चीन, भारत, यूएई, यूरोपीय यूनियन जैसे देश प्रभावित हो सकते हैं, खासकर तेल और पेट्रोकेमिकल्स के आयात पर। ट्रंप का मकसद ईरान की सरकार को कमजोर करना है!
ट्रंप ने फिर पुराना हथियार निकाला – टैरिफ!12 जनवरी 2026 को ट्रुथ सोशल पर उन्होंने ऐलान किया: “तुरंत प्रभाव से, ईरान से बिजनेस करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ हर ट्रेड पर 25% टैरिफ चुकाएगा।
“ये बड़ा धमाका ठीक तब हुआ, जब ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जबरदस्त विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 600 से ज्यादा लोग इस हिंसा में मारे जा चुके हैं। ट्रंप का ये कदम ईरान की सरकार पर दबाव बढ़ाने का तरीका लगता है, ताकि वो प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई रोके या कमजोर पड़े।
ट्रंप को ईरान से क्या समस्या है?
ट्रंप हमेशा से ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। उनके पहले कार्यकाल में उन्होंने ईरान न्यूक्लियर डील से अमेरिका को बाहर निकाला था और कड़े प्रतिबंध लगाए थे। ट्रंप का मानना है कि ईरान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, मिडिल ईस्ट में अस्थिरता फैलाता है और उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम से खतरा है।
अब ईरान में एंटी-गवर्नमेंट प्रोटेस्ट्स (जो महिलाओं के अधिकारों से शुरू हुए थे) तेज होने पर ट्रंप इसे मौका मान रहे हैं ईरान को आर्थिक रूप से घेरने का। ट्रम्प का कहना है कि ये टैरिफ ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करेंगे, जहां पहले से ही मुद्रा गिर रही है, महंगाई 70% तक है और खाने-पीने की कमी ओर होगी । ट्रंप चाहते हैं कि दूसरे देश ईरान से दूर रहें, ताकि तेहरान सरकार अलग-थलग पड़ जाए।
किन देशों पर लगेगा ये टैरिफ?
ट्रंप ने “किसी भी देश” कहा है, जो ईरान से कोई भी बिजनेस करता हो – चाहे वो तेल खरीदना हो, पेट्रोकेमिकल्स या कोई और ट्रेड। ये काफी ब्रॉड है, लेकिन मुख्य रूप से प्रभावित होने वाले देश हैं:
- चीन: ईरान से सबसे ज्यादा तेल आयात करता है, तो ये टैरिफ चीन-अमेरिका ट्रेड वॉर को और भड़का सकता है।
- भारत: ईरान से तेल और अन्य सामान आयात करता है, हालांकि भारत पहले से ही अमेरिकी दबाव में इसे कम कर चुका है।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): ईरान से ट्रेड करता है, खासकर री-एक्सपोर्ट।
- यूरोपीय यूनियन (EU): कई यूरोपीय देश ईरान से बिजनेस करते हैं, जैसे जर्मनी, फ्रांस।
- अन्य: तुर्की, दक्षिण कोरिया, जापान जैसे देश भी लिस्ट में आ सकते हैं, जो ईरान से तेल या गैस लेते हैं।
ट्रंप ने इसे “फाइनल और कन्क्लूसिव” कहा है, यानी अब इस पर कोई बहस नहीं होगी। यह टैरिफ ईरान की इंपोर्ट होने वाली चीज़ों को और महंगा कर सकता है—जिनमें ज़्यादातर खाने-पीने का सामान और दवाइयां हैं। इसका सीधा असर वहां की आम जनता पर पड़ेगा, जिन पर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा।
दुनिया भर के ट्रेड एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी, खासकर एनर्जी सेक्टर में। यह फैसला कामयाब होगा या उल्टा असर डालेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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