पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को 22 साल पुराने धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बरी कर दिया, जानिए पूरा मामला, कोर्ट का फैसला और मार्टिन का बयान
नई दिल्ली: 21 अगस्त, 2026 का दिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन के लिए राहत लेकर आया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े 22 साल पुराने मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला 2004 में दर्ज एक FIR से जुड़ा था और लंबे समय से अदालत में चल रहा था।
मार्टिन पर यूके के नकली इमिग्रेशन स्टैम्प का इस्तेमाल करने, विदेश यात्रा का इंतज़ाम करने और पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोप थे। हालाँकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रहा। इन्हीं आधारों पर अदालत ने उन्हें राहत दी।
भारत के लिए 10 वनडे खेल चुके हैं जैकब मार्टिन
जैकब मार्टिन का क्रिकेट करियर भले ही छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका नाम काफी जाना-पहचाना था। दाएं हाथ के बल्लेबाज मार्टिन ने भारत के लिए 1999 से 2001 के बीच 10 वनडे मैच खेले। इन मुकाबलों में उन्होंने 158 रन बनाए और उनका बल्लेबाजी औसत 22.57 रहा।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले उन्होंने बड़ौदा के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था। 1998-99 रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने 1,000 से ज्यादा रन बनाए थे और बड़ौदा की टीम की कप्तानी भी की थी।
मार्टिन का अंतरराष्ट्रीय करियर लंबा नहीं चला, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका अनुभव और प्रदर्शन उन्हें भारतीय क्रिकेट के उस दौर के चर्चित खिलाड़ियों में शामिल करता था।
2004 में शुरू हुआ था कानूनी विवाद
मार्टिन के खिलाफ मामला 2004 में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पुलिस द्वारा दर्ज FIR के बाद सामने आया। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471 और 120B के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा पासपोर्ट एक्ट की धारा 12 भी लगाई गई थी।
मामले का संबंध एक ऐसे व्यक्ति से था, जिसने कथित तौर पर यूके में तय अवधि से ज्यादा समय तक रहने के बाद अपने पासपोर्ट पर फर्जी इमिग्रेशन स्टांप लगवाया था। भारत लौटने के बाद मामला सामने आया और जांच के दौरान जैकब मार्टिन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया।
मार्टिन का कहना था कि उनका नाम मूल FIR में नहीं था और जांच के दौरान उन्हें इस मामले में शामिल किया गया।
यूके दौरे और फर्जी इमिग्रेशन स्टांप से जुड़ा था मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले में जिस व्यक्ति का नाम सामने आया, वह एक क्रिकेट टीम के साथ यूके गया था। आरोप था कि उसने वहां निर्धारित वीजा अवधि से ज्यादा समय तक रहने के बाद फर्जी इमिग्रेशन स्टांप का इस्तेमाल किया।
मार्टिन ने अपने बयान में बताया कि 2004 में उनकी एक क्रिकेट टीम यूके खेलने गई थी। टीम के बाकी खिलाड़ी भारत लौट आए, लेकिन एक खिलाड़ी वहां रुक गया। बाद में उसके वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद यूके में रहने और फर्जी स्टांप लगवाने का मामला सामने आया।
मार्टिन ने यह भी कहा कि इसी घटनाक्रम के बाद जांच में उनका नाम सामने आया, जबकि उनका नाम शुरुआती FIR में नहीं था।
2011 में हुई थी जैकब मार्टिन की गिरफ्तारी
यह मामला कई वर्षों तक जांच और कानूनी प्रक्रिया में रहा। जैकब मार्टिन को अप्रैल 2011 में दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
2015 में भी यह मामला अदालत में चर्चा में रहा था। उस समय दिल्ली की एक अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। उस दौर की रिपोर्टों में मामले को फर्जी क्रिकेट टीम और वीजा से जुड़े आरोपों से जोड़ा गया था।
इसके बाद भी मामला समाप्त नहीं हुआ और आखिरकार 22 साल बाद अदालत के फैसले के साथ मार्टिन को बड़ी राहत मिली।
अदालत को नहीं मिले पर्याप्त सबूत
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की कहानी को मजबूत करने वाले पर्याप्त सबूत सामने नहीं आ सके। अदालत ने माना कि मार्टिन द्वारा शिकायतकर्ता या उसके परिवार से पैसे लेने का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला।
इसके अलावा यह भी साबित नहीं हो पाया कि जिस स्पोर्ट्स क्लब या क्रिकेट टीम को मामले से जोड़ा गया था, उसका स्वामित्व या नियंत्रण जैकब मार्टिन के पास था। कई गवाह भी आरोपों को निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सके।
यही कमजोरियां अभियोजन के मामले के लिए महत्वपूर्ण साबित हुईं और अदालत ने जैकब मार्टिन को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
22 साल के मुकदमे ने छीना नौकरी और सुकून
अदालत से राहत मिलने के बाद जैकब मार्टिन ने मीडिया से बातचीत में अपने लंबे कानूनी संघर्ष का दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि इस मामले ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला।
मार्टिन के मुताबिक, 22 साल तक मामले को लेकर उन्हें लगातार तनाव झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान उनकी रेलवे की नौकरी चली गई और उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से भी लंबे समय तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि उनके लिए यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं है, बल्कि जिंदगी में एक बड़ा बदलाव है। इतने लंबे इंतजार के बाद मिली राहत को उन्होंने अपने जीवन का बेहद महत्वपूर्ण मोड़ बताया।
BCCI से भी जुड़ा रहा मार्टिन का मामला
जैकब मार्टिन का नाम इस मामले के कारण भारतीय क्रिकेट प्रशासन के संदर्भ में भी सामने आता रहा। 2015 की रिपोर्टों के मुताबिक, BCCI ने उन्हें पूर्व खिलाड़ियों के लिए मिलने वाली एकमुश्त सहायता राशि के तौर पर 30 लाख रुपये दिए थे। उस समय तक मामला अदालत में लंबित था।
यह तथ्य दिखाता है कि कानूनी विवाद के बावजूद मार्टिन का क्रिकेट करियर और पूर्व खिलाड़ी के रूप में उनका दर्जा चर्चा में बना रहा।
अब 22 साल बाद मिली राहत
जैकब मार्टिन के लिए यह फैसला सिर्फ अदालत से बरी होने की खबर नहीं है। यह उस लंबे दौर का अंत है, जिसने उनके क्रिकेट के बाद के जीवन को प्रभावित किया।
54 साल की उम्र में मिली यह राहत उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले के चलते उन्हें पेशेवर नुकसान के साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा। अब अदालत के फैसले के बाद वह उस पुराने विवाद की छाया से बाहर निकलने की उम्मीद कर सकते हैं।
जैकब मार्टिन की कहानी यह भी बताती है कि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे का असर केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव व्यक्ति के करियर, रोजगार, प्रतिष्ठा और निजी जीवन पर भी पड़ सकता है। उनके मामले में 22 साल बाद आया फैसला उनके लिए लंबे इंतजार के बाद मिली एक बड़ी राहत है।
