20 Years of kabhi Alvida Naa Kehna: करन जौहर की फिल्म ने क्यों छेड़ी थी बहस?

20 Years of kabhi Alvida Naa Kehna: करन जौहर की इस फिल्म ने क्यों छेड़ी थी बहस?

नई दिल्ली: Karan johar की चर्चित फिल्म ‘Kabhi Alvida Naa Kehna’ को रिलीज हुए आज 20 साल पूरे हो गए हैं। 11 अगस्त 2006 को सिनेमाघरों में आई इस फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन और प्रीति जिंटा जैसे बड़े सितारे नजर आए थे।

फिल्म उस दौर में इसलिए खास रही क्योंकि इसने शादी, प्यार, अकेलेपन और रिश्तों में आने वाली परेशानियों को ऐसे तरीके से दिखाया, जिस पर दर्शकों के बीच लंबी बहस चली।

Karan की फिल्मों की पहचान आमतौर पर प्यार, परिवार और रिश्तों की खूबसूरत कहानियों से रही है। लेकिन ‘Kabhi Alvida Naa Kehna’ इस मामले में थोड़ी अलग थी।

फिल्म ने यह सवाल उठाया कि क्या सिर्फ शादीशुदा होना किसी रिश्ते को खुशहाल बना देता है? अगर दो लोग अपनी शादी में खुश नहीं हैं और उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति में अपना भावनात्मक साथी मिल जाता है, तो क्या उसे सिर्फ गलत ही माना जाना चाहिए? फिल्म ने इन सवालों के आसान जवाब देने के बजाय दर्शकों को सोचने के लिए छोड़ दिया था।

करण जौहर ने सुनाए प्रीव्यू शो का दिलचस्प किस्सा

फिल्म के 20 साल पूरे होने पर करण जौहर ने इससे जुड़ी एक पुरानी घटना को याद किया है। यह किस्सा उस समय का है जब फिल्म रिलीज से ठीक पहले पेड प्रीव्यू के लिए दर्शकों को दिखाई गई थी।

Karan Johar उस स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों के बीच चुपचाप बैठे थे। उनके पीछे एक मध्यम उम्र का पारंपरिक जोड़ा बैठा था। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, करण यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि दर्शकों को उनकी कहानी कैसी लग रही है।

फिल्म में एक ऐसा सीन आता है, जब देव और माया अपने रिश्ते की सीमाओं को पार कर जाते हैं। इस सीन के दौरान महिला के हाथ से पॉपकॉर्न गिर गया। वहीं उनके साथ बैठे पति ने गुजराती में कुछ ऐसा कहा जिसका मतलब था कि यह शायद कोई सपना होगा।

लेकिन जब उन्हें समझ आया कि फिल्म में दिखाया गया यह सीन सपना नहीं बल्कि कहानी का हिस्सा है, तो उनका रिएक्शन काफी अलग था। करण के मुताबिक, वह जोड़ा फिल्म बीच में ही छोड़कर चला गया।

करण जौहर के लिए यह पल काफी परेशान करने वाला था। उस समय उनके मन में यह सवाल आया कि क्या दर्शक इस फिल्म की कहानी को स्वीकार कर पाएंगे?

क्या थी ‘Kabhi Alvida Naa Kehna’ की कहानी?

फिल्म की कहानी देव सरन और माया तलवार के इर्द-गिर्द घूमती है। देव की शादी रिया से हुई है, जबकि माया ऋषि की पत्नी है। दोनों अपनी-अपनी शादी में होने के बावजूद पूरी तरह खुश नहीं हैं।

देव एक हादसे के बाद माया से मिलता है। शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता भावनात्मक जुड़ाव में बदल जाता है।

दोनों को लगता है कि उनकी शादी में वह अपनापन और समझ नहीं है जिसकी उन्हें तलाश है। यही भावनात्मक दूरी उन्हें एक-दूसरे के करीब ले आती है।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि उसने रिश्तों को सिर्फ अच्छे और बुरे के नजरिए से नहीं देखा। कहानी में हर किरदार की अपनी परेशानी और अपना नजरिया था।

शाहरुख और रानी की जोड़ी ने छोड़ी अलग छाप

‘Kabhi Alvida Naa Kehna’ में शाहरुख खान ने देव सरन का किरदार निभाया था। उनका किरदार एक सफल स्पोर्ट्समैन होने के बावजूद अपनी जिंदगी और शादी से खुश नहीं था।

रानी मुखर्जी ने माया का किरदार निभाया, जो शादी के बाद भी भावनात्मक रूप से खुद को अकेला महसूस करती है। वहीं अभिषेक बच्चन ने ऋषि तलवार और प्रीति जिंटा ने रिया सरन का किरदार निभाया।

दोनों ही किरदार कहानी में बेहद महत्वपूर्ण थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन और किरण खेर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।

