जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आरडीवीवी प्रकरण में विरोधाभासी रिपोर्टों पर जताई नाराज़गी, जांच स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की दी चेतावनी
20 मई 2025, नई दिल्ली
जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) की एक महिला कर्मचारी ने कुलपति प्रो. राजेश वर्मा पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। इस मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर नाराज़गी जताई है। कोर्ट को दी गई रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि घटना वाले दिन कुलपति के ऑफिस में लगा कैमरा चल रहा था या नहीं।
न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने जबलपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि मंगलवार तक एक नई रिपोर्ट पेश करें। इस रिपोर्ट में ज़ब्त दस्तावेज़, गवाहों के बयान और बाकी ज़रूरी जानकारी होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर रिपोर्ट फिर से अधूरी या गलत निकली, तो जांच किसी और स्वतंत्र एजेंसी को दी जा सकती है।
पहले कोर्ट को बताया गया था कि कुलपति ऑफिस का कैमरा उस दिन खराब था, इसलिए फुटेज नहीं मिल पाई। लेकिन पहले प्रशासन ने कहा था कि फुटेज सुरक्षित है। इन दो विरोधाभासी बातों के बाद कोर्ट ने तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं, जिससे ये साफ हो सके कि कैमरा कब लगाया गया था, कब खराब हुआ और उस दिन क्यों बंद था।
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कोर्ट ने RDVV के रजिस्ट्रार से हलफनामा (शपथपत्र) देने को कहा है कि फुटेज को क्यों नहीं सुरक्षित रखा गया। साथ ही, कलेक्टर को भी एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है।
महिला अधिकारी की शिकायत पर पहले राज्य महिला आयोग और उच्च शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जांच में देरी होने पर पीड़िता ने हाई कोर्ट का रुख किया। अब कोर्ट की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी जिसमें संशोधित रिपोर्ट मांगी गई है।
यह मामला बताता है कि यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मामलों में सबूतों की अहम भूमिका होती है। अदालत पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपना रही है, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
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