आनंदोत्सव ’26 में जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस प्रीतम पाल ने युवाओं को मानवीय मूल्यों, नशामुक्त समाज और यमुना संरक्षण के लिए प्रेरित किया
नई दिल्ली: जीवन में सफलता के साथ मानवीय गुणों को महत्व देना भी जरूरी है। आनंदोत्सव ’26 के दूसरे दिन जस्टिस प्रीतम पाल ने विद्यार्थियों को इसी संदेश के साथ अच्छे इंसान बनने की प्रेरणा दी। आर्य समाज वसंत विहार में आयोजित 40वें वार्षिक अंतरविद्यालय महोत्सव में आध्यात्मिक मूल्यों, नशामुक्त समाज और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने युवाओं से नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और यमुना संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को सामाजिक बुराइयों से दूर रखने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने के लिए लगातार प्रयास करना आवश्यक है।

जस्टिस प्रीतम पाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जस्टिस गोयल के साथ काम करने के अनुभव साझा किए। उन्होंने उस सीख को याद किया, जिसमें जीवन में कुछ भी बनने से पहले अच्छा इंसान बनने को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि मानवीय गुण न केवल व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान नशे की समस्या और यमुना प्रदूषण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ‘नो नशा नेशन’ अभियान ने नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया, जबकि ‘YaRI’ पहल ने विद्यार्थियों को नदी संरक्षण की जिम्मेदारी समझाने का प्रयास किया।
मॉडर्न स्कूल, वसंत विहार की प्रधानाचार्य विभा खोसला की प्रस्तुति और विद्यार्थियों के नुक्कड़ नाटक ‘YaRI – Our Responsibility’ ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम की शुरुआत डीएवी गान और महात्मा आनंद स्वामी सरस्वती के जीवन पर आधारित प्रस्तुति से हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन, लोकनृत्य, संगीत और अंतरविद्यालय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
इस वर्ष आनंदोत्सव में दिल्ली के 79 स्कूलों के लगभग 2,500 विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। 16 अक्टूबर को पद्मश्री डॉ. पुनम सूरी की उपस्थिति में समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार दिए जाएंगे।
