भोपाल के पास मौजूद 5 खूबसूरत वाटरफॉल के बारे में जानें। यहां देखें दूरी, घूमने का सही समय, ट्रेकिंग, गतिविधियां और मानसून में जरूरी सुरक्षा टिप्स
नई दिल्ली/भोपाल:भोपाल अपनी खूबसूरत झीलों, हरियाली और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन बारिश का मौसम आते ही शहर के आसपास का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। मानसून की बारिश के बाद जंगल, पहाड़ और चट्टानी इलाके हरे-भरे हो जाते हैं और कई मौसमी झरने अपने पूरे रूप में दिखाई देने लगते हैं।
भोपाल से करीब 100 किलोमीटर के दायरे में ऐसे कई वाटरफॉल हैं, जहां आप एक दिन की ट्रिप या वीकेंड गेटअवे प्लान कर सकते हैं। कुछ जगहों पर पहुंचना आसान है, जबकि कुछ झरनों तक पहुंचने के लिए जंगल और पहाड़ी रास्तों पर ट्रेक करना पड़ता है।
इनमें से ज्यादातर झरने बारिश के पानी पर निर्भर हैं। इसलिए इनका जलस्तर और बहाव पूरे साल एक जैसा नहीं रहता। जुलाई से सितंबर के बीच मानसून के दौरान यहां पानी का बहाव सबसे अच्छा देखने को मिलता है। अक्टूबर में बारिश कम होने के बाद ट्रेकिंग करना थोड़ा आसान हो सकता है।
हालांकि, मानसून में झरनों की खूबसूरती के साथ खतरा भी बढ़ जाता है। अचानक बढ़ता पानी, तेज बहाव, फिसलन भरी चट्टानें और गहरे प्राकृतिक कुंड दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए किसी भी झरने पर जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की गाइडलाइन और मौसम की स्थिति जरूर जांच लें।
अगर आप इस मानसून भोपाल के आसपास घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये पांच वाटरफॉल आपकी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।
1. अमरगढ़ वाटरफॉल: एडवेंचर और ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए शानदार जगह
दूरी: भोपाल से करीब 60–70 किलोमीटर। शाहगंज होते हुए नर्मदापुरम की ओर जाने वाले रास्ते से यहां पहुंचा जा सकता है। सड़क से लगभग 1.5 से 2 घंटे का समय लग सकता है।
अमरगढ़ वाटरफॉल उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है, जिन्हें घूमने के साथ ट्रेकिंग और एडवेंचर भी पसंद है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको पहले शाहगंज रूट पर स्थित शुरुआती स्थान तक जाना होता है। इसके बाद जंगल के रास्ते कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ सकता है।
ट्रेक की दूरी चुने गए रास्ते के हिसाब से बदल सकती है। रास्ते में छोटी धाराएं पार करनी पड़ सकती हैं और कई जगह चट्टानी तथा कीचड़ वाले रास्ते मिलते हैं। मानसून के दौरान यह ट्रेक और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
झरने की ऊंचाई अलग-अलग स्रोतों में अलग बताई गई है, लेकिन स्थानीय पर्यटकों के अनुसार यह करीब 150 फीट के आसपास हो सकती है। घने जंगल और हरियाली के बीच गिरता पानी इस जगह को बेहद खूबसूरत बना देता है।
अमरगढ़ के आसपास चट्टानों पर पुराने शैलचित्रों और पक्षियों को देखने का मौका भी मिल सकता है। यह इलाका रतापानी के वन क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए जंगल में घूमते समय सावधानी रखना जरूरी है।
अमरगढ़ जाने का सही समय
जुलाई से सितंबर के बीच यहां जाना सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान बारिश के कारण झरने में पानी का बहाव बढ़ जाता है और आसपास का जंगल भी हरा-भरा नजर आता है।
यहां क्या कर सकते हैं?
