1997 की क्लासिक वॉर फिल्म और 2026 की सीक्वल की तुलना, उनके बजट, स्टारकास्ट, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और दर्शकों के रिस्पॉन्स के आधार पर खास रिपोर्ट।
नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा में देशभक्ति पर बनी फिल्मों की बात हो और बॉर्डर का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं। 1997 में रिलीज हुई जे.पी. दत्ता की यह फिल्म न सिर्फ अपने समय की सबसे बड़ी हिट बनी थी, बल्कि उसने वॉर फिल्मों के लिए एक नया बेंचमार्क भी सेट किया था। अब करीब तीन दशक बाद बॉर्डर 2 के रूप में उसी भावना को नए दौर के दर्शकों के सामने पेश किया गया है। बदलते वक्त, तकनीक और दर्शक वर्ग के साथ दोनों फिल्मों की बॉक्स ऑफिस यात्रा भी काफी अलग नजर आती है।
बदल गया दौर, जैसे बदली बॉर्डर 2 की कहानी
1997 में जब बॉर्डर रिलीज हुई थी, तब मल्टीप्लेक्स कल्चर नहीं था और टिकट के दाम बेहद कम हुआ करते थे। इसके बावजूद फिल्म ने करीब 3.7 करोड़ दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा और भारत में लगभग 40 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जो उस दौर में एक रिकॉर्ड माना गया। दुनियाभर में भी फिल्म ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और यह अब तक की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई।
वहीं बॉर्डर 2 एक बिल्कुल अलग सिनेमाई माहौल में रिलीज हुई है। बड़े बजट, मल्टीप्लेक्स नेटवर्क, एडवांस बुकिंग और पैन-इंडिया रिलीज़ के दौर में फिल्म ने पहले ही दिन करीब 30 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि आज बॉक्स ऑफिस पर सफलता का पैमाना कितना बदल चुका है।
स्टार पावर और स्केल ने बदला खेल
जहां बॉर्डर की ताकत उसकी भावनात्मक कहानी, संवाद और किरदार थे, वहीं बॉर्डर 2 को बड़े स्केल, आधुनिक तकनीक और मल्टी-स्टार कास्ट का फायदा मिला है। सनी देओल के साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को युवा दर्शकों से भी जोड़ा है। यही वजह है कि फिल्म ने ओपनिंग डे पर रणवीर सिंह की धुरंधर जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया।
क्या बॉर्डर 2 बना पाएगी लंबी रेस का रिकॉर्ड?
ट्रेड एक्सपर्ट्स की मानें तो बॉर्डर 2 की शुरुआत मजबूत जरूर है, लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी। पहले वीकेंड और वर्ड ऑफ माउथ यह तय करेंगे कि फिल्म 150 करोड़, 300 करोड़ या उससे आगे तक पहुंच पाती है या नहीं। तुलना करें तो बॉर्डर की सबसे बड़ी ताकत उसका लंबा थिएट्रिकल रन था, जिसने उसे ऐतिहासिक फिल्म बना दिया।
बॉर्डर और बॉर्डर 2 दोनों ही अपने-अपने दौर की प्रतिनिधि फिल्में हैं। पहली ने सीमित संसाधनों में इतिहास रचा, जबकि दूसरी आधुनिक सिनेमा के सभी हथियारों के साथ मैदान में उतरी है। बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों में बॉर्डर 2 भले ही तेज शुरुआत कर चुकी हो, लेकिन भावनात्मक प्रभाव और सांस्कृतिक विरासत के मामले में बॉर्डर आज भी एक मिसाल बनी हुई है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या बॉर्डर 2 सिर्फ ओपनिंग तक सीमित रहती है या लंबी दौड़ में भी खुद को एक यादगार देशभक्ति फिल्म के रूप में स्थापित कर पाती है।
