सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से क्या सच में कैंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा होता है? जानिए डॉक्टरों और वैज्ञानिक रिसर्च के आधार पर मोबाइल रेडिएशन की पूरी सच्चाई
नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बहुत से लोग रात को मोबाइल चलाते-चलाते सो जाते हैं और फोन को सिरहाने रख देते हैं। इसी आदत को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से कैंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों के बीच, आइए जानते हैं डॉक्टरों और वैज्ञानिक रिसर्च के आधार पर इस बात की पूरी सच्चाई।
सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें और लोगों का डर
सोशल मीडिया पर आए दिन ऐसे पोस्ट और वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि मोबाइल रेडिएशन से ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। कई मैसेज में यहां तक कहा जाता है कि सिरहाने मोबाइल रखकर सोना जानलेवा साबित हो सकता है। इन दावों के कारण लोगों में डर बढ़ता है, लेकिन जरूरी है कि किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई को समझा जाए।
मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन क्या होती है?
मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन को वैज्ञानिक भाषा में नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह रेडिएशन इतनी शक्तिशाली नहीं होती कि शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सके या डीएनए को तोड़ सके। कैंसर आमतौर पर आयोनाइजिंग रेडिएशन से जुड़ा होता है, जैसे एक्स-रे या गामा किरणें। मोबाइल फोन की रेडिएशन उस श्रेणी में नहीं आती।
क्या मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का सबूत है?
अब तक हुई कई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल रिसर्च और स्टडीज़ में मोबाइल फोन और कैंसर के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हो पाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मोबाइल रेडिएशन को 2B कैटेगरी में रखा है, जिसमें कॉफी और अचार जैसी चीजें भी शामिल हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मोबाइल से कैंसर होता ही है। यह सिर्फ इतना दर्शाता है कि इस विषय पर आगे भी रिसर्च की जरूरत है।
सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से ब्रेन ट्यूमर का खतरा?
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिरहाने मोबाइल रखकर सोने से ब्रेन ट्यूमर होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि, लंबे समय तक मोबाइल को सिर के बेहद पास रखना एक अच्छी आदत नहीं मानी जाती। सावधानी के तौर पर मोबाइल को थोड़ी दूरी पर रखना बेहतर माना जाता है।
डॉक्टर मोबाइल पास रखकर सोने से क्यों मना करते हैं?
डॉक्टर मोबाइल पास रखकर सोने से मना जरूर करते हैं, लेकिन वजह कैंसर नहीं होती। असली कारण है मोबाइल का नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर असर। मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन है, जिससे नींद लाने वाला हार्मोन मेलाटोनिन कम बनने लगता है।
सिरहाने मोबाइल रखने से होने वाले असली नुकसान
मोबाइल को पास रखकर सोने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
• नींद देर से आना या बार-बार टूटना
• सुबह थकान और भारीपन महसूस होना
• आंखों में जलन और सिरदर्द
• तनाव और चिड़चिड़ापन
• मोबाइल देखने की लत बढ़ना
ये सभी समस्याएं लाइफस्टाइल से जुड़ी हैं, न कि कैंसर से।
मोबाइल रेडिएशन से डरें या समझदारी दिखाएं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल रेडिएशन से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन स्मार्ट और संतुलित इस्तेमाल जरूरी है। जरूरत से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करना, खासकर रात में यह बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है शरीर और दिमाग दोनों के लिए।
सोते समय मोबाइल को लेकर डॉक्टरों की सलाह
डॉक्टर कुछ आसान आदतें अपनाने की सलाह देते हैं:
• सोते समय मोबाइल को सिर से कम से कम 1–2 फीट दूर रखें
• बेड पर लेटकर लंबे समय तक मोबाइल न चलाएं
• सोने से कम से कम 30 मिनट पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं
इन आदतों से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
