लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत में खास उत्साह के साथ मनाया जाता है। नई फसल, प्रकृति के प्रति आभार और सर्दियों के अंत का प्रतीक मानी जाने वाली लोहड़ी की परंपराओं और महत्व के बारे में जानिए।
लोहड़ी का त्योहार उत्तर भारत, खासकर पंजाब में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल जश्न का मौका ही नहीं, बल्कि नई फसल की कटाई और प्रकृति के प्रति आभार जताने का प्रतीक भी है। हर साल मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले मनाई जाने वाली लोहड़ी सर्दियों के अंत और गर्म दिनों की शुरुआत का संकेत देती है।
लोहड़ी के दिन लोग खुले मैदान या घर के आंगन में आग जलाकर उसके चारों ओर इकट्ठा होते हैं। पारंपरिक लोकगीतों और भांगड़ा-गिद्धा के बीच आग में मूंगफली, गजक, रेवड़ी और तिल अर्पित किए जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण भी जुड़े हुए हैं।
नई फसल का पहला अर्पण
लोहड़ी को किसानों का पर्व माना जाता है। इस दिन किसान अपनी नई फसल का पहला हिस्सा अग्नि देव को समर्पित करते हैं। मूंगफली, तिल और गुड़ जैसी चीजें फसल की अच्छी पैदावार के लिए ईश्वर का धन्यवाद करने का प्रतीक हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से आने वाले समय में खेत-खलिहान हरे-भरे रहते हैं।
सूर्य देव और अग्नि देव की आराधना
लोहड़ी, मकर संक्रांति से एक रात पहले मनाई जाती है, जब सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं। यह समय सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संकेत देता है। आग में चीजें अर्पित कर लोग सूर्य देव और अग्नि देव से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
सर्दियों के मौसम में मूंगफली, तिल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं। इन्हें खाने और अग्नि में अर्पित करने की परंपरा मौसम के अनुसार शरीर को संतुलित रखने से भी जुड़ी मानी जाती है। इसके अलावा, अग्नि में डाली गई इन चीजों से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करने में सहायक माना जाता है।
“ईशर आए, दलिद्दर जाए” का संदेश
लोहड़ी के दौरान लोग आग में अर्पण करते समय कहते हैं-“ईशर आए, दलिद्दर जाए”, जिसका अर्थ है कि घर में समृद्धि आए और गरीबी दूर रहे। इसके बाद मूंगफली और रेवड़ी को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, जिससे आपसी मेल-जोल और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति, मेहनत और सामूहिक खुशी का उत्सव है, जो लोगों को परंपराओं से जोड़ते हुए नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है।
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