सुनील गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी को दो चरणों में कराने के BCCI के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने IPL नीलामी के कारण घरेलू क्रिकेट के कार्यक्रम में असंतुलन की बात कही
नई दिल्ली:पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी को दो चरणों में कराने के भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के फैसले पर सवाल उठाए हैं। यह लगातार तीसरा सीजन है, जब रणजी ट्रॉफी दो अलग-अलग चरणों में खेली जाएगी।
गावस्कर का मानना है कि इस तरह का लंबा अंतराल प्रथम श्रेणी क्रिकेट की लय को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू क्रिकेट के कार्यक्रम में IPL नीलामी को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।
गावस्कर ने अपने हालिया Sportstar कॉलम में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय घरेलू क्रिकेट का ढांचा केवल IPL से जुड़ी व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार नहीं बदलना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब BCCI एक और व्यस्त घरेलू क्रिकेट सीजन की तैयारी कर रहा है। इसमें लाल गेंद और सफेद गेंद, दोनों प्रारूपों की कई प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
रणजी ट्रॉफी में आएगा लंबा अंतराल
BCCI के 2026-27 घरेलू कार्यक्रम में रणजी ट्रॉफी को दो चरणों में रखा गया है।
एलीट वर्ग का पहला चरण 11 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलेगा। इसके बाद खिलाड़ी सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी में हिस्सा लेंगे।
रणजी ट्रॉफी का दूसरा चरण 17 जनवरी 2027 से शुरू होगा। एलीट वर्ग का नॉकआउट चरण 9 फरवरी से शुरू होगा। टूर्नामेंट का फाइनल 3 मार्च 2027 को निर्धारित है।
BCCI ने घरेलू कार्यक्रम को व्यवस्थित करने और खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम देने के लिए दो चरणों का प्रारूप बरकरार रखा है। बोर्ड ने मौसम और कार्यक्रम से जुड़ी चुनौतियों को भी इसका कारण बताया है।
हालांकि, गावस्कर के अनुसार, रणजी ट्रॉफी में इतना लंबा अंतराल प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए नई समस्या पैदा कर सकता है।
गावस्कर बोले- ब्रेक से प्रभावित हो सकती है रेड-बॉल क्रिकेट की लय
गावस्कर का कहना है कि लंबे प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों को निरंतरता की जरूरत होती है।
रणजी ट्रॉफी के दोनों चरणों के बीच लंबा ब्रेक खिलाड़ियों की लय और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। बल्लेबाज और गेंदबाज कई सप्ताह तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट से दूर रहेंगे और फिर दोबारा उसी प्रारूप में लौटेंगे।
पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी सवाल उठाया कि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को इसी तरह दो चरणों में क्यों नहीं कराया जाता।
इसके पीछे IPL नीलामी का समय एक अहम मुद्दा है। T20 प्रतियोगिता उन खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच है, जो IPL फ्रेंचाइजी का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसलिए नीलामी से पहले इस टूर्नामेंट पर खास नजर रहती है।
गावस्कर को लगता है कि इससे घरेलू क्रिकेट के कार्यक्रम में संतुलन बिगड़ रहा है।
IPL नीलामी के समय पर उठे सवाल
2026-27 के घरेलू कार्यक्रम में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 14 नवंबर से 6 दिसंबर तक होगी। इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी 14 दिसंबर से 8 जनवरी तक खेली जाएगी।
इस कार्यक्रम के कारण IPL फ्रेंचाइजी द्वारा घरेलू खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर रखने वाले समय में सफेद गेंद वाले क्रिकेट को प्रमुख स्थान मिलता है।
गावस्कर ने सवाल किया कि क्या केवल IPL नीलामी के कारण रणजी ट्रॉफी को सीमित ओवरों की प्रतियोगिताओं के लिए पीछे करना सही है।
उन्होंने सुझाव दिया कि BCCI सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को सीजन में पहले आयोजित कर सकता है।
गावस्कर का सुझाव- सितंबर में हो T20 टूर्नामेंट
गावस्कर ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी को सितंबर में आयोजित करने का सुझाव दिया है।
उनका तर्क है कि अगर टूर्नामेंट नीलामी से कुछ सप्ताह पहले खत्म भी हो जाए, तब भी IPL फ्रेंचाइजी के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए पर्याप्त समय रहेगा।
उनका मानना है कि नीलामी बाद में होने के कारण फ्रेंचाइजी अच्छे प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अचानक नहीं भूलेंगी।
इस बदलाव से रणजी ट्रॉफी का कार्यक्रम भी अधिक निरंतर हो सकता है। इससे उसके दोनों चरणों के बीच का लंबा अंतराल कम करने में मदद मिल सकती है।
रणजी ट्रॉफी में निरंतरता क्यों जरूरी है?
