Baahubali Anniversary 11 साल बाद भी क्यों नहीं फीका पड़ा ‘बाहुबली’ का जादू जानिए कैसे बदल दी भारतीय सिनेमा की तस्वीर

Baahubali Anniversary 11 साल बाद भी क्यों नहीं फीका पड़ा 'बाहुबली' का जादू जानिए कैसे बदल दी भारतीय सिनेमा की तस्वीर

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं होती, बल्कि पूरे फिल्म उद्योग की दिशा बदल देती हैं। निर्देशक S.S. Rajamouli की फिल्म ‘Baahubali: The Beginning’ ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। 10 जुलाई 2015 को रिलीज हुई यह फिल्म अब अपनी 11वीं साल के करीब है और आज भी दर्शकों के बीच इसका वही क्रेज देखने को मिलता है, जैसा रिलीज के समय था।

सोशल मीडिया पर इन दिनों #Baahubali, #Prabhas और #11YearsOfBaahubali जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। फैंस फिल्म के यादगार डायलॉग, शानदार एक्शन सीक्वेंस और महिष्मती साम्राज्य की झलकियां शेयर कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि अगर ‘Baahubali’ नहीं आती, तो शायद भारतीय सिनेमा में पैन-इंडिया फिल्मों का दौर इतनी तेजी से शुरू नहीं होता।

एक ऐसी कहानी जिसने हर वर्ग के दर्शकों को जोड़ा

‘Baahubali: The Beginning’ सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं थी, बल्कि इसमें परिवार, सत्ता, विश्वासघात, प्रेम और बलिदान जैसी कई भावनाओं को बड़े ही प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया था।

फिल्म की शुरुआत शिवुडू नाम के एक युवक से होती है, जिसे अपनी असली पहचान के बारे में कुछ भी पता नहीं होता। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह महिष्मती साम्राज्य और अपने अतीत से जुड़ता है। इसके बाद अमरेंद्र बाहुबली और भल्लालदेव के बीच सत्ता संघर्ष की कहानी दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखती है।

फिल्म का अंत उस सवाल पर हुआ जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया कि “कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?” यह सवाल सिर्फ एक डायलॉग नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सस्पेंस में बदल गया।

Prabhas बने देश के सबसे बड़े सितारों में से एक

‘Baahubali’ से पहले प्रभास दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता थे, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें पूरे देश में पहचान दिलाई।

उन्होंने अमरेंद्र बाहुबली और शिवुडू जैसे दो अलग-अलग किरदारों को जिस आत्मविश्वास के साथ निभाया, उसने दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन और भावनात्मक अभिनय की खूब तारीफ हुई।

आज भी कई लोग प्रभास को सबसे पहले ‘Baahubali’ के नाम से ही याद करते हैं।

दमदार कलाकारों ने बनाई फिल्म को यादगार

फिल्म की सफलता में सिर्फ Prabhas ही नहीं, बल्कि पूरी स्टार कास्ट का बड़ा योगदान रहा। राणा दग्गुबाती ने भल्लालदेव के रूप में एक ऐसे खलनायक की भूमिका निभाई, जो ताकतवर होने के साथ-साथ बेहद प्रभावशाली भी था। उनकी और प्रभास की टक्कर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी।

राम्या कृष्णन ने शिवगामी देवी का किरदार निभाकर यह साबित किया कि एक महिला किरदार भी पूरी कहानी का केंद्र बन सकता है। उनके कई संवाद आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं।

अनुष्का शेट्टी ने देवसेना के रूप में मजबूत और आत्मसम्मान से भरी महिला का किरदार निभाया, जबकि तमन्ना भाटिया ने अवंतिका के रोल में अपनी अलग पहचान बनाई।

भव्य सेट और शानदार विजुअल इफेक्ट्स ने बढ़ाया रोमांच

जब ‘Baahubali’ रिलीज हुई थी, तब भारतीय फिल्मों में इतने बड़े स्तर के विजुअल इफेक्ट्स कम ही देखने को मिलते थे। महिष्मती साम्राज्य के विशाल महल, युद्ध के दृश्य, झरने, हाथियों की सेना और विशाल सेट्स ने दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में पहुंचा दिया।