- ट्रेकिंग
- नेचर फोटोग्राफी
- मानसून का आनंद
- बर्डवॉचिंग
- जंगल और चट्टानी इलाके की सैर

जरूरी सावधानी
बारिश के दौरान रास्ता काफी फिसलन भरा हो सकता है। इसलिए अच्छे ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज पहनें। अकेले जाने के बजाय ग्रुप के साथ जाना बेहतर है और कोशिश करें कि ट्रेक दिन की रोशनी में ही पूरा हो।
रतापानी क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी रहती है। इसलिए निर्धारित रास्तों से बाहर न जाएं और स्थानीय गाइड या वन विभाग के निर्देशों का पालन करें।
2. महादेवपानी वाटरफॉल: भोपाल के पास आसान और लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट
दूरी: भोपाल से करीब 20–30 किलोमीटर। यह रायसेन रोड की तरफ स्थित है और आसपास के अन्य झरनों की तुलना में शहर के काफी करीब है।
महादेवपानी वाटरफॉल भोपाल के आसपास सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट में से एक है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह शहर से ज्यादा दूर नहीं है और यहां पहुंचने के लिए बहुत लंबी ट्रेकिंग नहीं करनी पड़ती।
झरने के पास भगवान शिव को समर्पित एक छोटा मंदिर भी है। इसी वजह से यहां पर्यटकों के साथ श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। आसपास हरियाली और चट्टानों के बीच पानी का बहाव मानसून के दौरान काफी आकर्षक दिखाई देता है।
यहां प्राकृतिक कुंड भी बनते हैं, लेकिन इनमें उतरना जोखिम भरा हो सकता है। तेज बारिश के दौरान आसपास के इलाकों से अचानक पानी आने पर जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
महादेवपानी जाने का सही समय
मानसून के दौरान यहां झरने का सबसे खूबसूरत रूप देखने को मिलता है। बारिश के बाद मौसम सुहावना होने पर यह जगह पिकनिक के लिए भी लोकप्रिय रहती है।
यहां क्या कर सकते हैं?
- छोटी नेचर वॉक
- फोटोग्राफी
- पिकनिक
- हल्की ट्रेकिंग
- मंदिर और आसपास के क्षेत्र की सैर

सुरक्षा का रखें ध्यान
बारिश के दौरान झरने के प्राकृतिक कुंड में न उतरें। तेज बहाव वाली धाराओं को पार करने से भी बचें। बच्चों पर खास नजर रखें।
अगर स्थानीय प्रशासन ने बारिश या जलस्तर को देखते हुए कोई प्रतिबंध लगाया हो, तो उसे नजरअंदाज न करें।
3. दिगंबर वाटरफॉल: शाहगंज के पास एक शांत और प्राकृतिक जगह
दूरी: भोपाल से लगभग 90–100 किलोमीटर। यह सीहोर जिले के शाहगंज क्षेत्र में रतापानी के वन क्षेत्र के आसपास स्थित है।
अगर आप भीड़ से दूर किसी शांत और प्राकृतिक जगह की तलाश कर रहे हैं, तो दिगंबर वाटरफॉल एक विकल्प हो सकता है। अमरगढ़ की तुलना में यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है।
यहां पहुंचने के रास्ते का अंतिम हिस्सा कुछ जगहों पर खराब या ऊबड़-खाबड़ हो सकता है। इसलिए मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए वाहन का चुनाव करना बेहतर है।
झरने तक पहुंचने के लिए जंगल और चट्टानी इलाके से होकर पैदल चलना पड़ सकता है। बारिश के दौरान यहां हरियाली बढ़ जाती है और चट्टानों के बीच बहता पानी शानदार दृश्य बनाता है।
झरने की ऊंचाई अलग-अलग जगहों पर करीब 80–90 फीट बताई जाती है। हालांकि, पानी का बहाव और आसपास की स्थिति मौसम के अनुसार बदल सकती है।
दिगंबर वाटरफॉल जाने का सही समय
जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां जाना बेहतर माना जाता है। मानसून के बाद भी आसपास का क्षेत्र कुछ समय तक हरा-भरा रहता है।
यहां क्या कर सकते हैं?
