंडस्ट्री की तुलना संगीत और फिल्म जैसे अन्य एंटरटेनमेंट सेक्टर से की जाएगी, ताकि उसके सापेक्ष विकास और आर्थिक योगदान का आकलन किया जा सके। रिपोर्ट के निष्कर्षों से उद्योग से जुड़े हितधारकों को व्यावहारिक इनपुट मिलने के साथ-साथ नीति-निर्माण से जुड़ी चर्चाओं को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

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