फिल्म ने शादी और बेवफाई पर छेड़ दी थी बहस

फिल्म की रिलीज के समय सबसे ज्यादा चर्चा इसके विषय को लेकर हुई थी। उस दौर में मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में शादी के बाहर किसी रिश्ते को इतनी गंभीरता से दिखाना आम नहीं था।

कई लोगों ने फिल्म की आलोचना की और कहा कि यह बेवफाई को सही ठहराने की कोशिश करती है। दूसरी तरफ कुछ दर्शकों ने इसे रिश्तों की जटिलता को समझने वाली फिल्म बताया।

यही वजह थी कि ‘कभी अलविदा ना कहना’ सिर्फ एक फिल्म नहीं रही, बल्कि रिलीज के बाद लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही।

फिल्म का संगीत भी रहा यादगार

फिल्म की कहानी के साथ इसका संगीत भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। शंकर-एहसान-लॉय ने फिल्म का संगीत तैयार किया था, जबकि जावेद अख्तर ने गीत लिखे थे।

‘तुम्ही देखो ना’, ‘कभी अलविदा ना कहना’, ‘मित्रा’ और ‘रॉक एन रोल सोनिए’ जैसे गानों ने फिल्म को अलग पहचान दी।

फिल्म के गानों में रोमांस के साथ-साथ रिश्तों की उलझन और भावनाओं को भी जगह मिली थी। यही कारण है कि रिलीज के इतने साल बाद भी इसके कई गाने लोगों की प्लेलिस्ट में सुनाई देते हैं।

बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने किया अच्छा प्रदर्शन

विवादों के बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 130 करोड़ की कमाई की। फिल्म ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अच्छा कारोबार किया।

रिलीज के समय इसे लेकर काफी चर्चा थी और शाहरुख खान की लोकप्रियता का भी फिल्म को फायदा मिला। बड़े बजट, स्टारकास्ट और विदेशी लोकेशन ने फिल्म को उस समय की बड़ी फिल्मों में शामिल किया।

हालांकि फिल्म को हर दर्शक से एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं मिली। कुछ लोगों को इसकी कहानी पसंद आई, जबकि कुछ दर्शकों को फिल्म का विषय और किरदारों के फैसले असहज लगे।

20 साल बाद Karan Johar की सोच भी बदली

दो दशक बाद खुद करण जौहर ने भी फिल्म को लेकर अपनी कमियां स्वीकार की हैं। उन्होंने माना कि फिल्म में कुछ चीजें जरूरत से ज्यादा थीं। इसका स्केल बड़ा था और कुछ जगहों पर गाने भी कहानी को लंबा करते नजर आए।

लेकिन करण का मानना रहा है कि फिल्म की भावनाएं सच्ची थीं और कहानी के पीछे की सोच गलत नहीं थी।

यही बात इस फिल्म को आज भी खास बनाती है। भले ही फिल्म में कुछ कमियां हों, लेकिन उसने एक ऐसे विषय पर बात की, जिस पर उस समय खुलकर चर्चा करना आसान नहीं था।

20 साल बाद भी क्यों याद है ‘Kabhi Alvida Naa Kehna’?

20 साल का लंबा वक्त बीतने के बावजूद फिल्म का नाम आज भी चर्चा में आ जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी कहानी है।

फिल्म ने दर्शकों से यह सवाल पूछा था कि क्या हर शादी सफल होती है? क्या प्यार हमेशा सही समय पर सही इंसान से ही होता है? और अगर किसी रिश्ते में दो लोग खुश नहीं हैं, तो क्या सिर्फ समाज के डर से उस रिश्ते को निभाते रहना चाहिए?

इन सवालों के जवाब फिल्म ने सीधे तौर पर नहीं दिए। शायद यही इसकी सबसे बड़ी ताकत थी।

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आज भी रिश्तों पर सोचने को मजबूर करती है फिल्म

‘Kabhi Alvida Naa Kehna’ की 20वीं सालगिरह सिर्फ एक फिल्म की रिलीज की याद नहीं है। यह उस कहानी को फिर से देखने का मौका है, जिसने 2006 में दर्शकों को असहज सवालों के सामने खड़ा कर दिया था।

करण जौहर की यह फिल्म भले ही उस समय विवादों में रही हो, लेकिन दो दशक बाद भी इसकी चर्चा खत्म नहीं हुई है। शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन और प्रीति जिंटा के किरदार आज भी लोगों को याद हैं।

20 साल बाद भी ‘Kabhi Alvida Naa Kehna’ यही याद दिलाती है कि रिश्ते हमेशा काले या सफेद नहीं होते। उनके बीच कई ऐसी भावनाएं होती हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं होता।

शायद यही वजह है कि रिलीज के दो दशक बाद भी यह फिल्म दर्शकों को अपनी तरफ खींचती है और रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू कर देती है।

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