27 साल के NASA करियर, तीन अंतरिक्ष मिशन और 608 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद सुनीता विलियम्स की जिंदगी में शुरू हुआ नया अध्याय
नई दिल्ली: भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 19 सितंबर 2026 को अपना 61वां जन्मदिन मना रही हैं। यह जन्मदिन उनके लिए खास है, क्योंकि NASA से रिटायरमेंट के बाद यह उनका पहला जन्मदिन है।
सुनीता विलियम्स ने NASA के साथ करीब 27 साल का लंबा करियर पूरा किया। इस दौरान उन्होंने तीन अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया और कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। उन्होंने 27 दिसंबर 2025 को NASA से रिटायरमेंट लिया।
कई वर्षों तक उनका नाम स्पेस मिशन, स्पेसवॉक और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़ा रहा। लेकिन इस बार उनके जन्मदिन के साथ कोई नया मिशन नहीं है। यह उनके अंतरिक्ष करियर के बाद शुरू हुए एक नए और अपेक्षाकृत शांत अध्याय की शुरुआत है।
61 साल की हुईं सुनीता विलियम्स
सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड में हुआ था। उनका पालन-पोषण मैसाचुसेट्स के नीडहम में हुआ।
NASA में शामिल होने से पहले उन्होंने अमेरिकी नौसेना में पायलट और टेस्ट पायलट के रूप में काम किया। 1998 में उन्हें NASA के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम के लिए चुना गया।
इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़े तीन मिशनों में हिस्सा लिया।
उनका आखिरी अंतरिक्ष मिशन जून 2024 में शुरू हुआ था और मार्च 2025 में धरती पर वापसी के साथ समाप्त हुआ। इस मिशन के दौरान वह 286 दिन अंतरिक्ष में रहीं।
27 साल का NASA करियर हुआ पूरा
सुनीता विलियम्स 1998 में NASA के Astronaut Group 17 का हिस्सा बनी थीं।
NASA में चयन से पहले वह अमेरिकी नौसेना में काम कर चुकी थीं। उन्होंने अलग-अलग विमानों को उड़ाया और टेस्ट पायलट के तौर पर भी अनुभव हासिल किया।
NASA में उनका काम सिर्फ अंतरिक्ष में जाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, ऑपरेशंस और भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े कई कार्यों में भी योगदान दिया।
NASA की जनवरी 2026 की जानकारी के अनुसार, वह अमेरिकी नौसेना की रिटायर्ड कैप्टन और तीन अंतरिक्ष मिशनों की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं।
आखिरी मिशन ने कैसे बदली पूरी कहानी?
सुनीता विलियम्स का आखिरी मिशन 5 जून 2024 को शुरू हुआ था। वह NASA के अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ Boeing Starliner की पहली क्रूड फ्लाइट पर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुई थीं।
इस टेस्ट मिशन को शुरुआत में करीब 8 से 14 दिनों का रखा गया था। लेकिन स्पेसक्राफ्ट के प्रोपल्शन सिस्टम से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण मिशन की अवधि बढ़ गई।
NASA ने अंततः Starliner को बिना क्रू के धरती पर वापस लाने का फैसला किया। वहीं सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ही रहे और Expeditions 71 और 72 का हिस्सा बने।
दोनों 18 मार्च 2025 को SpaceX के Crew-9 Dragon के जरिए धरती पर लौटे।
उनका मिशन कुल 286 दिनों तक चला। NASA के अनुसार, इस दौरान सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने धरती के 4,576 चक्कर लगाए और 12.1 करोड़ मील से ज्यादा की दूरी तय की।
सुनीता विलियम्स के नाम कई बड़े रिकॉर्ड
सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष करियर कई उपलब्धियों से भरा रहा है।
NASA के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने तीन मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। रिटायरमेंट के समय वह NASA के अंतरिक्ष यात्रियों में कुल अंतरिक्ष समय के मामले में दूसरे स्थान पर थीं।
उन्होंने कुल 9 स्पेसवॉक किए और अंतरिक्ष में 62 घंटे 6 मिनट बिताए। यह किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा अंतरिक्ष में बिताया गया सबसे अधिक cumulative spacewalking time है।
2007 में उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ट्रेडमिल के जरिए Boston Marathon भी पूरा किया। वह अंतरिक्ष में मैराथन पूरी करने वाली पहली व्यक्ति बनी थीं।
