EPS-95 पेंशनरों का बड़ा विरोध: प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग

EPS-95 पेंशनरों का बड़ा विरोध: प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पेंशनरों के मुद्दों पर ठोस कदम नहीं, आंदोलन और तेज़ करने की चेतावनी जारी।

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2025:

कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) के तहत आने वाले हज़ारों पेंशनरों ने सोमवार को नई दिल्ली के ईस्ट किदवई नगर स्थित ईपीएफओ मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी वर्षों पुरानी मांगों के तत्काल समाधान की मांग करते हुए सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की अपील की।

यह प्रदर्शन ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) द्वारा आयोजित किया गया था, जो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी मंडल (CBT) की बैठक के साथ-साथ हुआ। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और कई अन्य राज्यों से आए पेंशनरों ने इस आंदोलन में भाग लिया, जिससे यह हाल के महीनों में ईपीएस-95 लाभार्थियों का सबसे बड़ा समन्वित विरोध प्रदर्शन बन गया।

EPS-95 पेंशनरों का बड़ा विरोध: प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग

पेंशनरों ने अपनी चार प्रमुख मांगों को दोहराया —

  • न्यूनतम पेंशन ₹7,500 प्रति माह तय की जाए,
  • महंगाई भत्ता (डीए) का पूरा भुगतान बहाल किया जाए,
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार उच्च पेंशन लागू की जाए,
  • और सेवानिवृत्त कर्मियों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

सभा को संबोधित करते हुए कमांडर अशोक राऊत, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पेंशनरों की दुर्दशा की अनदेखी कर रही है।

उन्होंने कहा, “माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए न्याय अब भी दूर है। जिन लोगों ने जीवनभर देश की सेवा की, वे आज गुजर-बसर के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील करते हैं ताकि पेंशन व्यवस्था में गरिमा और न्याय बहाल किया जा सके।”

EPS-95 पेंशनरों का बड़ा विरोध: प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग

वीरेंद्र सिंह राजावत, समिति के महासचिव ने भी सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग करते हुए कहा, “पेंशनरों ने अब तक अत्यंत धैर्य रखा है। अब सरकार को संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान करना चाहिए।”

समिति के कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेता — सुरेश डंगवाल, राजीव भटनागर, ओम शंकर तिवारी, जे.पी. मिश्रा, शशिभान सिंह, हीरालाल विजयवर्गीय, बी.एस. राणा, दिलीप पांडे, जैरूप सिंह परिहार, राजेश कुमार हुडड, जगत सिंह डोभाल और अजीत कुमार घाटगे — भी इस मौके पर उपस्थित रहे और आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया।

प्रदर्शन का समापन पेंशनरों के चार्टर पर त्वरित कार्रवाई की मांग वाले प्रस्ताव को पारित कर किया गया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही, तो आने वाले महीनों में यह आंदोलन और तेज़ किया जाएगा तथा इसे राज्य की राजधानियों और क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालयों तक विस्तारित किया जाएगा।

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