Spotify, YouTube और रीजनल कंटेंट के दम पर बढ़ रहा भारतीय संगीत कारोबार, लेकिन कमाई की चुनौतियां अब भी बरकरार
नई दिल्ली: एक समय था जब भारत का म्यूज़िक इंडस्ट्री लगभग पूरी तरह से बॉलीवुड फ़िल्मों पर ही निर्भर था। किसी बड़ी फ़िल्म का हिट एल्बम ही पूरे म्यूज़िक बिज़नेस की दिशा तय करता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
आज, भारत में म्यूज़िक इकॉनमी एक बड़े डिजिटल बदलाव से गुज़र रही है। Spotify, JioSaavn, Apple Music, YouTube और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने म्यूज़िक सुनने और उससे पैसे कमाने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। बॉलीवुड आज भी सबसे बड़ा प्लेयर है, लेकिन डिजिटल स्ट्रीमिंग अब इंडस्ट्री की ग्रोथ का इंजन बन गई है।
Numbers बता रहे हैं म्यूजिक इंडस्ट्री की कहानी
भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर पर जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत के म्यूज़िक इंडस्ट्री का साइज़ लगभग 53 अरब रुपये आंका गया था। 2025 में इसमें लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसकी मार्केट वैल्यू लगभग 59 से 60 अरब रुपये तक पहुँच गई।
जानकारों का अनुमान है कि 2027-28 तक यह इंडस्ट्री 75 से 78 अरब रुपये के बीच पहुँच सकती है।
इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह डिजिटल लाइसेंसिंग है, जिसमें शामिल हैं:
- Audio Streaming Platforms
- YouTube Revenue
- Social Media Licensing
- OTT Sync Deals
- Short Video Platforms
आज, इंडस्ट्री की कुल कमाई का 60 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा डिजिटल माध्यमों से आता है, जो यह दिखाता है कि भारतीय म्यूज़िक बिज़नेस तेज़ी से ऑनलाइन दुनिया की ओर बढ़ रहा है।
बॉलीवुड अभी भी सबसे बड़ा खिलाड़ी है
आज भी बॉलीवुड म्यूजिक का असर बहुत ज़्यादा है। हिंदी फ़िल्मों के गाने देश भर में सबसे ज़्यादा सुने जाने वाले कंटेंट में से एक बने हुए हैं।
इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि कुल म्यूजिक की खपत और उससे होने वाली कमाई में फ़िल्मी गीत का हिस्सा लगभग 63 से 80 प्रतिशत है। किसी बड़े बजट की फ़िल्म का सफल साउंडट्रैक लाखों बार स्ट्रीम किया जा सकता है और रिकॉर्ड लेबल के लिए कमाई का एक बड़ा ज़रिया बन सकता है।
हालाँकि, अब बॉलीवुड ही एकमात्र केंद्र नहीं रह गया है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने म्यूजिक इंडस्ट्री को पहले से कहीं ज़्यादा विविध और खुला बना दिया है।
रीजनल म्यूजिक बना नई ग्रोथ
भारत के अलग-अलग जगहों का संगीत अब देश और दुनिया में पहचान बना रहा है।
दक्षिण भारतीय सिनेमा के तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ गाने लगातार लोकप्रिय बने हुए हैं। इसी तरह, पंजाबी संगीत ने भारत के बाहर भी बड़ी संख्या में सुनने वाले इकठा कर रखे हैं ।
इसके अलावा:
- बंगाली संगीत
- मराठी गाने
- गुजराती संगीत
- भोजपुरी और हरियाणवी गाने
भी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
एल्गोरिदम पर आधारित रिकमेंडेशन सिस्टम ने छोटे कलाकारों और क्षेत्रीय भाषाओं को पहले से कहीं ज़्यादा पहचान दिलाई है।
इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट्सके लिए खुल रहे हैं नए रास्ते
डिजिटल क्रांति का सबसे ज़्यादा फ़ायदा इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट्स को ही हुआ है।
पहले, किसी आर्टिस्ट को मशहूर होने के लिए फ़िल्म इंडस्ट्री या बड़े रिकॉर्ड लेबल्स की ज़रूरत होती थी। आज, सोशल मीडिया, YouTube और म्यूज़िक स्ट्रीमिंग ऐप्स ने इस प्रक्रिया को काफ़ी आसान बना दिया है।
भारत में इंडी पॉप, हिप-हॉप, रैप, इलेक्ट्रॉनिक और फ़्यूज़न म्यूज़िक तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई युवा आर्टिस्ट्स सिर्फ़ एक वायरल गाने के दम पर लाखों सुनने वालों तक पहुँच रहे हैं।
यह बदलाव दिखाता है कि पहचान बनाने के लिए टैलेंट को अब पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है।
लाइव कॉन्सर्ट से कलाकारों की कमाई में बढ़ोतरी
महामारी के बाद से भारत में लाइव म्यूज़िक इवेंट्स की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया है। देश भर में बड़े पैमाने पर कॉन्सर्ट, म्यूज़िक फ़ेस्टिवल और लाइव परफ़ॉर्मेंस आयोजित किए जा रहे हैं। दर्शक अब सिर्फ़ गाने सुनना नहीं चाहते; वे अपने पसंदीदा कलाकारों को स्टेज पर लाइव परफ़ॉर्म करते हुए भी देखना चाहते हैं।
इससे कलाकारों और म्यूज़िक कंपनियों के लिए कमाई के नए ज़रीये बने हैं। कई जानकारों का मानना है कि आने वाले सालों में लाइव एंटरटेनमेंट भारतीय म्यूज़िक इंडस्ट्री का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सेक्टर बन सकता है।
ग्रोथ के बीच बड़ी चुनौतियां
म्यूज़िक इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी इसे कुछ गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या उन ग्राहकों की संख्या है जो बहुत कम या कुछ भी भुगतान नहीं करते हैं। भारत में लाखों लोग म्यूज़िक सुनते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इसके लिए सब्सक्रिप्शन खरीदते हैं।
हालांकि 2025 तक पेड म्यूज़िक सब्सक्राइबर की संख्या बढ़कर लगभग 1.44 करोड़ हो गई, लेकिन कुल सुनने वालों की संख्या की तुलना में यह आंकड़ा अभी भी काफी कम है।
इसके अलावा, कलाकारों और रिकॉर्ड लेबल को मिलने वाली रॉयल्टी को लेकर भी बहस चल रही है।
भविष्य कैसा दिखेगा?
किफ़ायती इंटरनेट, ज़्यादा लोगों तक स्मार्टफ़ोन का पहुँचना, क्षेत्रीय भाषाओं का विस्तार और भारतीय संगीत की ग्लोबल लोकप्रियता आने वाले सालों में इस इंडस्ट्री को और मज़बूत बना सकती है।
खासकर, पंजाबी संगीत, बॉलीवुड फ़्यूज़न और भारतीय इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट्स की इंटरनेशनल डिमांड लगातार बढ़ रही है।
जानकारों का मानना है कि बॉलीवुड पूरे इकोसिस्टम की आर्थिक रीढ़ बना रहेगा; हालाँकि, डिजिटल स्ट्रीमिंग ने म्यूज़िक इंडस्ट्री को सबके लिए सुलभ बना दिया है, जिससे छोटे शहरों के आर्टिस्ट और क्षेत्रीय भाषाओं में काम करने वाले आर्टिस्ट भी नेशनल स्टेज तक पहुँच पा रहे हैं।
बॉलीवुड आज भी इस इंडस्ट्री की रीढ़ है, लेकिन डिजिटल स्ट्रीमिंग ने म्यूज़िक की दुनिया में मौकों को सबके लिए सुलभ बनाने का काम किया है। आने वाले समय में, भारतीय म्यूज़िक इंडस्ट्री की पहचान सिर्फ़ किसी एक भाषा या शैली से नहीं, बल्कि उसकी विविधता, डिजिटल पहुँच और वैश्विक प्रभाव से होगी।
