लालू के घर का ‘महाभारत’: सबसे छोटी बेटी रोहिणी ने क्यों किया अपने ही परिवार को ‘ख़ारिज’?

लालू के घर का ‘महाभारत’: सबसे छोटी बेटी रोहिणी ने क्यों किया अपने ही परिवार को ‘ख़ारिज’?

2020 में 75 सीटें जीतने वाली RJD, 2025 चुनाव में मात्र 25 सीटों पर सिमटी।

बिहार की राजनीति के बड़े नेता लालू प्रसाद यादव आज मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। एक समय था जब उनकी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), बहुत ताकतवर थी, लेकिन अब परिवार में झगड़े और चुनावों में बड़ी हार ने पार्टी को खतरे में डाल दिया है।
लालू जी ने अपने परिवार को राजनीति में आगे बढ़ाया। यह कहानी दिखाती है कि जब परिवार और सत्ता साथ-साथ चलती है, तो चीज़ें कैसे खराब हो सकती हैं।


पार्टी टूटने की वजह: परिवार को सबसे ऊपर रखना


लालू यादव पर जब भ्रष्टाचार के आरोप लगे, तो उन्हें अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। यहीं से परिवार को राजनीति में लाने की शुरुआत हुई। लेकिन जैसे-जैसे उनके बच्चे बड़े हुए, यह परिवारवाद ही मुश्किल बन गया।
लालू जी ने हमेशा पार्टी से ज़्यादा परिवार को महत्व दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी के पुराने और मेहनती नेताओं को जगह नहीं मिली, और सभी बड़े पद परिवार के लोगों के लिए फिक्स हो गए।


घर का झगड़ा सार्वजनिक हुआ: तेजस्वी बनाम रोहिणी


आज लालू जी के घर (पटना में) में बड़ी दरार पड़ गई है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य (जिन्होंने लालू जी को किडनी दान की थी) अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके खास दोस्तों पर गुस्सा होकर घर छोड़कर चली गईं।
रोहिणी के आरोप: रोहिणी ने कहा कि तेजस्वी के दोस्तों ने उन्हें घर से निकलने को कहा, उन्हें अपमानित किया गया और उन पर हमला भी हुआ।
किसने साथ दिया: रोहिणी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव और उनके चाचा साधू यादव ने खुलकर रोहिणी का समर्थन किया है।
पुराने झगड़े: दो साल पहले, बड़े बेटे तेज प्रताप की पूर्व पत्नी ऐश्वर्या राय को भी ऐसे ही झगड़े के बाद घर से निकाल दिया गया था।
पहले बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी से निकालना और अब रोहिणी का सबके सामने विरोध करना दिखाता है कि लालू जी अपने परिवार पर नियंत्रण खो चुके हैं।

‘गंदी किडनी’ विवाद:

लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के बाद अपने परिवार और राजनीति से नाता तोड़ने का कठोर बयान दिया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर घोषणा की कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार को ‘disown’ कर रही हैं, जिसका कारण उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी, सांसद संजय यादव और रमीज को बताया। रोहिणी ने आरोप लगाया कि पार्टी की हार पर सवाल उठाने के लिए उन्हें अपमानित किया गया, गालियाँ दी गईं और यहाँ तक कि उन पर हमला करने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता लालू यादव को किडनी दान करने जैसे बड़े त्याग पर भी सवाल उठाए गए और उन्हें ‘गंदी किडनी’ कहा गया। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने भाई तेजस्वी को त्यागा है, जबकि उनके माता-पिता (लालू और राबड़ी देवी) और बहनें उनके समर्थन में हैं। उनका यह भावनात्मक बयान RJD की हार के बाद परिवार के भीतर गहरे मतभेद और सत्ता संघर्ष को उजागर करता है, जहाँ रोहिणी ने विवाहित बेटियों से मायके के लिए बलिदान न देने की अपील करते हुए कहा कि सवाल पूछने पर उन्हें अपने ससुराल जाने को कह कर अपमानित किया जाता है।


पार्टी को क्या नुकसान हुआ?


इस परिवारिक झगड़े का सीधा असर RJD के चुनावी नतीजों पर पड़ा है, जो कि बहुत बुरा है:
बड़ी हार: 2020 के चुनाव में RJD को 75 सीटें मिली थीं, लेकिन हाल के 2025 के चुनाव में यह गिरकर सिर्फ़ 25 सीटों पर आ गई—यह उनकी अब तक की सबसे खराब हार है।
NDA की जीत: दूसरी तरफ, NDA (बीजेपी और उनके साथी) ने 202 सीटें जीतकर बड़ी जीत हासिल की।


पार्टी पर बुरा असर:

  1. कार्यकर्ता निराश: घर के झगड़े देखकर RJD के कार्यकर्ताओं का हौसला टूट गया है।
  2. तेजस्वी पर सवाल: रोहिणी के आरोपों से तेजस्वी की लीडरशिप पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे लोगों का भरोसा कम हुआ है।
  3. परिवारवाद की खराब छवि: लोगों को लग रहा है कि यादव परिवार सिर्फ सत्ता के लिए लड़ रहा है, जिससे परिवार की राजनीति की छवि खराब हुई है।
    लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक सफर अब खत्म होने की ओर है। उन्होंने जिस परिवार को आगे बढ़ाया, वही परिवार आज उनकी पार्टी और उनकी विरासत के टूटने का कारण बन गया है।

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