इंद्रेश उपाध्याय जी ने किया प्रेम विवाह , जानिए कौन बनी उनकी जीवन साथी

इंद्रेश उपाध्याय जी ने किया प्रेम विवाह , जानिए कौन बनी उनकी जीवन साथी

इंद्रेश उपाध्याय जी का विवाह जयपुर के मसूर ताज होटल में हुआ और जया किशोरी, बाबा बागेश्वर, कुमार विश्वास और कई महान संत और राजनेता विवाह में दिखे

मसूर कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने शिर्पा शर्मा के साथ 5 दिसंबर 2025 को शादी की, शिर्पा शर्मा हरियाणा से हैं। महाराज इंद्रेश उपाध्याय जी का विवाह जयपुर के मसूर ताज होटल में हुआ और जया किशोरी, बाबा बागेश्वर, कुमार विश्वास और कई महान संत और राजनेता विवाह में दिखे। भव्य मंडप धूम-धाम से तैयार किया गया था और सुंदर इंद्रेश उपाध्याय उनके साथ थे। उनकी शादी की पोस्ट सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुईं। सजाया गया और शादी के लिए तिरुपति बालाजी मंदिर का सबसे शानदार विवाह मंडप।

आखिर कौन है शिर्पा शर्मा?

शिर्पा शर्मा जो हरियाणा के यमुना नगर की रहने वाली हैं। फिलहाल अभी, उनका परिवार पंजाब के अमृतसर में रहते हैं | शिर्पा शर्मा के पिता श्री यूपी के डीएसपी रह चुके हैं। उनका नाम पंडित हरेंद्र शर्मा है। शिप्रा बड़े ही सीधे और सरल स्वभाव की हैं और वह पारंपरिक, आध्यात्मिक जुड़ाव से जुड़ी हुई हैं। फिलहाल उनकी शिक्षा और प्रोफेशनल लाइफ की जानकारी को निजी रखा गया है।

आखिर कैसे मिले इंद्रेश उपाध्याय जी अपनी दुल्हन से?

जैसा कि हम जानते हैं इंद्रेश उपाध्याय जी बड़े हैं जाने माने कथावाचक हैं और वह अक्षर वृन्दावन में भक्ति और कथा करते रहते हैं | शिर्पा जी भी भगवानकृष्ण की बड़ी भक्त हैं और अपनी धार्मिक कार्यों से जुड़ी हुई हैं | कहा जाता है कि दोनों की मुलाकात भक्ति के दौरान वृन्दावन में हुआ करती थी ,जहाँ शिर्पा जी अक्षर भक्ति के लिए आए जाया करती थी ,ठीक वैसे ही एक कथा के दौरान दोनों की मुलाकात हुई | मुलाकात के बाद दोनों परिवार की जान पहचान मजबूत होने लगी और समय के साथ और मजबूत होती चली गई। रिश्ते की नींव दोनों को धार्मिक और सरल स्वभाव से जोड़े रखा, परिवार की मंजूरियों के कारण ही यह रिश्ता तय हो पाया। यह विवाह दोनों परिवारों की सहमति और आशीर्वाद से संपन्न हुआ है।


कौन है इंदेश उपाध्याय?

इंदेश उपाध्याय जी वृंदावन, उत्तर प्रदेश से है और जाने माने मशहूर आध्यात्मिक कथावाचक है । उनका जन्म 7 अगस्त 1997 को पवित्र नगरी वृंदावन में एक धार्मिक वैष्णव ब्राह्मण परिवार में हुआ। यह श्रीमद् भागवत पुराण की कथाओ आध्यात्मिक विचार और भजन के लिए मशहूर है। उनके पिता श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री (ठाकुर जी) भी प्रसिद्ध भागवत कथावाचक हैं। इंद्रेश उपाध्याय जी बचपन से ही आध्यात्मिक माहौल मै पले बडे और उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। उन्होने आपनी शिक्षा कान्हा माखन पब्लिक स्कूल, वृंदावन से पूरी की। पिता के मार्गदर्शन में उन्होंने 13 साल की उम्र तक पूरा श्रीमद् भागवत पुराण कंठस्थ कर लिया, जो अत्यंत अद्भुत और समर्पण का प्रमाण है।

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