नई दिल्ली: मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. चरणजीत सिंह ने दिल्ली में कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों और उनसे संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई की स्वतंत्र जाँच की माँग की है। इस संबंध में उन्होंने भारतीय संवैधानिक संस्थाओं, संयुक्त राष्ट्र निकायों, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया को अपील भेजी है।
उपलब्ध नौ पृष्ठों की ईमेल प्रति के अनुसार, संदेश 10 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:51 बजे भेजा गया। इसमें शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
डॉ. सिंह ने अपील में बड़े पैमाने पर पुलिस तैनाती, प्रदर्शनकारियों की कथित गिरफ्तारियों, इंटरनेट सेवाओं पर संभावित प्रतिबंधों और रेल एवं मेट्रो सेवाओं में व्यवधान का उल्लेख किया है। उन्होंने पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के काम में संभावित बाधाओं की भी जाँच कराने का अनुरोध किया है।
पत्र में लगभग 50,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती का दावा किया गया है। हालाँकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। अपील में हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति, उनके कानूनी अधिकारों और संबंधित प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा की माँग भी शामिल है।
डॉ. सिंह ने राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और निर्वाचन आयोग सहित भारतीय संस्थाओं के साथ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय से अपने अधिकार-क्षेत्र के अनुसार मामले पर विचार करने का आग्रह किया है।
अपील में संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 22 तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दस्तावेजों के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। डॉ. सिंह ने कहा है कि प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
उन्होंने पुलिस कार्रवाई की वैधता, इंटरनेट प्रतिबंधों की आवश्यकता और सार्वजनिक परिवहन से संबंधित फैसलों की जाँच करने का अनुरोध किया है। साथ ही, चुनावी शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा और किसी भी प्रमाणित उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और स्वतंत्र पत्रकारों से आधिकारिक रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और सत्यापित तस्वीरों एवं वीडियो के आधार पर घटनाओं की पड़ताल करने की अपील की गई है। उपलब्ध ईमेल प्रति संदेश भेजे जाने का रिकॉर्ड प्रस्तुत करती है, लेकिन लगभग 500 प्राप्तकर्ताओं तक सफल डिलीवरी या किसी संस्था की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
डॉ. सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तथ्यों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए और कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
