ईशान किशन ने 350 रन बनाकर ईस्ट जोन को दलीप ट्रॉफी 2026-27 का खिताब दिलाया। पहली पारी में 372 रन की बढ़त के आधार पर ईस्ट जोन ने साउथ जोन को हराया
नई दिल्ली: ईस्ट जोन ने आखिरकार लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। टीम की इस ऐतिहासिक जीत में कप्तान ईशान किशन ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
किशन ने दलीप ट्रॉफी 2026-27 के फाइनल में दोनों पारियों को मिलाकर शानदार 350 रन बनाए। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला गया पांच दिवसीय फाइनल 10 सितंबर को ड्रॉ पर समाप्त हुआ। हालांकि, पहली पारी में 372 रन की बड़ी बढ़त के कारण ईस्ट जोन को विजेता घोषित किया गया।
इस जीत के साथ ईस्ट जोन ने 2012-13 के बाद पहली बार दलीप ट्रॉफी का खिताब जीता। यह टीम का तीसरा दलीप ट्रॉफी खिताब भी है। इससे पहले ईस्ट जोन ने 2011-12 और 2012-13 में ट्रॉफी जीती थी।
708 रन बनाकर ईस्ट जोन ने बनाई मजबूत स्थिति
ईस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और यह निर्णय टीम के पक्ष में रहा।
ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए दलीप ट्रॉफी फाइनल के इतिहास की सबसे बड़ी पारियों में से एक खेली। उन्होंने 334 गेंदों पर 270 रन बनाए। उनकी पारी में 30 चौके और सात छक्के शामिल रहे।
किशन ने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी की और जब स्पिन गेंदबाजों ने मौका दिया, तब तेजी से रन बनाए।
उनका 270 रन दलीप ट्रॉफी फाइनल में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया। उनसे आगे केवल नॉर्थ जोन के रमन लांबा हैं, जिन्होंने 1987-88 के फाइनल में 320 रन बनाए थे।
किशन दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज भी बने।
हालांकि, 270 रन उनका सबसे बड़ा फर्स्ट-क्लास स्कोर नहीं है। इस फॉर्मेट में उनका सर्वोच्च स्कोर 273 रन है।
कुमार कुशाग्र ने भी लगाया शतक
ईस्ट जोन की बल्लेबाजी केवल ईशान किशन पर निर्भर नहीं रही।
कुमार कुशाग्र ने 101 रन बनाए। वहीं शिखर मोहन ने 85 और अभिमन्यु ईश्वरन ने 72 रन की पारी खेली। इन पारियों की मदद से ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
साउथ जोन की ओर से त्रिपुराना विजय सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने चार विकेट लिए, लेकिन ईस्ट जोन की मजबूत बल्लेबाजी के सामने साउथ जोन 700 रन के आंकड़े को रोक नहीं सका।
पहली पारी खत्म होने तक साउथ जोन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो चुकी थी।
एक रन से शतक से चूके तिलक वर्मा
साउथ जोन को वापसी के लिए मजबूत बल्लेबाजी की जरूरत थी, लेकिन ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा।
कप्तान तिलक वर्मा ने सबसे ज्यादा प्रतिरोध किया। उन्होंने 211 गेंदों का सामना करते हुए 99 रन बनाए। हालांकि, वह शतक से केवल एक रन दूर रह गए।
ईस्ट जोन के कूनैन कुरैशी ने तिलक वर्मा को आउट कर साउथ जोन की सबसे मजबूत वापसी की कोशिश को रोक दिया।
देवदत्त पडिक्कल ने 62 रन बनाए, लेकिन साउथ जोन पूरी पारी में इसी तरह का प्रदर्शन जारी नहीं रख सका।
ईस्ट जोन ने साउथ जोन को 336 रन पर ऑलआउट कर दिया। इससे ईस्ट जोन को पहली पारी में 372 रन की बड़ी बढ़त मिली।
मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार ने संभाला गेंदबाजी मोर्चा
ईस्ट जोन की जीत में उसकी गेंदबाजी का भी अहम योगदान रहा।
मुकेश कुमार ने प्रभावी स्पेल किया, जबकि अनुभवी मोहम्मद शमी ने साउथ जोन के बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। शमी की अनुशासित गेंदबाजी ने साउथ जोन की पहली पारी के दौरान ईस्ट जोन को नियंत्रण बनाए रखने में मदद की।
