ग्लेन मैक्सवेल का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास: बचपन के क्रिकेट के किस्सों से लेकर वर्ल्ड कप के यादगार प्रदर्शन और BBL में उनके भविष्य तक, जानिए ऑस्ट्रेलिया के ‘बिग शो’ से जुड़ी 7 खास बातें
नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के स्टार ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने 38 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने विक्टोरिया के लिए फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट से भी दूरी बनाने का फैसला किया है। मैक्सवेल ने इस हफ्ते The Final Word पॉडकास्ट पर अपने फैसले की जानकारी दी। इंग्लैंड के खिलाफ T20I सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि, क्रिकेट प्रशंसक उन्हें फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खेलते हुए देख सकेंगे। वह मेलबर्न स्टार्स के लिए बिग बैश लीग (BBL) में खेलना जारी रखेंगे।
ग्लेन मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अपने करियर को कहा अलविदा
मैक्सवेल का संन्यास उनके 14 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत है। इस दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को तीन बड़े वर्ल्ड कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने जून 2025 में ही वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन T20 इंटरनेशनल के लिए उपलब्ध थे।
इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की T20I सीरीज के लिए टीम में जगह नहीं मिलना उनके फैसले की एक अहम वजह बना। ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ता अब युवा खिलाड़ियों को मौके दे रहे हैं और टीम को अगले दौर के लिए तैयार कर रहे हैं। मैक्सवेल ने भी माना कि टीम को भविष्य की ओर देखना चाहिए। ऐसे में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया।
उनका यह फैसला विक्टोरिया के साथ उनके घरेलू करियर पर भी लागू होगा। अब वह राज्य की ओर से फर्स्ट क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट नहीं खेलेंगे। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कई दिनों तक चलने वाले पारंपरिक मुकाबले शामिल होते हैं, जबकि लिस्ट ए क्रिकेट 50 ओवर के वनडे प्रारूप में खेला जाता है।
पॉडकास्ट पर क्या बोले मैक्सवेल?
The Final Word पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान मैक्सवेल ने बताया कि 2026 T20 वर्ल्ड कप से पहले और उसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के साथ कई बार चर्चा की थी।
उन्होंने इन बातचीत को खुला और सहज बताया। उनके मुताबिक, टीम प्रबंधन ने उन पर तुरंत कोई फैसला लेने का दबाव नहीं बनाया था। ऑस्ट्रेलिया ने वापसी का विकल्प खुला रखा था, जबकि टीम आगे के मुकाबलों में युवा खिलाड़ियों को भी आजमा रही थी।
मैक्सवेल ने विक्टोरिया के लिए खेलने के अपने सफर को याद करते हुए भावुक अनुभव भी साझा किया। साथियों को यह बताना कि राज्य के लिए उनका आखिरी वनडे मैच पहले ही हो चुका है, उनके लिए उम्मीद से ज्यादा मुश्किल था।
अब वह अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं और करियर के बचे हुए सालों में शरीर को बेहतर तरीके से संभालने की योजना बना रहे हैं।
MCG में नहीं मिलेगा आखिरी विदाई मैच
मैक्सवेल की इच्छा थी कि वह मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलें। ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा इंग्लैंड दौरे के दौरान दोनों टीमों के बीच इस मैदान पर एक T20I मुकाबला होना है। ऐसे में उन्हें घरेलू दर्शकों के सामने आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सकता था।
हालांकि, मैक्सवेल ने चयनकर्ताओं के फैसले को समझा। ऑस्ट्रेलिया अगले 12 से 24 महीनों में टीम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। टीम का लक्ष्य 2028 ओलंपिक खेलों में क्रिकेट की वापसी को ध्यान में रखते हुए भी खुद को तैयार करना है।
ऑस्ट्रेलिया चाहता है कि युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव का अनुभव करें और केवल घरेलू T20 लीग पर निर्भर न रहें। मैक्सवेल ने आखिरी विदाई मैच के लिए जोर देने के बजाय इस फैसले को स्वीकार किया। इस तरह उनका अंतरराष्ट्रीय करियर MCG पर आखिरी मुकाबले के बिना ही समाप्त हो जाएगा।
आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच: फरवरी 2026 में ओमान के खिलाफ
मैक्सवेल ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 20 फरवरी 2026 को श्रीलंका के पल्लेकेले में T20 वर्ल्ड कप के दौरान ओमान के खिलाफ खेला था।
ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच आसानी से जीत लिया, लेकिन इस जीत से टीम के टूर्नामेंट अभियान को कोई खास फायदा नहीं हुआ। ऑस्ट्रेलियाई टीम ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ सकी और उसका वर्ल्ड कप सफर जल्दी समाप्त हो गया।
इस मुकाबले में मैक्सवेल को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने दो विकेट लिए और सिर्फ 13 रन दिए। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह ऑस्ट्रेलिया की जर्सी में उनका आखिरी मैच साबित होगा।
इस मुकाबले के साथ तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने वाले मैक्सवेल के करियर का अंत हुआ।
आंकड़ों में मैक्सवेल का अंतरराष्ट्रीय करियर
मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलिया के लिए तीनों प्रारूपों में कुल 286 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी उनका योगदान टीम के लिए काफी अहम रहा।
| प्रारूप | मैच | रन | विकेट |
|---|---|---|---|
| टेस्ट | 7 | 339 | 8 |
| वनडे | 149 | 3,990 | 77 |
| T20I | 130 | 2,897 | 51 |
| कुल | 286 | 7,226 | 136 |
उनका T20I रिकॉर्ड खास रहा। मैक्सवेल ने 154.42 के स्ट्राइक रेट से 2,897 रन बनाए और 51 विकेट भी हासिल किए। इस प्रारूप में उनके नाम पांच शतक हैं। वह भारत के रोहित शर्मा के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा T20I शतक लगाने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं। रोहित भी T20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं।
बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान देने की उनकी क्षमता ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया की सीमित ओवरों की टीम का अहम खिलाड़ी बनाया।
वर्ल्ड कप के तीन यादगार पल
मैक्सवेल के अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐसे प्रदर्शन रहे, जिन्हें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट प्रशंसक लंबे समय तक याद रखेंगे। इनमें वर्ल्ड कप के तीन पल सबसे खास हैं।
1. 2015 वनडे वर्ल्ड कप में शतक: मैक्सवेल ने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर श्रीलंका के खिलाफ सिर्फ 51 गेंदों में शतक जड़ दिया था। उनकी इस पारी ने ऑस्ट्रेलिया के अभियान को मजबूती दी। टीम ने आखिरकार यह वर्ल्ड कप खिताब अपने नाम किया।
2. 2021 T20 वर्ल्ड कप फाइनल: न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में मैक्सवेल ने नाबाद 28 रन बनाए और ऑस्ट्रेलिया को जीत दिलाने वाले रन भी उन्हीं के बल्ले से आए। ऑस्ट्रेलिया ने 173 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए आठ विकेट से मुकाबला जीता और पहली बार T20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया।
3. अफगानिस्तान के खिलाफ नाबाद 201 रन: 2023 वनडे वर्ल्ड कप में मैक्सवेल ने ऐसी पारी खेली, जिसे क्रिकेट इतिहास की बेहतरीन पारियों में गिना जाता है। अफगानिस्तान के 292 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 91 रन पर सात विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद मैक्सवेल ने मोर्चा संभाला।
तेज ऐंठन और चलने-फिरने में परेशानी के बावजूद उन्होंने 128 गेंदों पर नाबाद 201 रन बनाए। उनकी इस पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने तीन विकेट से रोमांचक जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
इसी वर्ल्ड कप के दौरान मैक्सवेल को एक और मुश्किल का सामना करना पड़ा था। अहमदाबाद में टीम के गोल्फ कार्यक्रम के दौरान वह गोल्फ कार्ट से गिर गए थे और उन्हें चोट के कारण कन्कशन हुआ। इस वजह से वह इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला नहीं खेल सके। बाद में उन्होंने वापसी की और अफगानिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक दोहरा शतक जड़ा।
क्यों पड़ा नाम ‘द बिग शो’?
