नौसेना अधिकारी विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल ने दुख की घड़ी में भी दिखाई अद्भुत संयम और साहस, मुसलमानों और कश्मीरियों के खिलाफ नफरत फैलाने का किया विरोध
2 मई 2025, नई दिल्ली
पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी, हिमांशी नरवाल, ने अपने दर्द और दुख को नफरत में नहीं, बल्कि एकता और इंसानियत के संदेश में बदल दिया है। उनका संदेश आज पूरे देश में आशा, सहिष्णुता और शांति की आवाज बन गया है।
मीडिया से बातचीत में हिमांशी ने साफ़ शब्दों में कहा:
“मैं चाहती हूं पूरा देश उनके लिए प्रार्थना करे, वो जहां भी हैं खुश रहें। मैं किसी के प्रति कोई नफरत नहीं चाहती। मुसलमानों या कश्मीरियों के खिलाफ नफरत फैल रही है, हम ऐसा नहीं चाहते। हम शांति चाहते हैं। बेशक हमें न्याय चाहिए, जिन लोगों ने उनके साथ गलत किया है उन्हें सजा मिलनी चाहिए।”
उनके इस साहसिक और सशक्त बयान ने न सिर्फ़ लोगों के दिलों को छू लिया, बल्कि देश की एक अनुभवी नौसेना परिवार सदस्य, ललिता रामदास (पहली और तेरहवीं नौसेना प्रमुख की बेटी और पत्नी) को भी प्रेरित किया।
ललिता जी ने हिमांशी को एक व्यक्तिगत पत्र में लिखा:
“तुम सही मायनों में एक फौजी पत्नी हो — सेवा, संविधान और हमारे धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति सच्ची। तुम्हारी बातों में जो ताकत, संयम और संवेदनशीलता है, वह आज के समय में बहुत ज़रूरी है। तुमने पूरे देश की सोचने वाली जनता की भावनाओं को आवाज़ दी है।”
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ललिता रामदास ने हिमांशी को “नारी शक्ति” और “भारतीय नौसेना की असली प्रतिनिधि” बताया और उनके संदेश को पूरे देश में फैलाने की अपील की।
हिमांशी का वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर लाखों लोगों द्वारा साझा किया जा चुका है। सेवानिवृत्त और वर्तमान सैन्य अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, और आम नागरिक उनके संयम और साहस को सलाम कर रहे हैं।
आज जब संवेदनाओं को नफरत में बदलना आसान होता जा रहा है, हिमांशी नरवाल ने यह दिखा दिया कि एक सैनिक की पत्नी होने का असली मतलब क्या होता है — सेवा, शांति और न्याय के लिए खड़ा होना।
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