Ulaanbaatar Open 2026 में भारतीय पहलवानों का दिखा जलवा, पुरुष फ्रीस्टाइल में 2 गोल्ड और 2 ब्रॉन्ज

Ulaanbaatar Open 2026 में भारतीय पहलवानों का दिखा जलवा, पुरुष फ्रीस्टाइल में 2 गोल्ड और 2 ब्रॉन्ज

मंगोलिया में आयोजित Ulaanbaatar Open 2026 में भारतीय पहलवानों ने दिखाया शानदार प्रदर्शन, कुल 16 पदक जीते। पुरुष फ्रीस्टाइल में दीपक और दिनेश धनखड़ ने स्वर्ण पदक जीते

नई दिल्ली: मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) रैंकिंग सीरीज ‘Ulaanbaatar Open 2026’ में भारतीय पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया । 4 से 7 जून तक चले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत ने कुल 16 पदक जीते, जिनमें 8 स्वर्ण पदक शामिल रहे।

टूर्नामेंट के अंतिम दिन पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत को दो स्वर्ण और दो कांस्य पदक मिले। यह प्रदर्शन ऐसे समय आया है जब भारतीय खिलाड़ी 2026 एशियन गेम्स और आने वाले विश्व प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटे हुए हैं।

61 किलोग्राम वर्ग में दीपक ने दिखाया दम

भारतीय पहलवान दीपक ने 61 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कजाकिस्तान के अस्सिल ऐताकिन को 6-0 से हराया।

पूरे मुकाबले के दौरान दीपक ने आक्रामक खेल दिखाया और अपने प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने कजाकिस्तान के आदिलेत अलमुखामेदोव को 7-1 से मात दी थी।

24 वर्षीय दीपक का यह प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वह भारत के प्रमुख फ्रीस्टाइल पहलवानों में शामिल हो सकते हैं।

दिनेश धनखड़ ने विश्व जूनियर चैंपियन को हराकर जीता गोल्ड

125 किलोग्राम हेवीवेट वर्ग में हरियाणा के दिनेश धनखड़ ने भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया। फाइनल में उनका मुकाबला कजाकिस्तान के अंडर-20 विश्व चैंपियन येदिगे कासिमबेक से था।

दिनेश ने बेहद रणनीतिक और संतुलित खेल दिखाते हुए मुकाबला 2-0 से अपने नाम किया। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उनके सामने एक मौजूदा विश्व चैंपियन था।

फाइनल तक पहुंचने के रास्ते में दिनेश ने पोलैंड के विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता रॉबर्ट बारान को 5-1 से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में रूस के तैमूर कोताएव को 11-0 से हराकर तकनीकी श्रेष्ठता हासिल की।

दिनेश इससे पहले 2025 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं और इस साल की शुरुआत में ज़ाग्रेब ओपन में भी पदक जीतकर चर्चा में आए थे।

मोहित कुमार की शानदार वापसी

65 किलोग्राम वर्ग में भारत के मोहित कुमार ने हार के बाद शानदार वापसी करते हुए कांस्य पदक जीता।

रेपेचेज़ राउंड से आगे बढ़ते हुए उन्होंने कजाकिस्तान के ओस्सिमझान दस्तानबेक को 17-6 से हराया। यह मुकाबला तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर समाप्त हुआ।

अंडर-23 एशियाई चैंपियन रह चुके मोहित ने अपनी तेज़ी, फिटनेस और आक्रामक शैली से प्रभावित किया। उनके प्रदर्शन ने यह दिखाया कि भारत के पास भविष्य के लिए मजबूत विकल्प मौजूद हैं।

विक्की ने मेजबान पहलवान को हराकर जीता ब्रॉन्ज

97 किलोग्राम वर्ग में भारतीय पहलवान विक्की ने कांस्य पदक मुकाबले में मेजबान मंगोलिया के गंखुयाग गनबाटार को 4-0 से हराया।

घरेलू दर्शकों के भारी समर्थन के बीच किसी मेजबान खिलाड़ी को हराना आसान नहीं होता, लेकिन विक्की ने दबाव में भी संयम बनाए रखा और शानदार जीत दर्ज की।

केवल पुरुष फ्रीस्टाइल ही नहीं, हर वर्ग में चमका भारत

Ulaanbaatar Open में भारत का प्रदर्शन सिर्फ पुरुष फ्रीस्टाइल तक सीमित नहीं रहा, महिला कुश्ती और ग्रीको-रोमन वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार सफलता हासिल की।

74 किलोग्राम वर्ग में सागर जगलान ने स्वर्ण पदक जीता। वहीं ग्रीको-रोमन वर्ग में सुनील कुमार (87 किग्रा) और नितेश कुमार (97 किग्रा) ने भी भारत को गोल्ड दिलाया।

कुल 16 पदकों के साथ भारत ने साबित किया कि अब देश के पास हर वजन वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।

एशियन गेम्स 2026 के लिए मिला बड़ा आत्मविश्वास

Ulaanbaatar Open जैसे रैंकिंग सीरीज टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां मिलने वाले अंक विश्व रैंकिंग को प्रभावित करते हैं और बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर सीडिंग दिलाने में मदद करते हैं।

इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने कजाकिस्तान, रूस, मंगोलिया, ईरान और अमेरिका जैसे मजबूत देशों के पहलवानों के खिलाफ जीत दर्ज की। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और टीम प्रबंधन को भी आगामी एशियन गेम्स के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं।

यह भी पढ़े: कौन हैं ड्रैग-फ्लिक के बादशाह संदीप सिंह ?

क्या भारतीय कुश्ती की नई पीढ़ी तैयार

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कुश्ती ने लगातार प्रगति कर रही है। बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट जैसे खिलाड़ियों ने जिस सफलता की नींव रखी थी, अब नई पीढ़ी उसे आगे बढ़ा रही है।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के प्रशिक्षण कार्यक्रम, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर का लाभ युवा खिलाड़ियों को मिल रहा है। यही वजह है कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।

Ulaanbaatar Open 2026 भारतीय कुश्ती के लिए सिर्फ एक सफल टूर्नामेंट नहीं रहा, बल्कि यह भविष्य की संभावनाओं का संकेत भी है। दीपक और दिनेश के स्वर्ण पदक तथा मोहित और विक्की के कांस्य पदक यह बता रहे हैं कि भारतीय कुश्ती की नई पीढ़ी बड़े मंचों पर जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है।

एशियन गेम्स 2026 से पहले मिला यह प्रदर्शन भारतीय दल के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला समय है, यदि यही लय जारी रहती है, तो आने वाले समय में भारत अंतरराष्ट्रीय कुश्ती मंच पर और बड़े पदकों का दावेदार बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *