“दलित होने की सज़ा मिली मेरे पति को” — c के IPS वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या पर देश में उबाल

“दलित होने की सज़ा मिली मेरे पति को” — c के IPS वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या पर देश में उबाल

राहुल गांधी ने कहा — “यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, करोड़ों दलितों की लड़ाई है।”

हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पुरन कुमार की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह घटना भारत के संस्थानों में फैले गहरे जातीय भेदभाव की भयावह तस्वीर पेश करती है। राहुल गांधी सोमवार को चंडीगढ़ में दिवंगत अधिकारी के परिवार से मिलने पहुंचे। उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा भी मौजूद थीं। परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वाई. पुरन कुमार की मौत ने देश के करोड़ों दलित भाइयों-बहनों को एक दर्दनाक संदेश दिया है — कि चाहे कोई कितना भी सफल, बुद्धिमान या सक्षम क्यों न हो, अगर वह दलित है, तो उसे भी कुचला जा सकता है और अपमानित किया जा सकता है।

“यह सिर्फ एक परिवार की बात नहीं है,” राहुल गांधी ने कहा। “यह एक प्रतीक है उस व्यवस्था का जो अब भी दलितों को समान अधिकार नहीं देती। यह गलत संदेश पूरे देश के दलित समाज तक जा रहा है कि चाहे आप कितनी भी मेहनत करें, व्यवस्था आपको कुचल सकती है। यह हमारे लिए अस्वीकार्य है।”

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अपील की कि वे तुरंत उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें जिनके नाम वाई. पुरन कुमार के सुसाइड नोट में दर्ज हैं। इस नोट में उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों पर जातीय भेदभाव और पेशेवर अपमान का आरोप लगाया था।

2001 बैच के यह अधिकारी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) के पद पर कार्यरत थे। 7 अक्टूबर को उन्होंने पंचकूला स्थित अपने आवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वे अपनी पत्नी डॉ. अमनीत पी. कुमार, जो स्वयं एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, और दो बेटियों के साथ रहते थे। परिवार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, वे पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं देंगे।

अपनी शिकायत में डॉ. अमनीत कुमार ने कहा कि उनके पति को “खुलेआम जातीय भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और अन्याय” का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस घटना को “सामान्य आत्महत्या नहीं बल्कि व्यवस्थित उत्पीड़न का परिणाम” बताया।

“यह कोई साधारण आत्महत्या नहीं है,” उन्होंने कहा। “मेरे पति को वर्षों से जातीय आधार पर प्रताड़ित किया गया। वरिष्ठ और प्रभावशाली अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। अंततः उन्हें इस कदर दबाव में ला दिया गया कि उनके पास अपनी जान लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।”

कुमार के सुसाइड नोट और शिकायत में जिन दस अधिकारियों के नाम शामिल हैं, उनमें हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर, जिन्हें अब अवकाश पर भेज दिया गया है, और रोहतक पुलिस प्रमुख नरेंद्र बिजारनिया, जिनका तबादला कर दिया गया है, प्रमुख हैं।

इस घटना के बाद देशभर में जातीय भेदभाव के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कई दलित संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने भी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कठोर कार्रवाई की मांग की है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की यह संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह इस मामले में न्याय सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा, “हमारा संविधान सभी नागरिकों को समानता और सम्मान का अधिकार देता है। अगर एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को इतनी अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, तो आम दलित नागरिकों की स्थिति की कल्पना कीजिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज की गरिमा और अस्तित्व की लड़ाई है। “हम इस परिवार के साथ खड़े हैं, और हर उस दलित के साथ जो अन्याय का सामना कर रहा है,” गांधी ने कहा। इस घटना ने न केवल हरियाणा पुलिस तंत्र को हिला दिया है बल्कि पूरे देश में जातीय भेदभाव और संस्थागत उत्पीड़न पर नए सिरे से चर्चा छेड़ दी है। वाई. पुरन कुमार जैसे ईमानदार और सक्षम अधिकारी की मौत यह याद दिलाती है कि भारत में जाति आधारित अन्याय के खिलाफ लड़ाई अभी अधूरी है।

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