पश्चिम बंगाल में RSS ने सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक मजबूती पर जोर बढ़ाया है। दलित संवाद से लेकर BJP की घर-घर पहुंच तक, सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है।
पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) जमीनी स्तर पर अपनी गतिविधियों को तेज कर रहे हैं। हाल के दिनों में RSS की ओर से सामाजिक और संगठनात्मक मोर्चे पर बढ़ी सक्रियता को राजनीतिक हलकों में एक सुनियोजित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह पहल कई स्तरों पर काम करने वाले एक बहु-बिंदु रोडमैप का हिस्सा है, हालांकि संगठन की ओर से इसे आधिकारिक रूप से किसी “प्लान” के रूप में पेश नहीं किया गया है।
दलित समाज से संवाद पर जोर
RSS की मौजूदा गतिविधियों का एक अहम पहलू दलित समाज के साथ सीधा संवाद बढ़ाना बताया जा रहा है। संगठन से जुड़े स्वयंसेवक दलित बस्तियों में जाकर सामाजिक मेल-जोल और सामूहिक भोजन जैसे कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसके जरिए सामाजिक दूरी कम करने और आपसी समरसता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है। RSS से जुड़े लोगों का कहना है कि समाज के सभी वर्गों को साथ जोड़े बिना व्यापक सामाजिक समर्थन संभव नहीं है।
कथित हिंसा के मुद्दों पर निगरानी
RSS और BJP दोनों ही पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में हिंदुओं के खिलाफ कथित हिंसा के मामलों को लेकर मुखर रहे हैं। संगठन से जुड़े नेताओं का कहना है कि इन घटनाओं पर नजर रखना और समाज को सतर्क करना जरूरी है। इस संदर्भ में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हालिया हमलों का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसे RSS नेता क्षेत्रीय सुरक्षा और सामाजिक चेतना से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को राजनीतिक बताता रहा है।
संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद
रणनीति के तहत RSS अपनी शाखाओं और स्वयंसेवकों के नेटवर्क को विस्तार देने पर भी काम कर रहा है। गांवों और शहरी इलाकों में नियमित बैठकें, शाखाएं और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संगठनात्मक मजबूती का अप्रत्यक्ष लाभ BJP को चुनावी तैयारियों में मिल सकता है।
BJP की ‘घर-घर संपर्क’ योजना
RSS की सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ BJP भी अपने स्तर पर आउटरीच अभियान तेज कर रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को हर हिंदू परिवार तक पहुंचने, लोगों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याएं सुनने के निर्देश दिए गए हैं। इसे पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक मायने और आगे की तस्वीर
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, RSS की सामाजिक पहल और BJP की राजनीतिक मुहिम, दोनों का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत आधार को चुनौती देना है। विपक्षी दलों का आरोप है कि RSS की ये गतिविधियां चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। ऐसे में बंगाल की विविध सामाजिक और राजनीतिक संरचना में यह रणनीति कितना असर दिखा पाएगी, यह आने वाले समय में साफ होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में RSS और BJP की सक्रियता तेज हो चुकी है और इसका प्रभाव आने वाले महीनों में राज्य की सियासी दिशा पर दिखाई दे सकता है।
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