- फोटोग्राफी
- ट्रेकिंग
- जंगल की सैर
- पिकनिक
- मानसून के प्राकृतिक नजारे देखना

सुरक्षा सबसे जरूरी
दिगंबर वाटरफॉल पर डूबने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सितंबर 2024 में भोपाल के एक डॉक्टर की यहां डूबने से मौत की खबर सामने आई थी। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और सुरक्षा निर्देशों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।
अनजान प्राकृतिक कुंडों में तैरने से बचें। गीली चट्टानों पर चढ़ने की कोशिश न करें और तेज बहाव वाले पानी में बिल्कुल न जाएं।
जंगल क्षेत्र होने के कारण अकेले घूमने के बजाय ग्रुप में जाना बेहतर है। कोशिश करें कि शाम होने से पहले वापस लौट आएं।
4. देलावाड़ी वाटरफॉल: झरने के साथ जंगल और कैंपिंग का मजा
दूरी: भोपाल से करीब 50–70 किलोमीटर। यह सीहोर-रायसेन क्षेत्र की तरफ रतापानी के वन क्षेत्र के आसपास स्थित है।
देलावाड़ी उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो सिर्फ झरना देखने के बजाय पूरा नेचर एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं। यहां जंगल, ट्रेकिंग, कैंपिंग और पक्षियों को देखने का मौका मिलता है।
भोपाल से यहां पहुंचने के लिए रेहटी रोड की तरफ जाना पड़ता है। इसके बाद जंगल क्षेत्र में पैदल रास्ता तय करना पड़ सकता है।
मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरने का बहाव इस जगह को खास बना देते हैं। आसपास का क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए भी आकर्षक है।
देलावाड़ी के आसपास भदभदा फॉल्स, कैरी महादेव, सनसेट पॉइंट और गिन्नौरगढ़ किले जैसे स्थानों को भी ट्रिप में शामिल किया जा सकता है।
देलावाड़ी जाने का सही समय
जुलाई से सितंबर के बीच यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर रहता है। अक्टूबर में मौसम थोड़ा बेहतर होने के कारण जंगल ट्रेकिंग भी अधिक आरामदायक हो सकती है।
यहां क्या कर सकते हैं?
- जंगल ट्रेकिंग
- नेचर वॉक
- बर्डवॉचिंग
- कैंपिंग
- फोटोग्राफी
- आसपास के झरनों और व्यू पॉइंट्स की सैर

जाने से पहले यह जरूर जानें
देलावाड़ी वन क्षेत्र के आसपास स्थित है। इसलिए यात्रा से पहले प्रवेश नियम और स्थानीय वन विभाग की अनुमति से जुड़ी जानकारी जरूर जांच लें।
वन क्षेत्र में प्लास्टिक और कचरा फैलाने से बचें। खाने-पीने का सामान खुले में न रखें क्योंकि आसपास बंदर और अन्य वन्यजीव दिखाई दे सकते हैं।
5. हथाईखेड़ा वाटरफॉल और केरवा: कम समय में घूमने का आसान विकल्प
दूरी: भोपाल से करीब 12–15 किलोमीटर। यह इस लिस्ट में शहर के सबसे नजदीकी विकल्पों में शामिल है। केरवा डैम भी आसपास स्थित है।
अगर आपके पास पूरा दिन नहीं है और आप मानसून में जल्दी से किसी प्राकृतिक जगह पर जाना चाहते हैं, तो हथाईखेड़ा और केरवा क्षेत्र अच्छा विकल्प हो सकता है।
यहां के झरने अमरगढ़ या दिगंबर की तरह बड़े नहीं हैं, लेकिन शहर से नजदीकी और आसान पहुंच इसकी खासियत है। बारिश के दौरान छोटी धाराएं और झरने आसपास की हरियाली को और खूबसूरत बना देते हैं।
केरवा क्षेत्र में डैम, नेचर ट्रेल्स और अन्य आउटडोर गतिविधियों का विकल्प भी मिलता है। भारी बारिश के दौरान डैम के स्पिलवे से बहता पानी भी देखने लायक हो सकता है।
हथाईखेड़ा और केरवा जाने का सही समय
मानसून इस क्षेत्र की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है। हालांकि, केरवा क्षेत्र में मौसम के अनुसार अन्य महीनों में भी नेचर वॉक और आउटडोर गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।
यहां क्या कर सकते हैं?
- छोटी हाइकिंग
- फोटोग्राफी
- फैमिली आउटिंग
- नेचर वॉक
- केरवा डैम का नजारा
- बर्डवॉचिंग
- उपलब्ध एडवेंचर एक्टिविटीज

पानी के पास रहें सावधान
आसानी से पहुंचने वाली जगहों पर भी पानी को हल्के में न लें। डैम, स्पिलवे और बारिश के दौरान बहने वाली धाराओं के आसपास जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
गहरे पानी में न उतरें और चेतावनी वाले स्थानों पर जाने से बचें।
भोपाल के पास झरने घूमने का सबसे अच्छा समय
भोपाल के आसपास मौजूद ज्यादातर मौसमी झरनों को देखने के लिए जुलाई से सितंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान बारिश के कारण झरनों में पानी का बहाव बढ़ जाता है और आसपास के जंगल हरे-भरे हो जाते हैं।
अगर आप ज्यादा बारिश से बचना चाहते हैं, तो अक्टूबर की शुरुआत भी एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, तब तक कई झरनों में पानी का बहाव कम होना शुरू हो सकता है।
बहुत तेज बारिश के दौरान यात्रा करने से बचें, क्योंकि जंगल के रास्ते, सड़कें और छोटी नदियां या धाराएं अचानक खतरनाक हो सकती हैं।
भोपाल से वाटरफॉल ट्रिप कैसे प्लान करें?
