नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के दिशा-निर्देशों की अनदेखी का मामला शाहजहांपुर स्थित एनएच-48 टोल प्लाजा पर सामने आया है। आरोप है कि साहाकर ग्लोबल लिमिटेड ने ओवरलोड वाहनों से शुल्क वसूली के दौरान डिजिटल भुगतान प्रणाली के स्थान पर अनधिकृत कागजी पर्चियां जारी कर नियमों का उल्लंघन किया।
एनएचएआई के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, सभी टोल संग्रह एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि ओवरलोड शुल्क की वसूली नकद या किसी भी मैनुअल प्रणाली के माध्यम से नहीं की जाएगी। यह शुल्क केवल निर्धारित डायनेमिक क्यूआर (डिजिटल) भुगतान प्रणाली के माध्यम से ही लिया जाएगा। यह व्यवस्था पारदर्शिता, डिजिटल ट्रेसबिलिटी तथा ओवरलोड शुल्क के समुचित लेखांकन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई थी।
इन अनिवार्य निर्देशों के बावजूद, ओवरलोड वाहनों से निर्धारित डिजिटल प्रणाली के माध्यम से शुल्क लेने के बजाय कागजी पर्चियां जारी की गईं। यह एनएचएआई के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है और पारदर्शी एवं डिजिटल रूप से सत्यापित टोल संग्रह प्रणाली के उद्देश्य को कमजोर करता है।
निर्धारित डिजिटल प्रणाली से बाहर जाकर ओवरलोड शुल्क की वसूली तथा अनधिकृत कागजी पर्चियां जारी करके साहाकर ग्लोबल लिमिटेड ने सरकारी निर्देशों का उल्लंघन किया, वित्तीय पारदर्शिता से समझौता किया तथा सार्वजनिक राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग टोल संग्रह प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित किया।
एनएचएआई के दिशा-निर्देशों के बार-बार उल्लंघन और इन अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए यह जानकारी मिली है कि एनएचएआई संबंधित टोल ऑपरेटर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिसमें अनुबंध की शर्तों और लागू नियमों के अनुसार ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करना भी शामिल है।
इन उल्लंघनों को केवल प्रक्रियागत त्रुटि मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ये राष्ट्रीय राजमार्ग टोल संग्रह प्रणाली की पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार करते हैं तथा तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं।
इन मामलों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए, ताकि अवैध वसूली की वास्तविक सीमा का पता लगाया जा सके, सरकारी राजस्व को हुए नुकसान का आकलन किया जा सके, जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जा सके तथा जहां आवश्यक हो वहां उपयुक्त दीवानी और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जा सके।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर जनता से एकत्र किया जाने वाला प्रत्येक शुल्क पूरी तरह पारदर्शी, डिजिटल रूप से सत्यापन योग्य और जवाबदेह होना चाहिए। एनएचएआई द्वारा निर्धारित व्यवस्था को दरकिनार करने का कोई भी प्रयास कानून के तहत कड़ी कार्रवाई का पात्र है।