उन्होंने 2012 में Expedition 33 के दौरान और 2025 में Expedition 72 के दौरान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की कमान भी संभाली।
Starliner मिशन के दौरान वह नए ऑर्बिटल स्पेसक्राफ्ट की क्रूड टेस्ट फ्लाइट पर जाने वाली पहली महिला भी बनीं।
भारतीय और स्लोवेनियाई विरासत से जुड़ी हैं सुनीता
सुनीता विलियम्स की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी उन्हें खास बनाती है।
उनका जन्म Sunita Lyn Pandya के रूप में हुआ था। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के थे, जबकि उनकी मां बोनी पांड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं।
सुनीता का पालन-पोषण अमेरिका में हुआ और उन्होंने अपने करियर की पूरी यात्रा अमेरिकी नौसेना और NASA के साथ तय की।
भारत में भी उनकी कहानी को खास रुचि के साथ देखा गया है। हालांकि, उन्हें सही रूप से भारतीय और स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री के रूप में वर्णित किया जाता है। वह अमेरिकी नागरिक हैं।
नेवल एकेडमी से अंतरिक्ष स्टेशन तक का सफर
सुनीता विलियम्स ने शुरुआत से अंतरिक्ष यात्री बनने का फैसला नहीं किया था। युवावस्था में वह कथित तौर पर पशु चिकित्सक बनने के बारे में सोचती थीं।
बाद में उन्होंने U.S. Naval Academy में दाखिला लिया और 1987 में फिजिकल साइंस की डिग्री हासिल की।
इसके बाद वह नौसेना की पायलट बनीं और टेस्ट पायलट के रूप में भी काम किया। उनके विमान उड़ाने के अनुभव और सैन्य प्रशिक्षण ने आगे चलकर अंतरिक्ष यात्री के रूप में उनके करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1998 में NASA के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम में चयन के बाद उनका करियर एक नए दौर में पहुंचा।
NASA से रिटायरमेंट के बाद कैसी होगी नई जिंदगी?
किसी अंतरिक्ष यात्री के लिए रिटायरमेंट आम नौकरी से अलग हो सकता है। दशकों तक मिशन प्लान, ट्रेनिंग, लॉन्च डेट और स्पेसफ्लाइट की तैयारी का हिस्सा रहने के बाद अब सुनीता विलियम्स के जीवन में एक अलग चरण शुरू हुआ है।
NASA के अनुसार, काम के अलावा उनकी रुचियों में एक्सरसाइज, हाइकिंग, कैंपिंग और अपने पति व पालतू कुत्तों के साथ समय बिताना शामिल रहा है।
हालांकि, NASA से रिटायरमेंट के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनके भविष्य के बारे में अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
नई पीढ़ी के लिए क्यों खास है सुनीता विलियम्स की कहानी?
सुनीता विलियम्स की यात्रा यह दिखाती है कि अंतरिक्ष यात्री बनने का रास्ता हमेशा बचपन से तय नहीं होता।
उन्होंने पहले पशु चिकित्सा के बारे में सोचा, फिर अमेरिकी नौसेना में गईं, पायलट और टेस्ट पायलट बनीं और इसके बाद NASA के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम में शामिल हुईं।
उनकी कहानी उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अंतरिक्ष विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान में अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधित्व को देखते हैं।
उनका नाम अक्सर भारतीय मूल की प्रमुख अंतरिक्ष यात्रियों की चर्चा में आता है। इस संदर्भ में कल्पना चावला का भी उल्लेख किया जाता है। दोनों की यात्राएं और करियर अलग रहे, लेकिन दोनों ने अंतरिक्ष अन्वेषण में दक्षिण एशियाई विरासत वाले लोगों की मौजूदगी को व्यापक पहचान दिलाई।
अब शुरू हुआ सुनीता विलियम्स के जीवन का नया अध्याय
सुनीता विलियम्स का 61वां जन्मदिन सिर्फ एक और साल पूरा होने का अवसर नहीं है। यह उनके 27 साल लंबे NASA करियर के बाद शुरू हुए नए अध्याय का भी प्रतीक है।
उन्होंने अपने करियर में 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, नौ स्पेसवॉक किए, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की कमान संभाली और अंतरिक्ष में मैराथन तक पूरी की।
अब उनका जन्मदिन किसी नए लॉन्च या मिशन की तारीख से नहीं जुड़ा है। इसके बजाय यह उस जीवन का हिस्सा है, जो दशकों तक अंतरिक्ष मिशनों की समय-सारिणी से बंधा रहा।
अंतरिक्ष से धरती को देखने वाली सुनीता विलियम्स अब अपना 61वां जन्मदिन उसी धरती पर मना रही हैं, जिसने उनके पूरे अंतरिक्ष सफर को संभव बनाया।
