गुवाहाटीके कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेला शुरू, साथ ही सोनापुर स्थित दिवंगत गायक ज़ुबीन गर्ग की समाधि “ज़ुबीन क्षेत्र” को भी पारंपरिक रीति से सजाया गया।
नई दिल्ली: असम का प्रसिद्ध अंबुबाची मेला 2026 पूरे धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ शुरू हो चुका है। हर साल की तरह इस बार भी गुवाहाटी के ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर में लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और तांत्रिक साधक पहुंच रहे हैं। यह मेला देवी कामाख्या के वार्षिक ऋतु काल (मासिक धर्म) का प्रतीक माना जाता है और शक्ति परंपरा में इसका विशेष महत्व है।
इस बार एक और स्थान लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सोनापुर के कामारकुची गांव में स्थित दिवंगत गायक ज़ुबीन गर्ग की समाधि स्थल “ज़ुबीन क्षेत्र” को भी अंबुबाची मेले की परंपरा के अनुरूप सजाया गया है। इससे यह स्थान संगीत, संस्कृति और श्रद्धा के अनोखे संगम के रूप में उभर रहा है।
पारंपरिक गमछों से सजा ‘ज़ुबीन क्षेत्र’
सोनापुर के कामारकुची गांव में स्थित “ज़ुबीन क्षेत्र” को अंबुबाची मेले के अवसर पर असम की पारंपरिक पहचान माने जाने वाले गमछों से सजाया गया है। इस विशेष सजावट की व्यवस्था ज़ुबीन क्षेत्र प्रबंधन समिति ने की है।
सितंबर 2025 में ज़ुबीन गर्ग के निधन के बाद से यह स्थान उनके प्रशंसकों और असमिया समाज के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में लोग यहां आकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं।
समिति ने जानकारी दी है कि अंबुबाची मेले के दौरान परिसर आम लोगों के लिए बंद रहेगा और 26 जून को मंदिर के कपाट खुलने के बाद इसे फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
ज़ुबीन के परिवार, प्रशंसकों और शुभचिंतकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे असमिया संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का सुंदर उदाहरण बताया है।
कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला 2026
गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित 51 शक्तिपीठों में शामिल कामाख्या मंदिर में अंबुबाची महायोग 22 जून की रात 9:08 बजे से शुरू हुआ। परंपरा के अनुसार, देवी के वार्षिक ऋतु काल के दौरान मंदिर के गर्भगृह के कपाट तीन दिनों तक बंद रहते हैं और 26 जून की सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद फिर से खोले जाएंगे।
अंबुबाची मेला शक्ति, सृजन, मातृत्व और स्त्रीत्व का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इसे पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन भी कहा जाता है।
8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
मंदिर प्रशासन और असम सरकार के अनुसार, इस वर्ष देश और विदेश से लगभग 8 लाख श्रद्धालुओं, साधु-संतों और तांत्रिक साधकों के मेले में शामिल होने की संभावना है। इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं।
प्रशासन की विशेष तैयारियां
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कामरूप मेट्रो जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने कई विशेष इंतजाम किए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
- भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्रबंधन
- मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी
- स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाओं की व्यवस्था
- साधु-संतों के लिए अलग मार्ग और विशेष सुविधाएं
- पेयजल और विश्राम स्थलों की व्यवस्था
देशभर से पहुंचे साधु-संत
मेले में पहुंचे साधुओं का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी अंबुबाची महायोग श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से साधु-संत और श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं।
उनके अनुसार, अंबुबाची मेला तांत्रिक और सात्विक दोनों परंपराओं के साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है। नागा संन्यासी और विभिन्न अखाड़ों के साधु भी बड़ी संख्या में यहां साधना और पूजा के लिए पहुंचते हैं।
अंबुवाची मेला सिर्फ़ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह आस्था, संस्कृति और परंपरा का एक जीवंत प्रतीक भी है। इस साल सोनापुर का “जुबीन क्षेत्र” भी इस परंपरा से जुड़ गया है; यह दिखाता है कि असम में संगीत, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत किस तरह तेज़ी से और एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।
जहाँ एक ओर हज़ारों-लाखों श्रद्धालु देवी का आशीर्वाद पाने के लिए कामाख्या मंदिर पहुँच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जुबीन क्षेत्र भी असमिया समाज की भावनाओं, यादों और सांस्कृतिक पहचान के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।