इनमें से ज्यादातर जगहों तक पहुंचने के लिए निजी वाहन सबसे सुविधाजनक विकल्प है। जिन जगहों पर रास्ता खराब या कच्चा हो सकता है, वहां SUV या बेहतर ग्राउंड क्लीयरेंस वाला वाहन उपयोगी हो सकता है।
जंगल क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो सकता है। इसलिए निकलने से पहले ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लेना बेहतर है।
साथ में ये चीजें जरूर रखें:
- पर्याप्त पीने का पानी
- रेनकोट या अन्य बारिश से बचाव का सामान
- अच्छे ग्रिप वाले जूते
- अतिरिक्त कपड़े
- बेसिक फर्स्ट-एड किट
- पार्किंग या एंट्री के लिए कुछ नकद
- पूरी तरह चार्ज मोबाइल फोन
अमरगढ़ और दूसरे कठिन ट्रेक वाले स्थानों पर पहली बार जाने वाले लोग स्थानीय गाइड या किसी भरोसेमंद ट्रेकिंग ग्रुप के साथ जा सकते हैं।
मानसून में वाटरफॉल घूमते समय इन बातों का रखें ध्यान
मानसून में झरनों की खूबसूरती देखते ही बनती है, लेकिन कुछ ही मिनटों में पानी का बहाव खतरनाक हो सकता है।
इसलिए इन नियमों का पालन करें:
- तेज बहाव वाले पानी में न उतरें।
- अनजान प्राकृतिक कुंड में डाइविंग न करें।
- गीली और फिसलन भरी चट्टानों पर न चढ़ें।
- तेज बारिश के दौरान धाराओं को पार करने की कोशिश न करें।
- पुलिस और वन विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
- बैरिकेडिंग या प्रतिबंधित रास्तों को पार न करें।
- दूरदराज के झरनों पर अकेले न जाएं।
- दिन में यात्रा शुरू करें और अंधेरा होने से पहले लौटें।
- बच्चों को गहरे पानी और ऊंची चट्टानों से दूर रखें।
- प्लास्टिक और अन्य कचरा जंगल में न छोड़ें।
वाटरफॉल ट्रिप के साथ इन जगहों को भी करें एक्सप्लोर
अगर आपके पास ज्यादा समय है, तो झरने की यात्रा के साथ आसपास के दूसरे पर्यटन स्थलों को भी शामिल किया जा सकता है।
आप अपनी ट्रिप में इन जगहों को जोड़ सकते हैं:
- रतापानी टाइगर रिजर्व
- भीमबेटका रॉक शेल्टर्स
- केरवा डैम
- हलाली डैम
- सांची
- भोजपुर मंदिर
इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए भीमबेटका खास जगह है। यहां प्रागैतिहासिक शैलाश्रय और प्राचीन शैलचित्र देखने को मिलते हैं।
मानसून के दौरान भोपाल के आसपास के झरने शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय बिताने का शानदार मौका देते हैं। अगर आपको एडवेंचर और लंबी ट्रेकिंग पसंद है, तो अमरगढ़ अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं महादेवपानी कम दूरी में पिकनिक और प्रकृति का आनंद लेने वालों के लिए बेहतर है।
दिगंबर उन लोगों को पसंद आ सकता है जो अपेक्षाकृत शांत और प्राकृतिक जगह तलाश रहे हैं, जबकि देलावाड़ी झरने के साथ जंगल, ट्रेकिंग और कैंपिंग का अनुभव देता है। कम समय में घूमने वालों के लिए हथाईखेड़ा और केरवा क्षेत्र सुविधाजनक विकल्प हैं।
हालांकि, किसी भी मानसूनी झरने की यात्रा से पहले मौसम, सड़क की स्थिति और स्थानीय प्रशासन के निर्देश जरूर जांचें। बारिश के कारण पानी का स्तर और रास्ते कभी भी बदल सकते हैं।
प्रकृति का आनंद लें, लेकिन सुरक्षा से समझौता न करें। स्थानीय नियमों का पालन करें, वन्यजीवों और जंगल का सम्मान करें और अपने साथ लाए कचरे को वापस लेकर जाएं।
