पहलगाम और दिल्ली हमलों के तार मिले जुड़े — आतंकियों की साझा साजिश बेनकाब
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण कार बम विस्फोट ने देश की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस नृशंस आतंकी हमले में अब तक कम से कम नौ लोगों की दुखद मौत हो चुकी है और दर्जनों अन्य घायल हैं, जिससे पूरा देश सदमे में है। यह हमला देश की राजधानी के एक सबसे भीड़भाड़ वाले और ऐतिहासिक क्षेत्र को निशाना बनाकर अधिकतम दहशत और हताहतों को जन्म देने की सोची-समझी साज़िश थी। विस्फोट शाम के व्यस्त समय में हुआ, जब मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक हुंडई i20 कार में धमाका हुआ, जिसके बाद तत्काल दिल्ली में अभूतपूर्व ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया गया और सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।
जाँच एजेंसियों ने इस हमले को सीधे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) / ISIS द्वारा प्रायोजित एक बड़े और खतरनाक आतंकी नेटवर्क से जोड़ा है। जाँच में खुलासा हुआ है कि इस हमले को अंजाम देने वाला व्यक्ति डॉ. उमर मोहम्मद था, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला था और पेशे से सहायक प्रोफेसर था। पुलिस सूत्रों का मानना है कि डॉ. उमर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कार में फिदायीन (आत्मघाती) हमला किया, और उसकी कार में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भरी हुई थी। उसकी पहचान और कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर ही सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
विस्फोट से कुछ ही घंटे पहले, सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा (फरीदाबाद), उत्तर प्रदेश (सहारनपुर) और गुजरात (अहमदाबाद) में एक अभूतपूर्व, बहु-राज्यीय छापेमारी की थी, जिसके दौरान इस आतंकी मॉड्यूल के कई प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इन गिरफ्तारियों में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पकड़े गए लोग उच्च शिक्षित पेशेवर थे, जिन्हें अब ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकवादी कहा जा रहा है।
फरीदाबाद में एक किराए के मकान से गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल शकील गनई के पास से मिली सामग्री ने देश को हिलाकर रख दिया। एजेंसियों ने उसके ठिकाने से 2,900 किलोग्राम से अधिक बम बनाने की सामग्री, जिसमें मुख्य रूप से अमोनियम नाइट्रेट शामिल था, के साथ-साथ हथियार और इलेक्ट्रॉनिक टाइमर भी जब्त किए। इस विस्फोटक की मात्रा इतनी अधिक थी कि इसका उपयोग भारत के कई प्रमुख शहरों में एक साथ हमले करने के लिए किया जा सकता था। अन्य गिरफ्तारियों में सहारनपुर से डॉ. आदिल अहमद राठर और गुजरात से डॉ. अहमद मोहियुद्दीन सैयद शामिल थे, जिनके पास से एके-47 राइफल और पिस्तौलें बरामद हुईं। जाँच एजेंसियों का मानना है कि ये आतंकी संगठन के ‘स्लीपर सेल’ के रूप में काम कर रहे थे और इन्हें सीधे पाकिस्तान स्थित ISI आकाओं और ISIS-खोरासन प्रांत के हैंडलर्स से निर्देश मिल रहे थे।
इस आतंकी नेटवर्क का पैटर्न धार्मिक ध्रुवीकरण और बड़ी दहशत फैलाने पर केंद्रित था। इस घटना के तार जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमले से भी जुड़ते हैं, जहाँ हमलावरों ने हिन्दू तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर चुन-चुनकर निशाना बनाया था, जिससे 26 निर्दोष लोग मारे गए थे। पहलगाम और दिल्ली, दोनों ही हमलों ने सिद्ध कर दिया है कि आतंकियों का उद्देश्य धार्मिक विद्वेष और सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देना है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत विस्फोट स्थल और अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराया और राष्ट्र को आश्वासन दिया कि साजिश में शामिल हर व्यक्ति को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सख्त लहजे में कहा कि इस जघन्य कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों को “उनके अंजाम तक पहुँचाया जाएगा।”
एक तरफ जहाँ सुरक्षाबल चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं, वहीं इस त्रासदी ने मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। जिन परिवारों ने अपने सदस्य खो दिए हैं, वे गहरे भावनात्मक आघात और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। कई परिवार अभी भी अपने लापता परिजनों की तलाश में हैं, जो चाँदनी चौक या लाल किले के आसपास काम के सिलसिले में आए थे। सरकार ने पीड़ितों के परिवारों को हर संभव सहायता देने और घायलों के मुफ्त इलाज के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। यह हमला भारत में आतंकवाद के एक नए और अधिक खतरनाक चरण की ओर इशारा करता है, जहाँ उच्च शिक्षित, ‘व्हाइट-कॉलर’ पेशेवर देश को अंदर से अस्थिर करने की साज़िश में लगे हुए हैं।
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