रिठाला अग्निकांड: दिल्ली मेट्रो स्टेशन के पास भीषण आग, एक की मौत और 500 झुग्गियां राख

रिठाला अग्निकांड: दिल्ली मेट्रो स्टेशन के पास भीषण आग, एक की मौत और 500 झुग्गियां राख

ज्वलनशील सामग्री और एलपीजी सिलेंडर विस्फोट ने तबाही को बढ़ाया; प्रशासन ने शुरू की जांच

दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में शुक्रवार देर रात रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास बंगाली बस्ती में लगी भीषण आग ने एक बार फिर अनियोजित शहरी बस्तियों की गंभीर सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है। इस अग्निकांड में एक व्यक्ति की मौत हो गई, और लगभग 500 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं।

तबाही की रात: 29 दमकल गाड़ियां तैनात

दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को शुक्रवार रात करीब 10:56 बजे बंगाली बस्ती में आग लगने की सूचना मिली। यह बस्ती रिठाला मेट्रो स्टेशन और दिल्ली जल बोर्ड परिसर के बीच स्थित एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है।

प्रारंभ में, 15 दमकल गाड़ियों को भेजा गया, लेकिन आग की तीव्रता और उसके तेजी से फैलने को देखते हुए, अग्निशमन अधिकारियों ने इसे “मध्यम श्रेणी” (Medium category) का अग्निकांड घोषित कर दिया। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए जल्द ही और अधिक यूनिट भेजी गईं, और कुल 29 फायर टेंडरों को पूरी रात आग बुझाने के और कूलिंग ऑपरेशन के लिए लगाया गया।

दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारी एसके दुआ ने बताया कि घंटों की मशक्कत के बाद सुबह तक आग पर काबू पा लिया गया।

मौत और नुकसान: एलपीजी सिलेंडर बने विनाश का कारण

यह त्रासदी स्थानीय निवासियों के लिए भारी क्षति लेकर आई है। अग्निशमन कर्मियों ने घटनास्थल से एक वयस्क शव बरामद किया है, जिसकी पहचान की जा रही है। इसके अलावा, एक बच्चा घायल हुआ है, जिसे गंभीर चोटों के साथ एम्बुलेंस द्वारा सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।

बस्ती में आग इतनी तेजी से फैली कि निवासियों को संभलने का मौका नहीं मिला। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आग को सबसे ज्यादा हवा मिली झुग्गियों के अंदर रखे गए कई एलपीजी सिलेंडरों के लगातार विस्फोट से, जिसने आग की एक दीवार खड़ी कर दी और दहशत फैला दी।

आग के तेजी से फैलने का संरचनात्मक कारण बस्ती का निर्माण है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि झुग्गियां मुख्य रूप से लकड़ी, प्लास्टिक की चादरों और तिरपाल जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों से निर्मित थीं, जिससे लगभग 500 झोपड़ियां मिनटों में जल गईं।

जांच और सुरक्षा चुनौतियां

दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के सटीक कारण की जांच अभी बाकी है, और विस्तृत जांच कूलिंग ऑपरेशन खत्म होने के बाद शुरू की जाएगी। प्रारंभिक संदेह है कि आग शॉर्ट सर्किट या लापरवाही से खाना पकाने के कारण शुरू हुई होगी।

यह घटना एक बार फिर दिल्ली के झुग्गी क्लस्टरों की अंतर्निहित असुरक्षा को दर्शाती है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) लंबे समय से चेतावनी देती रही है कि इन बस्तियों में भीड़भाड़, संकीर्ण गलियां (जो दमकल वाहनों की आवाजाही को बाधित करती हैं ) और ज्वलनशील सामग्री का भारी उपयोग उन्हें “टाइम बम” बना देता है।

पिछली ऐसी ही त्रासदियों के बाद, सरकारी एजेंसियां आमतौर पर राहत और पुनर्वास के लिए कदम उठाती हैं। पूर्व में रिठाला में हुए बड़े अग्निकांड (दिसंबर 2016) के बाद, अधिकारियों ने विस्थापित परिवारों के लिए बैंक खाते खोलने और पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) तेजी से बनवाने की प्रक्रिया शुरू की थी, ताकि उन्हें सरकारी सहायता (जैसे ₹25,000 की अनुग्रह राशि) मिल सके। प्रभावित परिवारों के लिए सहायता की व्यवस्था की जा रही है, क्योंकि आग ने उनके घर और जीवनयापन के लिए जरूरी सामान नष्ट कर दिया है। फिलहाल, अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं, और पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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