बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बेगम खालेदा जिया (1945-2025) का पूरा इतिहास – पति जियाउर रहमान की हत्या के बाद राजनीति में कदम, तानाशाही के खिलाफ आंदोलन, तीन बार पीएम बनना और शेख हसीना से कट्टर दुश्मनी।
बांग्लादेश की राजनीति में बेगम खालेदा जिया का नाम एक युग का प्रतीक है। 30 दिसंबर 2025 को 80 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया, लेकिन उनका इतिहास हमेशा जीवित रहेगा। उनकी जिंदगी का पूरा सफर – संघर्ष, सत्ता, उपलब्धियां और चुनौतियां से रहा है । एक साधारण शुरुआत से ‘बैटलिंग बेगम्स’ वाली राजनीति तक की दिलचस्प कहानी! कैसे एक गृहिणी से सत्ता की शीर्ष तक का संघर्षपूर्ण सफर रहा आइए जानते हैं
शुरुआती जीवन: एक साधारण गृहिणी से राजनीति की दुनिया तक
- जन्म और परिवार: 15 अगस्त 1945 को (कुछ स्रोतों में 1946) दीनाजपुर (तत्कालीन पूर्वी बंगाल, अब बांग्लादेश) में एक साधारण मुस्लिम परिवार में जन्मीं। बचपन में स्कूलिंग पूरी नहीं हुई, लेकिन खुद को सेल्फ-एजुकेटेड मानती थीं।
- शादी: 1960 में मात्र 15 साल की उम्र में पाकिस्तानी आर्मी ऑफिसर जियाउर रहमान से शादी की, जो बाद में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के हीरो और राष्ट्रपति बने। दो बेटे – तारिक रहमान और अराफात रहमान ‘कोको’।
- 1971 का दर्दनाक दौर: बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान 167 दिनों तक पाकिस्तानी सेना की कैद में रहीं – यह समय उनके लिए बेहद कठिन था।
राजनीति में एंट्री: पति की हत्या ने बदली जिंदगी
1981 में उनके पति (तत्कालीन राष्ट्रपति) जियाउर रहमान की हत्या हो गई। तब तक खालेदा जिया घरेलू जीवन में व्यस्त थीं, लेकिन विधवा होने के बाद उन्होंने बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की कमान संभाली।
- 1984 में बीएनपी की चेयरपर्सन बनीं।
- हुसैन मुहम्मद एरशाद की सैन्य तानाशाही के खिलाफ लगातार आंदोलन किए – कई बार जेल गईं, हाउस अरेस्ट झेला।
ऐतिहासिक सफलता: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री
1990 में एरशाद के खिलाफ बड़े जन-आंदोलन में खालेदा जिया की बड़ी भूमिका थी। एरशाद के इस्तीफे के बाद 1991 के पहले लोकतांत्रिक चुनाव में बीएनपी ने जीत हासिल की।
- 20 मार्च 1991 को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं (1991-1996)। मुस्लिम दुनिया में बेनजीर भुट्टो के बाद दूसरी महिला पीएम।
- दूसरा कार्यकाल: 2001-2006।
- कुल तीन बार पीएम रहीं (एक छोटा कार्यकाल 1996 में भी)।
प्रमुख योगदान और सफलता
- शिक्षा क्रांति: प्राइमरी शिक्षा को फ्री और अनिवार्य बनाया, लड़कियों को क्लास 10 तक फ्री शिक्षा और स्टाइपेंड दिए।
- आर्थिक सुधार: VAT सिस्टम शुरू किया, बैंकिंग रिफॉर्म्स, एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन बढ़ाए, विदेशी निवेश आकर्षित किया।
- प्राकृतिक आपदाओं का सामना: 1991 के साइक्लोन जैसी बड़ी आपदाओं में कुशलता से राहत कार्य किए।
- लोकतंत्र की लड़ाई: तानाशाही के खिलाफ कभी समझौता नहीं किया, जिसकी वजह से उन्हें “आयरन लेडी” कहा जाता है।
शेख हसीना से पुरानी और तीखी राजनीतिक दुश्मनी: ‘बैटलिंग बेगम्स’
बांग्लादेश की राजनीति को दशकों तक दो महिलाओं ने शेप किया – खालेदा जिया और शेख हसीना। दोनों के बीच की दुश्मनी 1975 के शेख मुजीब हत्या से जुड़ी थी। बारी-बारी सत्ता में आईं, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप, जेल, हाउस अरेस्ट और हिंसा का दौर चला।
अंतिम वर्ष और विरासत
बीमारी (लिवर सिरोसिस, डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम्स) और कानूनी लड़ाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2024-25 में कुछ केस खत्म हुए, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने से राजनीति से दूर रहीं। उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा थी पति की विरासत और लोकतंत्र के लिए संघर्ष। आज उनका बेटा तारिक रहमान बीएनपी की कमान संभाल रहे हैं।
बेगम खालेदा जिया का सफर बताता है कि एक साधारण गृहिणी भी साहस और इच्छाशक्ति से इतिहास रच सकती है
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