राहुल गांधी का ‘H-Files’ का खुलासा हरियाणा में 25 लाख फर्जी वोटों का दावा, ‘डुप्लीकेट वोटर’ लिस्ट पर EC से मांगा जवाब

राहुल गांधी का ‘H-Files’ का खुलासा हरियाणा में 25 लाख फर्जी वोटों का दावा, ‘डुप्लीकेट वोटर’ लिस्ट पर EC से मांगा जवाब

EC और सत्ता पक्ष का पलटवार: आयोग ने आरोपों को निराधार बताया, कहा- “डुप्लीकेट वोटर हटाने का विरोध क्यों?

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का आगाज़ होने जा रहा है, और माहौल में तनाव व सस्पेंस दोनों है। एक ओर चुनाव आयोग (ECI) शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए 48 घंटे के ‘साइलेंस पीरियड’ (शांत अवधि) को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर, विपक्षी नेता राहुल गांधी ने हरियाणा के कथित ‘वोट चोरी’ मामले को उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर ही ‘हाइड्रोजन बम’ दाग दिया है। यह दोनों मुद्दे बिहार के मतदाताओं के लिए इस बार के चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण हैं।

1. मतदान से पहले की पाबंदियां: शांति चाहिए, शोर नहीं
बिहार में मतदान प्रक्रिया शुरू होने से ठीक 48 घंटे पहले चुनाव आयोग द्वारा जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए जाते हैं। इन नियमों का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता किसी भी तरह के दबाव या प्रचार के शोर से दूर रहकर शांति से अपने विवेक का उपयोग कर सकें।
मुख्य प्रतिबंध (साइलेंस पीरियड):
• प्रचार पर पूर्ण रोक: कोई भी सार्वजनिक सभा, रैली, रोड शो या लाउडस्पीकर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित होता है।
• मीडिया ब्लैकआउट: टीवी, रेडियो, सिनेमा या सोशल मीडिया जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर चुनाव से जुड़ी सामग्री का प्रसारण रुक जाता है।
• शराबबंदी (ड्राई डे): मतदान खत्म होने तक शराब की बिक्री और वितरण पर पूरी तरह रोक रहती है।
• बाहरी नेताओं की निकासी: जो लोग उस क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता नहीं हैं, उन्हें चुनाव क्षेत्र छोड़कर जाना अनिवार्य होता है।
नियम तोड़ने पर सज़ा: इन नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को दो साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। ECI का कड़ा रुख यह बताता है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।


2. राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ आरोप: 25 लाख फर्जी वोटों का दावा
शांत अवधि लागू होने से ठीक पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर हरियाणा चुनाव में 25 लाख से अधिक फर्जी वोटों की हेराफेरी का सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने इसे ‘H-Files’ नाम दिया और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए।
आरोप के मुख्य बिंदु:
• डुप्लीकेट और बल्क वोटर्स: राहुल गांधी ने 5 लाख से अधिक डुप्लीकेट वोटर्स और 19 लाख से अधिक ‘बल्क वोटर्स’ (एक ही पते पर बड़ी संख्या में दर्ज मतदाता) का आंकड़ा पेश किया।
• एक ही महिला, 223 नाम: उन्होंने एक महिला की तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि वोटर लिस्ट में उसी तस्वीर को अलग-अलग नाम से 223 बार तक दर्ज किया गया।
• बिहार पर खतरा: राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया को ‘हाइड्रोजन बम स्ट्रैटेजी’ बताते हुए परोक्ष रूप से संकेत दिया कि बिहार जैसे अन्य चुनावों में भी ऐसी ही धांधली हो सकती है।


ECI और सत्ता पक्ष का पलटवार:


राहुल गांधी के इन आरोपों पर चुनाव आयोग और सत्ताधारी दल ने तुरंत पलटवार किया।
• चुनाव आयोग का रुख: ECI ने इन दावों को निराधार बताया और पूछा कि जब वोटर लिस्ट संशोधन का काम चल रहा था, तब कांग्रेस ने आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई। आयोग ने तर्क दिया कि फर्जी नाम हटाना एक नियमित प्रक्रिया है।
• सत्ता पक्ष का जवाब: सत्ताधारी पार्टी ने इन आरोपों को बिहार चुनाव से पहले विपक्ष की हताशा और हार का बहाना बताया। उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश करार दिया।


बिहार के लिए बड़ा सवाल


बिहार में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए लाखों सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं और सख्त प्रतिबंध लागू हैं। लेकिन राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
एक तरफ़, ECI मतदान स्थल के बाहर शांति और अनुशासन बनाए रखने पर ज़ोर दे रहा है; दूसरी तरफ़, विपक्ष मतदान स्थल तक पहुँचने वाले वोटों की सत्यता पर सवाल उठा रहा है। बिहार के मतदाताओं के लिए यह जरूरी है कि वे न केवल मतदान के दिन सुरक्षा और शांति का ध्यान रखें, बल्कि वोटर लिस्ट में अपना और अपने परिवार का नाम भी सही से जांच लें। लोकतंत्र के इस पर्व में पारदर्शिता और निष्पक्षता ही सबसे बड़ी चुनौती है।

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