Akshaya Tritiya 2026: गजकेसरी योग के साथ आ रहा है अक्षय तृतीया, जानिए क्या करें इस शुभ दिन

अक्षय तृतीया 2026

अक्षय तृतीया 2026 कब है? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, गजकेसरी योग, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों की पूरी जानकारी।

नई दिल्ली: सनातन धर्म में कुछ तिथियाँ केवल पंचांग की तारीखें नहीं होतीं — वे जीवन जीने का एक संदेश लेकर आती हैं। अक्षय तृतीया ऐसी ही एक तिथि है, जिसे लोग आखा तीज या अक्ती तीज के नाम से भी जानते और मनाते हैं।

“अक्षय” यानी जो कभी घटे नहीं, जो समाप्त न हो, जो अनंत काल तक बना रहे। इसीलिए इस दिन जो भी शुभ कार्य किया जाए — चाहे वो जप हो, तप हो, दान हो, सेवा हो, हवन हो या कोई और नेक काम — उसका फल भी अक्षय माना जाता है, यानी वह पुण्य कभी नष्ट नहीं होता।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व हमें याद दिलाता है कि आत्मिक उन्नति, धर्म के प्रति निष्ठा, सेवाभाव और सत्कर्म की यह परंपरा युगों-युगों से चली आ रही है — और आगे भी अनवरत चलती रहेगी।

अक्षय तृतीया 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

  • तारीख: रविवार, 19 अप्रैल 2026
  • तृतीया तिथि शुरू: 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक (लगभग 1 घंटा 32 मिनट)

इस दिन की पूरी तृतीया तिथि शुभ मानी जाती है। सोना-चांदी खरीदना हो, नया काम शुरू करना हो, या कोई बड़ा फैसला लेना हो — इसके लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं। यह दिन खुद में “सर्व सिद्धि दिवस” है।

2026 की खास बात

इस साल अक्षय तृतीया पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है — गजकेसरी योग। चंद्रमा और बृहस्पति के विशेष संरेखण से बनने वाला यह योग बुद्धि, सम्मान, समृद्धि और सकारात्मक परिणामों को कई गुना बढ़ा देता है। यानी इस बार का अक्षय तृतीया और भी ज्यादा फलदायी माना जा रहा है।

पौराणिक कथाएं और मान्यताएं

इस पर्व से जुड़ी कई पुरानी कहानियां हैं:
भगवान परशुराम का जन्म: यह दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्मदिन है, जो धर्म की रक्षा के लिए अवतरित हुए थे।

गंगा का धरती पर आगमन: मान्यता है कि इसी दिन पवित्र गंगा नदी स्वर्ग से उतरकर धरती पर आई थी, ताकि मानवजाति को पवित्र कर सके।

अक्षय पात्र की कहानी: महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को वनवास के दौरान एक अद्भुत पात्र दिया था जिसमें से कभी भोजन खत्म नहीं होता था — उसे अक्षय पात्र कहा गया।

और भी कई किंवदंतियां: कुबेर को इसी दिन स्वर्ग के खजाने का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। त्रेता युग का आरंभ भी इसी दिन से माना जाता है। महर्षि वेद व्यास ने इसी दिन गणेश जी को महाभारत सुनाना शुरू किया था।

जैन परंपरा में: जैन धर्म में यह दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ के एक साल के उपवास के समाप्त होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। एक राजा ने उन्हें गन्ने का रस पिलाया था — इसीलिए जैन समुदाय इस दिन गन्ने का रस बांटता है और दान करता है।

इस दिन क्या करें — रीति-रिवाज और परंपराएं

  • पूजा-अर्चना: भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, कुबेर और परशुराम जी की पूजा करें। अक्षत (साबुत चावल), तुलसी पत्ते, फूल और मिठाई चढ़ाएं। विष्णु या शिव मंदिर जाना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है।
  • सोना-चांदी या संपत्ति खरीदना: यह इस दिन की सबसे लोकप्रिय परंपरा है। इस दिन खरीदा गया सोना जीवनभर समृद्धि लाता है — ऐसी मान्यता है।
  • दान करें — दिल से किसी जरूरतमंद को खाना खिलाएं, कपड़े दें, शिक्षा में मदद करें। इस दिन किया गया दान “अक्षय” फल देता है — यानी उसका पुण्य कभी खत्म नहीं होता।
  • नई शुरुआत के लिए सबसे सही दिन व्यापार शुरू करना, नए घर में प्रवेश, शादी, निवेश — इस दिन इन सब कामों के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की जरूरत नहीं।
  • व्रत और अन्य रीतियां: कुछ लोग सात्विक भोजन के साथ उपवास रखते हैं। कई जगहों पर महिलाएं हल्दी-कुमकुम की रस्म करती हैं, किसान खेत में बीज बोते हैं और व्यापारी नई बहियां खोलते हैं।

अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाते हैं यह पर्व

  • उत्तर भारत (दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा): परिवार के साथ मंदिर जाना, सोना खरीदना — यहां इसे “अखा तीज” कहते हैं।
  • महाराष्ट्र: महिलाएं देवी गौरी की पूजा करती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं।
  • पश्चिम बंगाल और ओडिशा: लक्ष्मी पूजा होती है, नई बहियां खुलती हैं और धान की बुवाई होती है। पुरी में रथ यात्रा की तैयारियां भी इसी दिन से शुरू होती हैं।
  • दक्षिण भारत: विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा और दान-पुण्य के आयोजन होते हैं।
  • जैन समुदाय: गन्ने का रस बांटा जाता है और जरूरतमंदों को भोजन कराया जाता है।
  • उत्तराखंड: इसी समय के आसपास केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं और चारधाम यात्रा का शुभारंभ होता है।

आज के दौर में इस पर्व का मतलब

भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्षय तृतीया हमें याद दिलाती है कि असली समृद्धि सिर्फ पैसे में नहीं है। ज्ञान में निवेश करें, रिश्तों को सींचें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें — ये सब भी उतने ही जरूरी हैं। इस साल गजकेसरी योग के साथ यह दिन और भी ज्यादा संभावनाओं से भरा है।

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