बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की खबरों से भारत में बढ़ी नाराज़गी , अब आईपीएल में भी नज़र आ रही है। 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिज़ुर रहमान को रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा था, लेकिन राजनीतिक विवाद के कारण उन्हें टीम से रिलीज़ करना पड़ा। जानें पूरी ख़बर
दिसंबर 2025 में अबू धाबी में हुई आईपीएल 2026 की नीलामी में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब बांग्लादेश के बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिज़ुर रहमान का नाम आया। कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच जबरदस्त बोली लगी और अंत में केकेआर ने ₹9.20 करोड़ में ‘द फिज़’ को खरीद लिया। यह किसी भी बांग्लादेशी खिलाड़ी के लिए अब तक की सबसे बड़ी आईपीएल बोली थी।
30 वर्षीय मुस्ताफिज़ुर अपनी शानदार डेथ बॉलिंग के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आईपीएल में 60 मैचों में 65 विकेट लिए हैं और उनकी इकॉनमी 8.13 रही है। 2016 में उन्हें इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर भी चुना गया था। हालांकि, क्रिकेट की दुनिया में बड़ा कदम माने जा रहे इस सौदे ने जल्द ही राजनीतिक रूप ले लिया। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा की खबरों के चलते भारत में विरोध बढ़ा और मामला भू-राजनीतिक बहस में बदल गया। आखिरकार 3 जनवरी 2026 को बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर को मुस्ताफिज़ुर रहमान को रिलीज़ करना पड़ा।
क्यों ₹2 करोड़ से ₹9.20 करोड़ तक पहुंचा मुस्ताफिज़ुर का दाम
मुस्ताफिजुर रहमान की बेस प्राइस 2 करोड़ थी, लेकिन नीलामी में उनकी मांग कहीं अधिक हो गई। केकेआर अपनी तेज़ गेंदबाजी को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा था, जिसमें मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सितारों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इस रणनीति के तहत, केकेआर ने आक्रामक बोली लगाई, आईपीएल 2016 से, मुस्ताफिजुर कई फ्रेंचाइज़ियों के लिए खेल चुके हैं और हर जगह अपनी क़ीमत साबित की है।
उल्लेखनीय बात यह है कि इस मिनी-नीलामी में, वह एकमात्र बांग्लादेशी खिलाड़ी थे जिन्हें खरीदार मिला तस्किन अहमद जैसे नाम बिके ही नहीं। तीसरे खिताब की ओर बढ़ने का सपना देख रही शाहरुख़ ख़ान की टीम के लिए यह साइनिंग संतुलन और अनुभव दोनों का प्रतीक मानी जा रही थी, लेकिन किसे पता था कि यह सपना इतनी जल्दी विवाद में फंस जाएगा।
अल्पसंख्यकों पर हिंसा बनी आईपीएल विवाद की जड़
2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई। अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक अधिकार समूहों (जैसे Bangladesh Hindu Buddhist Christian Unity Council) के अनुसार, अगस्त 2024 से दिसंबर 2024 तक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगभग 2,000 से 2,442 हमले दर्ज किए गए (जिनमें अधिकांश अगस्त के मध्य में हुए), जबकि 2025 में हमले कम लेकिन जारी रहे (जनवरी-मार्च में 92-142 के आसपास)। इनमें हत्याएं, आगजनी, मंदिरों को नुकसान, लूटपाट और भूमि कब्जा शामिल था।
कई मामलों में भीड़ हिंसा ब्लास्फेमी (धर्म का अपमान) के आरोपों पर की गई, जिसमें घरों को जलाना, परिवारों को निशाना बनाना और मॉब लिंचिंग के मामले सामने आए (जैसे 2025 में कुछ घर जलाए गए और व्यक्तियों को मारा गया)।
इन परिस्थितियों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ाया भारत ने बार-बार आधिकारिक चिंता व्यक्त की, कूटनीतिक विवाद बढ़े, और खेल संबंधों (जैसे IPL में बांग्लादेशी खिलाड़ियों की भागीदारी) पर भी असर पड़ा। ये घटनाएं बाद में मुस्तफिजुर रहमान वाले IPL विवाद का मुख्य कारण बनीं।
आईपीएल साइनिंग से सियासी तूफान
आईपीएल नीलामी के तुरंत बाद, दिसंबर 2025 के अंत में भारत में विरोध तेज़ हो गया। कई प्रमुख धार्मिक नेताओं, जैसे देवकीनंदन ठाकुर, उज्जैन के महावीर नाथ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने केकेआर और शाहरुख़ ख़ान पर निशाना साधा। उनका कहना था कि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बीच बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदना असंवेदनशील फैसला है।
कुछ संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर मुस्ताफिज़ुर रहमान मैदान पर उतरे तो वे स्टेडियम में जाकर मैच बाधित कर सकते हैं या पिच को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर #BoycottKKR ट्रेंड करने लगा और बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग तेज़ हो गई।
इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई। भाजपा के कुछ नेताओं ने इसे राष्ट्रीय हित से जोड़ा, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भी बीसीसीआई के फैसले का इंतजार करने की अपील की।
बीसीसीआई का फैसला
शुरुआत में बीसीसीआई सूत्रों ने साफ किया कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर किसी तरह का सरकारी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे दबाव बढ़ता गया, स्थिति बदलती गई। 3 जनवरी 2026 को बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने घोषणा की कि हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए केकेआर को मुस्ताफिज़ुर रहमान को रिलीज़ करने का निर्देश दिया गया है। केकेआर ने तुरंत आदेश का पालन किया और खिलाड़ी की रिलीज़ की पुष्टि की।
फ्रेंचाइज़ी को नियमों के तहत ₹9.20 करोड़ की राशि से रिप्लेसमेंट खिलाड़ी चुनने की अनुमति दी गई। यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना गया क्योंकि गैर-क्रिकेटिंग कारणों से नीलामी के बाद किसी खिलाड़ी को रिलीज़ करने का यह पहला बड़ा मामला था। इसकी तुलना अक्सर 2008 के बाद से आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों की अनुपस्थिति से की जा रही है।
मुस्ताफिजुर रहमान की ‘कोलकाता ड्रीम’ अधूरी रह गई हो , लेकिन इसने भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है- क्या खेल वास्तव में राजनीति से अछूता रह सकता है? आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या यह आक्रोश चुनिंदा है, क्योंकि भारत-बांग्लादेश के अन्य संबंध सामान्य बने हुए हैं। आने वाले समय में, बांग्लादेशी खिलाड़ियों की आईपीएल में भागीदारी पर अनौपचारिक प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जो लीग की वैश्विक छवि के लिए एक चुनौती होगी।
यह भी पढ़े : ‘धुरंधर’ में अक्षय खन्ना की शानदार एक्टिंग, फिर याद आया नवाजुद्दीन का किस्सा
