25 साल बाद अमेरिका से गिरफ्तार हुई मोनिका कपूर, CBI टीम ला रही भारत

25 साल बाद अमेरिका से गिरफ्तार हुई मोनिका कपूर, CBI टीम ला रही भारत

6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में वांछित मोनिका को न्यूयॉर्क कोर्ट से मिली प्रत्यर्पण मंजूरी, बुधवार रात तक पहुंचेगी दिल्ली

नई दिल्ली, 9 जुलाई 2025

करीब 25 वर्षों से फरार आर्थिक अपराधी मोनिका कपूर को आखिरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अमेरिका से गिरफ्तार कर लिया है। करोड़ों की धोखाधड़ी मामले में वांछित मोनिका को लेकर CBI की टीम बुधवार रात तक भारत पहुंचने वाली है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी को भारत की आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता माना जा रहा है।

CBI सूत्रों के अनुसार, मोनिका की गिरफ्तारी भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत हुई। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने भारत के अनुरोध पर प्रत्यर्पण को मंजूरी दी, जिसके बाद अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने मोनिका के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया। इसके तुरंत बाद CBI टीम ने उसे हिरासत में लिया और भारत के लिए रवाना कर दिया।

CBI की जांच के मुताबिक, वर्ष 1999 में मोनिका कपूर ने अपने दो भाइयों — राजीव और राजन खन्ना — के साथ मिलकर ज्वैलरी के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इनका इस्तेमाल कर सरकारी ड्यूटी फ्री आयात लाइसेंस हासिल किया। बाद में ये लाइसेंस एक प्राइवेट कंपनी ‘डीप एक्सपोर्ट’ को बेच दिए गए, जिसके जरिए बिना शुल्क चुकाए सोना निर्यात किया गया। इस धोखाधड़ी से सरकार को करीब 5.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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मोनिका के खिलाफ 2010 में दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, और इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। उसी वर्ष भारत सरकार ने अमेरिका से आधिकारिक तौर पर प्रत्यर्पण की मांग भी की थी, जिसके बाद यह मामला अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया में चला गया।

प्रत्यर्पण के खिलाफ मोनिका ने कोर्ट में दलील दी कि भारत में उसके साथ अमानवीय व्यवहार हो सकता है, जो संयुक्त राष्ट्र के टॉर्चर विरोधी कन्वेंशन का उल्लंघन होगा। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने इन तर्कों को खारिज कर दिया, और भारत को प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी।

CBI के प्रवक्ता के अनुसार, मोनिका कपूर को भारत लाने के बाद दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह गिरफ्तारी उन दर्जनों आर्थिक अपराधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो वर्षों से विदेशों में छिपे हैं और अब कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे।

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