‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर संजय राऊत का तंज: भाजपा पर लगाया सांप्रदायिक ध्रुवीकरण फैलाने का आरोप

'ऑपरेशन सिंदूर' पर संजय राऊत का तंज: भाजपा पर लगाया सांप्रदायिक ध्रुवीकरण फैलाने का आरोप

मालेगांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राऊत ने कहा— “वन हसबैंड, वन सिंदूर” भाजपा का नया नारा, फडणवीस और मोदी सरकार पर भी बोला हमला

1 जून 2025, मालेगांव

शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राऊत ने रविवार को मालेगांव में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस अभियान को “राजनीतिक दिखावा” बताते हुए आरोप लगाया कि यह समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की एक सोची-समझी रणनीति है।

राऊत ने कटाक्ष करते हुए कहा, “अब भाजपा नेता घर-घर सिंदूर लेकर जा रहे हैं। ये ‘वन हसबैंड, वन सिंदूर’ का प्रोग्राम क्या है? सुंदर पति ही सिंदूर देता है, कोई बाहरी नहीं। ये कौन सा जेहाद है?” उन्होंने मीडिया से यह भी सवाल उठाने को कहा कि “कौन किसका हसबैंड है?”

मालेगांव महानगरपालिका चुनावों के संदर्भ में राऊत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब चुनाव होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन साल तक प्रशासनिक व्यवस्था के नाम पर सत्ता चलाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया। अब जबकि चुनाव नजदीक हैं, भाजपा को अपनी हार का डर सता रहा है।

उन्होंने बताया कि आगामी चुनावों में भाजपा के जाति, धर्म और पैसों पर आधारित प्रचार का मुकाबला करने के लिए एक कोर कमेटी बनाई जाएगी, जो गुटबाजी और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ काम करेगी।

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धुले नकदी घोटाले पर बोलते हुए राऊत ने दावा किया कि जांच समिति को प्रभावित करने के लिए भारी रिश्वत की पेशकश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि “10 करोड़ रुपये की राशि जलगांव में स्वीकार की गई, जिसका कुछ हिस्सा एक बड़े नेता तक पहुंचा।” इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि SIT का प्रमुख कौन है और जांच कहां तक पहुंची है।

राऊत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम अब ‘देवेंद्र केंद्रीय कारागार’ रख देना चाहिए।” वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, “देश में जो भी भ्रष्टाचार हो रहा है, वह मोदी जी के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं।”

अपने वक्तव्य के अंत में राऊत ने भाजपा नेताओं जैसे अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और अशोक चव्हाण को पार्टी में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया और भाजपा की कथनी-करनी में अंतर बताया। उन्होंने भाजपा नेता किरीट सोमैया को “नाली की गंदगी” और “बकवास नेता” कहकर संबोधित किया, साथ ही उन्हें अपने ही सहयोगियों के खिलाफ बोलने की चुनौती दी।

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