ऑनलाइन आंदोलन से सड़क तक, दिल्ली में 6 जून को शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठाई मांग
नई दिल्ली: जब सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने मई 2026 में बेरोज़गार भारतीय युवाओं को “कॉकरोच” कह दिया, तो शायद उन्होंने सोचा भी नहीं था कि यह टिप्पणी एक आंदोलन की नींव बन जाएगी। बोस्टन यूनिवर्सिटी के 30-वर्षीय छात्र और पूर्व AAP स्वयंसेवक अभिजीत दीपके ने इसी अपमान को ताकत में बदला और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को जन्म दिया। तीन हफ्ते भी नहीं हुए, लाखों फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं और अब यह डिजिटल क्रांति सड़कों पर उतरने को तैयार है।
दीपके ने ऐलान किया है कि वे 6 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेंगे। वहाँ से समर्थकों के साथ मिलकर संसद मार्ग पुलिस थाने जाएंगे और जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। मांग एक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा, जिन पर इस साल एक करोड़ से अधिक छात्रों की परीक्षाओं को तबाह करने की जिम्मेदारी डाली जा रही है।
कैसे शुरू हुआ Cockroach Janta Party आंदोलन?
Cockroach Janta Party (CJP) की शुरुआत मई 2026 में एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी। यह आंदोलन उस समय चर्चा में आया जब बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर व्यापक बहस का विषय बन गई। 16 मई 2026 को शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर लाखों युवाओं तक पहुंच गया।
बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और शिक्षा व्यवस्था की खामियों जैसे मुद्दे इस अभियान के केंद्र में रहे। 30 वर्षीय अभिजीत दिपके, जो पहले राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं, इस डिजिटल आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे हैं।
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एक करोड़ से अधिक छात्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दे
CJP का कहना है कि हाल के महीनों में कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सामने आई समस्याओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।
- NEET-UG 2026 विवाद – देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द करना पड़ा। आरोप लगाए गए कि परीक्षा से पहले प्रसारित एक “गेस पेपर” के कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है और दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।
- CBSE मूल्यांकन विवाद – कई छात्रों और शिक्षकों ने ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया और अंकन संबंधी तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर भी मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस देखने को मिली।
- SSC GD परीक्षा में अव्यवस्था– SSC GD कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान तकनीकी समस्याओं, सर्वर संबंधी दिक्कतों और परीक्षा केंद्रों पर अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आईं, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को परेशानी हुई।
- CUET-UG 2026 में तकनीकी गड़बड़ियां – हाल ही में CUET-UG परीक्षा के दौरान विभिन्न केंद्रों पर सर्वर डाउन होने, लॉगिन समस्याओं और परीक्षा में देरी जैसी शिकायतों ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी।
8 लाख से अधिक हस्ताक्षरों का दावा
CJP द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन याचिका में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है। संगठन का दावा है कि इस अभियान को लाखों लोगों का समर्थन मिला है और याचिका पर 8 लाख से अधिक हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस्तीफे की किसी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है और शिक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस पर कोई बदलाव का संकेत नहीं दिया है।
“शांतिपूर्ण और संवैधानिक आंदोलन होगा” : अभिजीत दिपके
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में अभिजीत दिपके ने युवाओं से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह 6 जून की सुबह दिल्ली पहुंचेंगे और समर्थकों के साथ पहले संसद मार्ग थाना जाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे।
इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। दिपके ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहेगा तथा इसका उद्देश्य जवाबदेही की मांग करना है।
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राजनीतिक बहस भी हुई तेज
परीक्षा विवादों को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म है। विपक्षी नेताओं ने हाल के महीनों में विभिन्न परीक्षाओं के संचालन पर सवाल उठाए हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है.वहीं दूसरी ओर, CJP को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
समर्थकों का मानना है कि यह युवाओं की वास्तविक चिंताओं को सामने ला रहा है, जबकि आलोचक इसके राजनीतिक संबंधों और उद्देश्यों पर सवाल उठा रहे हैं। संगठन का दावा है कि उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने, हैकिंग के प्रयासों और कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है।
डिजिटल आंदोलन की सबसे बड़ी परीक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि 6 जून का प्रदर्शन CJP के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अब तक सोशल मीडिया और ऑनलाइन अभियानों के जरिए चर्चा में रहा यह आंदोलन पहली बार बड़े स्तर पर जमीनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेगा।
युवा राजनीति और डिजिटल एक्टिविज्म के इस दौर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऑनलाइन समर्थन वास्तविक जनभागीदारी में बदल पाएगा? यदि प्रशासन से अनुमति मिलती है, तो 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
आयोजकों ने छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने की अपील की है। देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर बढ़ती बहस के बीच यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि लाखों छात्रों की चिंताओं और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बनकर उभर सकता है।
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