राजामौली की कल्पना और VFX टीम की मेहनत ने फिल्म को इंटरनेशनल स्तर की भव्यता दी। यही वजह है कि आज भी इसके कई दृश्य भारतीय सिनेमा के सबसे शानदार विजुअल्स में गिने जाते हैं।

कमाई के मामले में भी बनाया इतिहास

करीब 180 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘Baahubali: The Beginning’ ने दुनियाभर में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था। उस समय यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई थी।

फिल्म ने हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम समेत कई भाषाओं में शानदार प्रदर्शन किया। विदेशों में भी इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला और भारतीय फिल्मों के लिए नए बाजार खुले।

नेशनल अवॉर्ड्स से भी हुआ सम्मानित

फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों की भी खूब सराहना मिली। ‘Baahubali: The Beginning’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफेक्ट्स सहित कई सम्मान मिले। राजामौली के निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, संगीत और तकनीकी गुणवत्ता की भी जमकर तारीफ हुई।

इन पुरस्कारों ने यह साबित कर दिया कि फिल्म सिर्फ व्यावसायिक रूप से सफल नहीं थी, बल्कि तकनीकी और रचनात्मक स्तर पर भी बेहद मजबूत थी।

भारतीय सिनेमा को मिला नया रास्ता

‘Baahubali’ की सफलता के बाद भारतीय फिल्म उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पहले दक्षिण भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता मुख्य रूप से दक्षिण भारत तक सीमित रहती थी, लेकिन इस फिल्म ने भाषा की दीवारें तोड़ दीं। इसके बाद ‘केजीएफ’, ‘पुष्पा’, ‘आरआरआर’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों ने पूरे देश में शानदार सफलता हासिल की।

आज निर्माता बड़े बजट की फिल्मों को एक साथ कई भाषाओं में रिलीज करने की योजना बनाते हैं और इसका सबसे बड़ा श्रेय ‘Baahubali’ को दिया जाता है।

सोशल मीडिया पर फैंस का नॉस्टेल्जिया

11वीं साल के मौके पर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार फिल्म के यादगार दृश्य साझा कर रहे हैं।

किसी ने झरने पर चढ़ते शिवुडू का वीडियो पोस्ट किया, तो किसी ने शिवगामी के दमदार संवाद शेयर किए। कई यूजर्स ने फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक और युद्ध वाले दृश्यों को भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन सीक्वेंस बताया।

फिल्म से जुड़े मीम्स, पोस्टर और फैन आर्ट भी बड़ी संख्या में शेयर किए जा रहे हैं, जिससे साफ है कि ‘बाहुबली’ आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखती है।

आज भी नई पीढ़ी की पसंद बनी हुई है फिल्म

रिलीज के 11 साल बाद भी ‘Baahubali’ का आकर्षण कम नहीं हुआ है।

OTT प्लेटफॉर्म्स के जरिए नई पीढ़ी भी इस फिल्म को देख रही है। जिन लोगों ने इसे सिनेमाघरों में नहीं देखा था, वे अब भी इसकी कहानी, एक्शन और विजुअल्स से प्रभावित हो रहे हैं।

यही वजह है कि हर साल इसकी सालगिरा पर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो जाती है और फिल्म फिर से ट्रेंड करने लगती है।

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भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल

‘Baahubali: The Beginning’ सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक अहम अध्याय है। इसने यह साबित किया कि अगर कहानी दमदार हो, तकनीक मजबूत हो और प्रस्तुति भव्य हो, तो भाषा कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती।

11 साल बाद भी इस फिल्म का प्रभाव पहले जैसा ही दिखाई देता है। महिष्मती की दुनिया, प्रभास का दमदार अभिनय, राजामौली का विजन और यादगार संगीत आज भी दर्शकों को उसी तरह रोमांचित करता है, जैसा पहली बार फिल्म देखने के दौरान हुआ था।

इसी वजह से ‘Baahubal’ को केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक माना जाता है।

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