दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से हटेंगे सभी आवारा कुत्ते!

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से हटेंगे सभी आवारा कुत्ते!

सुप्रीम कोर्ट ने आठ हफ्ते में शेल्टर में रखने का दिया आदेश, पशु प्रेमियों ने जताई नाराज़गी


नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025

Delhi-NCR में आवारा कुत्तों के विस्थापन के मामले को बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की पीठ पर प्रस्तुत किया गया। यह मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि सभी आवारा कुत्तों को आठ हफ्तों के भीतर पकड़कर संबंधित प्राधिकरणों द्वारा बनाए गए शेल्टर होम में रखा जाए। इस आदेश पर भिन्न-भिन्न प्रतिक्रियाएं आई हैं— जबकि कुछ लोग इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अच्छी कार्रवाई मानते हैं, तो दूसरे लोग इसे अव्यावहारिक बताते हैं और डरते हैं कि इससे इंसानों और कुत्तों के बीच टकराव बढ़ सकता है।

जब यह मुद्दा पुराने आदेश की याद दिलाते हुए रखा गया — जिसमें आवारा कुत्तों का विस्थापन या हत्या कानून का पालन किए बिना प्रतिबंधित थी — तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मैं इस पर गौर करूंगा।” यह बयान पशु प्रेमियों के लिए एक उम्मीद की किरण माना जा रहा है, जो इस हटाने की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हटाने की कार्रवाई में बाधा डालने वालों पर अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों की उस व्यवस्था की आलोचना की, जिसमें नसबंदी किए गए कुत्तों को उनकी मूल जगह पर छोड़ना अनिवार्य है। अदालत ने इसे “अतार्किक और बेतुका” बताया और कहा, “चाहे कुत्ता नसबंदीशुदा हो या नहीं, समाज को सुरक्षित महसूस करना चाहिए। कोई भी आवारा कुत्ता सड़कों पर नहीं होना चाहिए।”

मामला उठाने वाले वकील के अनुसार, ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के 9 मई 2024 के आदेश के विपरीत हैं। उस आदेश में जस्टिस महेश्वरी और जस्टिस कैरोल की पीठ ने 2023 के एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों के लागू होने के बाद लंबित याचिकाओं का निपटारा किया था और स्पष्ट किया था कि “किसी भी परिस्थिति में कुत्तों की अंधाधुंध हत्या नहीं हो सकती।” अदालत ने यह भी कहा था कि प्राधिकरणों को कानून की भावना और प्रावधानों के अनुरूप काम करना चाहिए, क्योंकि सभी जीवों के प्रति करुणा संविधान का एक मूल्य है। साथ ही, भविष्य में ऐसे किसी भी विवाद को संबंधित संवैधानिक अदालतों या मंचों पर लाने की अनुमति दी थी।

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