372 रन की बढ़त के बाद ईस्ट जोन के पास मैच ड्रॉ होने की स्थिति में भी खिताब जीतने का पर्याप्त फायदा था।
ईस्ट जोन ने दोबारा बल्लेबाजी चुनी
ईस्ट जोन के पास फॉलोऑन देने का विकल्प था, लेकिन कप्तान ईशान किशन ने दोबारा बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
इससे टीम ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया।
किशन एक बार फिर क्रीज पर आए और आक्रामक बल्लेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने 98 गेंदों पर 80 रन बनाए। उनकी पारी में नौ चौके और तीन छक्के शामिल रहे।
इसके साथ ही मैच में उनका कुल स्कोर 350 रन हो गया।
किशन की दोनों पारियों में बल्लेबाजी के दो अलग-अलग अंदाज देखने को मिले। पहली पारी में 270 रन के दौरान उन्होंने धैर्य और संयम दिखाया, जबकि दूसरी पारी में 80 रन तेजी से बनाए।
कूनैन कुरैशी ने लगाया पहला फर्स्ट-क्लास शतक
ईस्ट जोन की दूसरी पारी में एक और बड़ी उपलब्धि देखने को मिली।
युवा खिलाड़ी एमडी कूनैन कुरैशी ने अपना पहला फर्स्ट-क्लास शतक लगाया। उनके नाबाद 116 रन की मदद से ईस्ट जोन ने दूसरी पारी में 388/7 का स्कोर बनाया।
इससे ईस्ट जोन की कुल बढ़त 760 रन तक पहुंच गई।
इतने कम समय में साउथ जोन के लिए इस लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं था। इसके बाद दोनों कप्तानों ने हाथ मिलाया और फाइनल ड्रॉ पर समाप्त हुआ।
पहली पारी में 372 रन की बढ़त के कारण ईस्ट जोन को विजेता घोषित किया गया।
ईशान किशन ने मजबूत किया रेड-बॉल क्रिकेट का दावा
ईशान किशन के इस प्रदर्शन ने उनके रेड-बॉल क्रिकेट के भविष्य को लेकर चर्चा को और मजबूत कर दिया है।
ईस्ट जोन के कप्तान पर फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव था। उन्होंने इसका जवाब अपने फर्स्ट-क्लास करियर के सबसे शानदार प्रदर्शनों में से एक के साथ दिया।
उनका 270 रन दलीप ट्रॉफी फाइनल का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर रहा। इसके बाद उन्होंने दूसरी पारी में 80 रन बनाए और मैच में कुल 350 रन पूरे किए।
किशन ने अपनी शानदार बल्लेबाजी का श्रेय बेहतर मानसिकता को दिया। उनके अनुसार, ज्यादा सोचने और अनावश्यक उम्मीदों से बचने से उन्हें खुलकर खेलने और बल्लेबाज के रूप में अपनी भूमिका पर ध्यान देने में मदद मिली।
तिलक वर्मा ने भी छोड़ी मजबूत छाप
फाइनल में साउथ जोन को हार मिली, लेकिन तिलक वर्मा का टूर्नामेंट शानदार रहा।
फाइनल में उनके 99 रन ने मुश्किल परिस्थितियों में लंबे समय तक बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता दिखाई। वह शतक से केवल एक रन दूर रह गए, लेकिन उनकी पारी ने साउथ जोन को ईस्ट जोन की जीत टालने में मदद की।
पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए तिलक वर्मा को Player of the Tournament भी चुना गया।
ईस्ट जोन ने 13 साल का इंतजार किया खत्म
ईस्ट जोन ने आखिरी बार 2012-13 में दलीप ट्रॉफी जीती थी। उस फाइनल में टीम ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर सेंट्रल जोन को हराया था।
इससे पहले टीम ने 2011-12 में भी खिताब जीता था। 2026-27 की जीत ईस्ट जोन का तीसरा दलीप ट्रॉफी खिताब है।
इसलिए यह जीत टीम के लिए खास महत्व रखती है।
ईस्ट जोन ने फाइनल में बल्ले और गेंद दोनों से दबदबा बनाया। टीम ने पहली पारी में 708 रन बनाए, साउथ जोन को 336 रन पर समेटा और दूसरी पारी में 388/7 का स्कोर बनाया।
लेकिन इस फाइनल की सबसे बड़ी कहानी ईशान किशन की रही।
उन्होंने पहली पारी में 270 रन बनाए।
फिर दूसरी पारी में 80 रन जोड़े।
कुल 350 रन बनाए।
और ईस्ट जोन को 13 साल बाद दलीप ट्रॉफी का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