मैक्सवेल को ‘द बिग शो’ का नाम उनके आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी अंदाज के कारण मिला। वह अक्सर ऐसे शॉट खेलते थे, जो क्रिकेट की पारंपरिक तकनीक से अलग होते थे और गेंदबाजों के लिए उन्हें रोकना मुश्किल बना देते थे।
उनके रिवर्स स्वीप, स्विच हिट, रैंप शॉट और ताकतवर स्ट्रोक उन्हें दुनिया के सबसे अप्रत्याशित बल्लेबाजों में शामिल करते थे। वह कवर के ऊपर से बाउंड्री लगा सकते थे, विकेटकीपर के पीछे गेंद भेज सकते थे और तेज गेंदबाजों के साथ स्पिनरों के खिलाफ भी छक्के जड़ सकते थे।
उनकी खासियत सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं थी। वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी और शानदार फील्डिंग से भी टीम को योगदान देते थे। जरूरत पड़ने पर वह कुछ ही ओवरों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे।
मनोरंजन और मैच जिताने की काबिलियत के इसी मेल ने उन्हें ‘द बिग शो’ के नाम से मशहूर किया।
बचपन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें
मैक्सवेल के अनोखे बल्लेबाजी अंदाज के पीछे बचपन की एक दिलचस्प कहानी है। एक पुराने प्रोफाइल के मुताबिक, स्कूल में क्रिकेट खेलते समय वह इतने अच्छे बल्लेबाज थे कि शिक्षकों ने दूसरे बच्चों को भी मौका देने के लिए उनसे बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने को कहा था। इसके बाद उन्होंने दूसरी तरफ से बल्लेबाजी का अभ्यास शुरू किया। माना जाता है कि इससे उन्हें आगे चलकर रिवर्स स्वीप और स्विच हिट जैसे शॉट खेलने में मदद मिली।
उनके पिता नील मैक्सवेल ने भी उनके क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि नील 1960 के दशक में इंग्लैंड के कॉर्नवाल से ऑस्ट्रेलिया आए थे और मेलबर्न में क्लब क्रिकेट खेलते थे। उन्होंने अपने बेटे के खेल को निखारने में काफी समय दिया। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ग्लेन के पिता नील मैक्सवेल वही खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्होंने शेफील्ड शील्ड में विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स का प्रतिनिधित्व किया था।
साल 2008 का एक किस्सा भी उनके करियर से जुड़ा है। The Cricket Monthly के एक प्रोफाइल के अनुसार, उस समय 19 साल के मैक्सवेल इंग्लैंड के नॉरफॉक में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे। खराब फॉर्म और विदेशी खिलाड़ी के तौर पर प्रदर्शन का दबाव उन्हें परेशान कर रहा था। एक मेजबान और साथी क्रिकेटर के प्रोत्साहन से उन्होंने दोबारा खेल का आनंद लेना शुरू किया।
मैक्सवेल को गोल्फ में भी काफी दिलचस्पी है। यह खेल उनके पिता की खेल पृष्ठभूमि से भी जुड़ा हुआ है।
अब क्या करेंगे मैक्सवेल? BBL में जारी रहेगा जलवा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का मतलब यह नहीं है कि मैक्सवेल T20 क्रिकेट से दूर हो जाएंगे। मेलबर्न स्टार्स ने 2027-28 BBL सीजन तक उनका कॉन्ट्रैक्ट बढ़ा दिया है। ऐसे में प्रशंसक उन्हें आगे भी हरी जर्सी में खेलते देख सकेंगे।
BBL|02 से ही मैक्सवेल मेलबर्न स्टार्स का अहम हिस्सा रहे हैं। फ्रेंचाइजी के साथ उनका लंबा जुड़ाव रहा है और वह टीम के सबसे पहचाने जाने वाले खिलाड़ियों में से एक हैं।
सितंबर 2026 में उन्होंने पहली यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग में बेलफास्ट वोल्व्स की कप्तानी भी की थी। उनकी टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताबी मुकाबले में एडिनबर्ग कैसल रॉकर्स से हार गई। इस तरह एडिनबर्ग ने टूर्नामेंट का पहला खिताब जीता।
मैक्सवेल अब फ्रेंचाइजी क्रिकेट और अपनी फिटनेस पर ध्यान देना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आगामी BBL सीजन की तैयारी के लिए वह घुटने का इंजेक्शन लेने और उसके बाद करीब आठ सप्ताह तक रिहैबिलिटेशन करने की योजना बना रहे हैं।
फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के बजाय घरेलू और अंतरराष्ट्रीय T20 प्रतियोगिताओं में निजी टीमों के लिए खेलते हैं। ऐसे में मैक्सवेल के करियर का अगला दौर भले ही अलग हो, लेकिन प्रशंसकों को उनके आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज की झलक आगे भी मिलती रहेगी।
