साबुदाना पचने में आसान और ग्लूटेन-फ्री है, लेकिन इसके अधिक सेवन से ब्लड शुगर स्पाइक्स, वजन बढ़ना और भूख असंतुलित हो सकती है।

इस नवरात्रि में साबुदाना का सही इस्तेमाल कैसे करें: विशेषज्ञ की सलाह | वरात्रि का समय भारत में व्रत और उपवास का प्रमुख अवसर माना जाता है। इस दौरान कई लोग पारंपरिक रूप से साबुदाना यानी टैपियोका पर्ल्स का सेवन करते हैं। इसे हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन माना जाता है। लेकिन क्या साबुदाना वास्तव में पोषण का अच्छा स्रोत है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ और गट हेल्थ कोच, पायल कोठारी, जो ‘द गट’ नामक किताब की लेखक भी हैं, इस बारे में बताती हैं कि साबुदाना सिर्फ त्वरित ऊर्जा देता है, लेकिन इसमें आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है।
साबुदाना मुख्य रूप से स्टार्च से बना होता है, जो कि कैसावा पौधे की जड़ों से निकाला जाता है। पायल के अनुसार, “साबुदाना लगभग पूरी तरह से कार्बोहाइड्रेट है, ग्लूटेन और डेयरी-फ्री है, लेकिन इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन या मिनरल्स बहुत कम हैं। 100 ग्राम साबुदाना लगभग 350 कैलोरी देता है, लेकिन इसमें केवल 0.2 ग्राम प्रोटीन और नगण्य मात्रा में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं।” यही कारण है कि साबुदाना अक्सर ‘एनर्जी फूड’ कहा जाता है – यह जल्दी ऊर्जा देता है, लेकिन पोषण बहुत कम।
जब साबुदाना की तुलना मैदा या परिष्कृत आटे से की जाती है, तो पायल बताती हैं कि साबुदाना हल्का पचता है और ग्लूटेन-फ्री होने की वजह से इसे पचाना आसान है। फिर भी, पोषण के दृष्टिकोन से, दोनों ही कम गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट हैं। साबुदाना का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी अधिक होता है, जिससे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और कुछ समय बाद गिरावट आ जाती है। लंबे समय में इससे वजन बढ़ने, इंसुलिन प्रतिरोध और भूख संतुलन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
पायल कोठारी कहती हैं कि उपवास के दौरान शरीर को आराम देने और आंत के स्वास्थ्य को सुधारने का मौका मिलता है। लेकिन केवल साबुदाना पर निर्भर होना सही नहीं है। यह कुछ लोगों, विशेष रूप से कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है, लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। उनका कहना है कि “यह सब बहुत व्यक्तिगत होता है।”
स्वस्थ और संतुलित उपवास के लिए बेहतर विकल्प:
पायल ने कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ सुझाए हैं, जिन्हें साबुदाना के साथ शामिल किया जा सकता है या उससे बेहतर विकल्प माना जा सकता है:
- राजगिरा (अमरनाथ): प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन से भरपूर; रोटियां या खिचड़ी बनाई जा सकती हैं।
- कुट्टू (बकव्हीट): फाइबर और प्रोटीन से समृद्ध; ऊर्जा बनाए रखने और ब्लड शुगर संतुलित करने में मदद करता है।
- सिंघाड़ा (Water Chestnut Flour): ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर; पोटेशियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत।
- समा/सामक (Barnyard Millet): ग्लूटेन-फ्री, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर; साबुदाना से बेहतर विकल्प।
- नट्स, बीज और डेयरी: बादाम, अखरोट, मखाना, चिया सीड्स, पनीर और दही उपवास के दौरान प्रोटीन और पाचन के लिए अच्छे।
पायल का सुझाव है कि नवरात्रि में साबुदाना को भोजन का मुख्य हिस्सा न बनाया जाए। इसके बजाय इसे प्रोटीन और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, साबुदाना की खिचड़ी के साथ दही, पनीर या नट्स शामिल करें, ताकि शुगर क्रैश और एनर्जी स्पाइक्स से बचा जा सके।
सही तरीके से उपवास करने से यह केवल शरीर की सफाई और हल्का ऊर्जा देने का माध्यम नहीं बनता, बल्कि आंत और पाचन तंत्र के लिए भी अत्यंत लाभकारी और सात्विक अनुभव बन जाता है। इसलिए इस नवरात्रि, साबुदाना का सही उपयोग और पोषण संतुलन पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है।
Also Read : विश्व आयुर्वेद दिवस 2025: आयुर्वेद की अनमोल धरोहर पंचकर्म से करें शरीर-मन का संपूर्ण शुद्धिकरण