रणजी ट्रॉफी भारत की प्रमुख प्रथम श्रेणी प्रतियोगिता है। यह भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है।
इस टूर्नामेंट में खिलाड़ी लंबे प्रारूप की जरूरी तकनीक विकसित करते हैं। बल्लेबाज लंबी पारियां खेलना सीखते हैं। गेंदबाज लंबे स्पेल करने का अनुभव हासिल करते हैं। टीमें कई दिनों तक चलने वाले मुकाबलों में रणनीति बनाना सीखती हैं।
गावस्कर का मानना है कि भारतीय क्रिकेट को इस प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखना चाहिए।
पूर्व भारतीय कप्तान कई बार इस बात पर जोर दे चुके हैं कि भारतीय टेस्ट टीम के कई खिलाड़ी पहले घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी क्षमता साबित करते हैं।
उनके अनुसार, अगर घरेलू कार्यक्रम लगातार छोटे प्रारूपों को प्राथमिकता देता रहा, तो इससे खिलाड़ियों के विकास की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
BCCI का घरेलू कैलेंडर काफी बड़ा
BCCI के 2026-27 घरेलू सीजन में पुरुष और महिला क्रिकेट के साथ अलग-अलग आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं को मिलाकर 1,788 मुकाबले खेले जाएंगे।
इस कार्यक्रम में दलीप ट्रॉफी, ईरानी कप, रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी के अलावा कई युवा प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
दलीप ट्रॉफी का आयोजन 23 अगस्त से शुरू हुआ। वहीं ईरानी कप 1 से 5 अक्टूबर तक खेला जाएगा।
BCCI ने कर्नल सी.के. नायडू ट्रॉफी के लिए भी दो चरणों का प्रारूप बरकरार रखा है। इसके अलावा युवा क्रिकेट प्रतियोगिताओं में कुछ बदलाव किए गए हैं।
इतने बड़े घरेलू कैलेंडर को एक सीजन में व्यवस्थित करना आसान नहीं है। हालांकि, गावस्कर चाहते हैं कि BCCI यह स्पष्ट करे कि घरेलू क्रिकेट में किन प्रतियोगिताओं को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
गावस्कर चाहते हैं रणजी ट्रॉफी को मिले उसका महत्व
गावस्कर की आलोचना केवल एक सीजन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं है।
वह चाहते हैं कि रणजी ट्रॉफी को भारतीय क्रिकेट में उसका उचित महत्व वापस मिले। उनके अनुसार, प्रथम श्रेणी क्रिकेट देश की क्रिकेट विकास प्रणाली का केंद्र होना चाहिए।
किसी अन्य प्रतियोगिता की वजह से रणजी ट्रॉफी को बार-बार पीछे नहीं किया जाना चाहिए।
उनकी बात भारतीय क्रिकेट के सामने एक बड़ा सवाल भी रखती है। क्या घरेलू क्रिकेट का कैलेंडर रेड-बॉल खिलाड़ियों के विकास को प्राथमिकता दे? या फिर उसे IPL की व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार ढलना चाहिए?
BCCI ने 2026-27 के लिए एक बड़ा घरेलू कार्यक्रम तैयार किया है। अब सबसे बड़ी चुनौती सभी प्रारूपों के बीच सही संतुलन बनाए रखने की है।
गावस्कर के लिए इसका जवाब स्पष्ट है। भारत को रणजी ट्रॉफी की अहमियत बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि मजबूत प्रथम श्रेणी क्रिकेट ही देश की टेस्ट क्रिकेट प्रणाली को मजबूत आधार देता है।
